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रामनगरी के आठ कुंडों का लौटेगा त्रेतायुगीन वैभव
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अयोध्या। त्रेतायुग की तरह अयोध्या को सजाने को लेकर बहुत सारी योजनाओं पर काम चल रहा है। इसी क्रम में अयोध्या की पौराणिकता बयां करने वाले कुंडों का भी अब पौराणिक वैभव लौटेगा।
पहले चरण में विकास प्राधिकरण द्वारा रामनगरी के आठ पौराणिक कुंडों को चिह्नित कर उन्हें भव्यता देने का काम शुरू कर दिया गया है। इन कुंडों की साफ-सफाई का अभियान प्रारंभ कर दिया गया है।
यहां यात्री सुविधाएं भी विकसित करने की योजना है। साथ ही अब कुंडों का संरक्षण जन सहभागिता के आधार पर किया जाएगा। हर कुंड के संरक्षण के लिए स्थानीय लोगों की एक समिति भी बनाई जा रही है।
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विकास प्राधिकरण की टीम ने रामनगरी के आठ पौराणिक कुंडों का वैभव लौटाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। एक एनजीओ के माध्यम से यह कार्य कराया जा रहा है।
पहले चरण में आठ कुंड विद्याकुंड, खजुहाकुंड, अग्नि कुंड, सीता कुंड, मनमुनि कुंड, ब्रह्मकुंड व लालडिग्गी तालाब का चयन किया गया है। इन कुंडों की साफ-सफाई का काम प्रारंभ किया जा चुका है।
अब तक विद्याकुंड, ब्रह्मकुंड व लाल डिग्गी तालाब की साफ-सफाई का कार्य कराया जा चुका है। शीघ्र ही अन्य कुंडों की भी सफाई कराई जाएगी। सफाई के क्रम में विकास प्राधिकरण के इंजीनियर हर कुंड का वाटर लेबल भी चेक कर रहे हैं।
साथ की कुंड के जल की शुद्धता भी मापी जा रही है। इंजीनियर की जांच में अभी तक इन आठ कुंडों का जल बहुत ही स्वच्छ पाया गया है। कुंडों की साफ-सफाई के बाद यहां यात्री सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
बैठने के इंतजाम, ग्रीनरी सहित कुंडों में लोटस पाउंड भी बनाए जाएंगे। प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त की जाएगी। कुंडों की सीढ़ियों की मरम्मत कराई जाएगी। कुंडों के परिसर का रंग-रोगन भी कराए जाने की तैयारी है।
जन सहभागिता के आधार पर कुंडों के संरक्षण की भी योजना बनी है। हर कुंड के संरक्षण के लिए स्थानीय लोगों की एक समिति बनाई जा रही है। जिसका दायित्व कुंडों का संरक्षण व संवर्धन करने में सहयोग करना होगा।
विकास प्राधिकरण के लीक मैनेजर जगन्नाथ पांडेय ने बताया कि उपाध्यक्ष विशाल सिंह के निर्देशन में सबसे पहले कुंडों की साफ-सफाई कराई जाएगी। उसके बाद सुविधाएं विकसित करने व उनकी पौराणिकता के अनुसार उन्हें भव्यता देने का काम किया जाएगा।
रामनगरी के सभी कुंडों को लेकर कोई न कोई मान्यता है। सबकी पौराणिकता धार्मिक ग्रंथों में है। ऐसे में विकास प्राधिकरण की योजना है कि हर कुंड से जुड़ा इतिहास व मान्यता भी कुंडों के पास अंकित की जाएगी ताकि युवा पीढ़ी इनकी पौराणिकता जान सके।
खर्जुकुंड को लेकर मान्यता है कि यहां हर रविवार को स्नान करने से चर्मरोग ठीक होता है। विद्याकुंड को लेकर मान्यता है कि इसके दर्शन से समस्त सिद्धियां सहज की प्राप्त हो जाती हैं।
अग्नि कुंड को अज्ञान, अंधकार नाशक बताया गया है। इसी तरह अन्य कुंडों में स्नान-दर्शन, पूजन की महत्ता स्कंदपुराण व रुद्रयामल ग्रंथ में उल्लिखित है।
रामनगरी के हर पौराणिक कुंड के वार्षिकी का भी बहुत महत्व है। हर कुंड का वर्ष में एक तिथि पर विशेष पूजन-अर्चन परिक्रमा का महात्मय भी स्कंद पुराण व रुद्रयामल में वर्णित है।
अग्निकुंड को लेकर वर्णित है कि अगहन कृष्ण प्रतिपदा को इसकी वार्षिकी यात्रा करनी चाहिए, पुण्य लाभ होता है। विद्याकुंड को लेकर मान्यता है कि आश्विन शुक्ल नवरात्र की अष्टमी को इस कुंड की परिक्रमा पूजा-अर्चना करने से बुद्धि एवं एश्वर्य बढ़ता है।
कुंडों की पौराणिकता को देखते हुए विकास प्राधिकरण ने योजना बनाई कि कुंडों के वार्षिक विशेष दिन पर यहां वैदिक आचार्यों द्वारा पूजन-अनुष्ठान भी कराया जाएगा।
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पहले चरण में विकास प्राधिकरण द्वारा रामनगरी के आठ पौराणिक कुंडों को चिह्नित कर उन्हें भव्यता देने का काम शुरू कर दिया गया है। इन कुंडों की साफ-सफाई का अभियान प्रारंभ कर दिया गया है।
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यहां यात्री सुविधाएं भी विकसित करने की योजना है। साथ ही अब कुंडों का संरक्षण जन सहभागिता के आधार पर किया जाएगा। हर कुंड के संरक्षण के लिए स्थानीय लोगों की एक समिति भी बनाई जा रही है।
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विकास प्राधिकरण की टीम ने रामनगरी के आठ पौराणिक कुंडों का वैभव लौटाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। एक एनजीओ के माध्यम से यह कार्य कराया जा रहा है।
पहले चरण में आठ कुंड विद्याकुंड, खजुहाकुंड, अग्नि कुंड, सीता कुंड, मनमुनि कुंड, ब्रह्मकुंड व लालडिग्गी तालाब का चयन किया गया है। इन कुंडों की साफ-सफाई का काम प्रारंभ किया जा चुका है।
अब तक विद्याकुंड, ब्रह्मकुंड व लाल डिग्गी तालाब की साफ-सफाई का कार्य कराया जा चुका है। शीघ्र ही अन्य कुंडों की भी सफाई कराई जाएगी। सफाई के क्रम में विकास प्राधिकरण के इंजीनियर हर कुंड का वाटर लेबल भी चेक कर रहे हैं।
साथ की कुंड के जल की शुद्धता भी मापी जा रही है। इंजीनियर की जांच में अभी तक इन आठ कुंडों का जल बहुत ही स्वच्छ पाया गया है। कुंडों की साफ-सफाई के बाद यहां यात्री सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
बैठने के इंतजाम, ग्रीनरी सहित कुंडों में लोटस पाउंड भी बनाए जाएंगे। प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त की जाएगी। कुंडों की सीढ़ियों की मरम्मत कराई जाएगी। कुंडों के परिसर का रंग-रोगन भी कराए जाने की तैयारी है।
जन सहभागिता के आधार पर कुंडों के संरक्षण की भी योजना बनी है। हर कुंड के संरक्षण के लिए स्थानीय लोगों की एक समिति बनाई जा रही है। जिसका दायित्व कुंडों का संरक्षण व संवर्धन करने में सहयोग करना होगा।
विकास प्राधिकरण के लीक मैनेजर जगन्नाथ पांडेय ने बताया कि उपाध्यक्ष विशाल सिंह के निर्देशन में सबसे पहले कुंडों की साफ-सफाई कराई जाएगी। उसके बाद सुविधाएं विकसित करने व उनकी पौराणिकता के अनुसार उन्हें भव्यता देने का काम किया जाएगा।
रामनगरी के सभी कुंडों को लेकर कोई न कोई मान्यता है। सबकी पौराणिकता धार्मिक ग्रंथों में है। ऐसे में विकास प्राधिकरण की योजना है कि हर कुंड से जुड़ा इतिहास व मान्यता भी कुंडों के पास अंकित की जाएगी ताकि युवा पीढ़ी इनकी पौराणिकता जान सके।
खर्जुकुंड को लेकर मान्यता है कि यहां हर रविवार को स्नान करने से चर्मरोग ठीक होता है। विद्याकुंड को लेकर मान्यता है कि इसके दर्शन से समस्त सिद्धियां सहज की प्राप्त हो जाती हैं।
अग्नि कुंड को अज्ञान, अंधकार नाशक बताया गया है। इसी तरह अन्य कुंडों में स्नान-दर्शन, पूजन की महत्ता स्कंदपुराण व रुद्रयामल ग्रंथ में उल्लिखित है।
रामनगरी के हर पौराणिक कुंड के वार्षिकी का भी बहुत महत्व है। हर कुंड का वर्ष में एक तिथि पर विशेष पूजन-अर्चन परिक्रमा का महात्मय भी स्कंद पुराण व रुद्रयामल में वर्णित है।
अग्निकुंड को लेकर वर्णित है कि अगहन कृष्ण प्रतिपदा को इसकी वार्षिकी यात्रा करनी चाहिए, पुण्य लाभ होता है। विद्याकुंड को लेकर मान्यता है कि आश्विन शुक्ल नवरात्र की अष्टमी को इस कुंड की परिक्रमा पूजा-अर्चना करने से बुद्धि एवं एश्वर्य बढ़ता है।
कुंडों की पौराणिकता को देखते हुए विकास प्राधिकरण ने योजना बनाई कि कुंडों के वार्षिक विशेष दिन पर यहां वैदिक आचार्यों द्वारा पूजन-अनुष्ठान भी कराया जाएगा।