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कुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने की कोशिश को झटका
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jul 2015 10:49 PM IST
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जिले में अति कुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने की योजना शुरुआत में ही असफल साबित हो रही है। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में मंजूरी नहीं मिलने और संविदा कर्मियों की नियुक्ति के अभाव में कुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने की योजना खटाई में पड़ती नजर आ रही है।
जिले में 65 हजार बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। इसके अलावा 570 बच्चें ऐसे पाए गए जो अति कुपोषित हैं। इनको पौष्टिक भोजन नहीं मिल पा रहा है। संतुलित भोजन के अभाव में शारीरिक विकास के साथ बच्चों का मानसिक विकास भी अवरुद्ध हो गया है। इन बच्चों की सेहत सुधारने के लिए जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केन्द्र स्थापित किया जाना था।
इसके लिए 10 बेड का एक वार्ड, बरामदा और मां के रहने की भी व्यवस्था होनी थी। बालरोग विशेषज्ञ की मौजूदगी में पौष्टिक भोजन और इलाज किया जाना था ताकि बच्चों की सेहत सुधरे। इसके अलावा कुपोषित बच्चे की मां को पौष्टिक भोजन बनाने का तरीका भी सिखाया जाना था। अस्पताल में भर्ती बच्चों को पौष्टिक भोजन खिलाया जाना है। पुनर्वास केन्द्र पर बच्चों की जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई जानी है।
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एनएचएम के तहत संचालित इस योजना को अंतिम रूप देने के लिए संविदा पर चिकित्सक और पैरा मेडिकल स्टाफ नियुक्त किया जाना है। कुपोषित बच्चों की देख-रेख के लिए संविदा पर एक चिकित्सक, न्यूट्रीशिनिस्ट, चार स्टाफ नर्स, एक-एक रसोईया और एक केयर टेकर नियुक्त किए जाने हैं। इनकी नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए लेकिन किसी भी पद पर तैनाती नहीं हो सकी। नतीजतन चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती के अभाव में योजना का संचालन नहीं हो पा रहा है।
चिकित्सक और पैरोडिकल स्टाफ की नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए थे। शासन से नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई है। नियुक्ति होने के बाद ही पोषण पुनर्वास केन्द्र को शुरू किया जाएगा। - डॉ. राधेश्याम यादव, मुख्य चिकित्साधिकारी
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जिले में 65 हजार बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। इसके अलावा 570 बच्चें ऐसे पाए गए जो अति कुपोषित हैं। इनको पौष्टिक भोजन नहीं मिल पा रहा है। संतुलित भोजन के अभाव में शारीरिक विकास के साथ बच्चों का मानसिक विकास भी अवरुद्ध हो गया है। इन बच्चों की सेहत सुधारने के लिए जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केन्द्र स्थापित किया जाना था।
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इसके लिए 10 बेड का एक वार्ड, बरामदा और मां के रहने की भी व्यवस्था होनी थी। बालरोग विशेषज्ञ की मौजूदगी में पौष्टिक भोजन और इलाज किया जाना था ताकि बच्चों की सेहत सुधरे। इसके अलावा कुपोषित बच्चे की मां को पौष्टिक भोजन बनाने का तरीका भी सिखाया जाना था। अस्पताल में भर्ती बच्चों को पौष्टिक भोजन खिलाया जाना है। पुनर्वास केन्द्र पर बच्चों की जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई जानी है।
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एनएचएम के तहत संचालित इस योजना को अंतिम रूप देने के लिए संविदा पर चिकित्सक और पैरा मेडिकल स्टाफ नियुक्त किया जाना है। कुपोषित बच्चों की देख-रेख के लिए संविदा पर एक चिकित्सक, न्यूट्रीशिनिस्ट, चार स्टाफ नर्स, एक-एक रसोईया और एक केयर टेकर नियुक्त किए जाने हैं। इनकी नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए लेकिन किसी भी पद पर तैनाती नहीं हो सकी। नतीजतन चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती के अभाव में योजना का संचालन नहीं हो पा रहा है।
चिकित्सक और पैरोडिकल स्टाफ की नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए थे। शासन से नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई है। नियुक्ति होने के बाद ही पोषण पुनर्वास केन्द्र को शुरू किया जाएगा। - डॉ. राधेश्याम यादव, मुख्य चिकित्साधिकारी