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रिटेनिंग वॉल निर्माण के लिए टेस्टिंग का काम शुरू
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अयोध्या। राममंदिर निर्माण का काम जोरों पर चल रहा है। अभी राममंदिर की नींव के ऊपर डेढ़ मीटर मोटी रॉफ्ट डालने की प्रक्रिया चल रही है। कुल 17 ब्लॉक में रॉफ्ट ढाली जाएगी अब तक 12 ब्लॉक ढाले जा चुके हैं।
इस बीच राममंदिर के तीन तरफ बनने वाले रिटेनिंग वॉल( सुरक्षा की दीवार) के निर्माण की भी प्रक्रिया शुरू हो गई। निर्माण से पूर्व एलएंडटी ने पश्चिम दिशा में टेस्टिंग शुरू कर दी है, इसी दिशा से वॉल का निर्माण शुरू होगा।
मंदिर को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए 12 मीटर गहरी दीवार का निर्माण होना है। दिल्ली में हुई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में रिटेनिंग वॉल (सुुरक्षा दीवार) व परकोटे की डिजाइन पर मंथन करते हुए इसके प्रारूप पर सभी की सहमति बन गई है।
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मंदिर को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया जाना है। तय हुआ है कि राममंदिर के तीन तरफ पश्चिम, उत्तर व दक्षिण दिशा में रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया जाएगा।
रिटेनिंग वॉल का निर्माण होने के बाद परकोटे का काम शुरू होगा। परकोटे का निर्माण भी पश्चिम दिशा से ही शुरू होगा। इसका निर्माण भी एलएंडटी कराएगी।
इससे पूर्व एक तरफ जहां नींव के ऊपर डेढ़ मीटर मोटी रॉफ्ट डालने का काम संचालित है तो दूसरी तरफ रिटेनिंग वॉल के लिए टेस्टिंग शुरू कर दी गई। पश्चिम दिशा में रिटेनिंग वॉल के लिए खोदाई की जा रही है।
इसके बाद मिट्टी की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि रिटेनिंग वॉल कितनी गहरी बनाई जाएगी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि राममंदिर के तीन तरफ बनने वाले रिटेनिंग वॉल का निर्माण पत्थरों से किया जाएगा।
नदी के प्रवाह से राममंदिर को सुरक्षित रखने के लिए रिटेनिंग वॉल यानी सुरक्षा की दीवार को काफी मजबूत बनाया जाना जरूरी है। इसके कारण रिटेनिंग वॉल की गहराई जमीन के अंदर करीब 12 मीटर रखी जाएगी।
इसके लिए मिट्टी की क्षमता जांचने का काम एलएंडटी ने पश्चिम दिशा में शुरू कर दिया है। दिल्ली में हुई बैठक में रॉफ्ट की डिजाइन में आंशिक बदलाव किया गया है। ट्रस्टी डॉ.अनिल मिश्र ने बताया कि रॉफ्ट की मोटाई को कम किया गया है।
रॉफ्ट के 17 ब्लॉकों में से 12 तैयार हो चुके हैं। शेष ब्लॉकों का आकार बदला जा रहा है, क्योंकि ब्लॉकों को पकने में दिक्कत हो रही है। अब टुकड़े की माप 27 गुणे 27 से घटाकर अब 9 गुणे 9 करने पर सहमति बनी है। रॉफ्ट निर्माण का काम अब दिसंबर तक पूरा हो पाएगा।
डॉ.अनिल मिश्र ने बताया कि सीबीआरआई रुड़की द्वारा परकोटे में कौन से पत्थरों का इस्तेमाल किया जाए इसको लेकर अध्ययन किया जा रहा है। उसकी रिपोर्ट के अनुसार यह काम शुरू होगा।
चूंकि परकोटे के खंभों व दीवारों पर रामायणकालीन चित्र के साथ देवी-देवताओं के चित्र भी उकेरे जाएंगे। ऐसे में पत्थरों पर नक्काशी के दौरान वे टूटे ने इसको लेकर मंथन चल रहा है।
फिलहाल परकोटे का दर्शन करते ही रामनगरी की समृद्ध धार्मिकता व रामायण युग का अहसास भक्तों को होगा, इसको लेकर संत-धर्माचार्यों से भी सुझाव लिया जा रहा है।
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इस बीच राममंदिर के तीन तरफ बनने वाले रिटेनिंग वॉल( सुरक्षा की दीवार) के निर्माण की भी प्रक्रिया शुरू हो गई। निर्माण से पूर्व एलएंडटी ने पश्चिम दिशा में टेस्टिंग शुरू कर दी है, इसी दिशा से वॉल का निर्माण शुरू होगा।
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मंदिर को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए 12 मीटर गहरी दीवार का निर्माण होना है। दिल्ली में हुई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में रिटेनिंग वॉल (सुुरक्षा दीवार) व परकोटे की डिजाइन पर मंथन करते हुए इसके प्रारूप पर सभी की सहमति बन गई है।
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मंदिर को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया जाना है। तय हुआ है कि राममंदिर के तीन तरफ पश्चिम, उत्तर व दक्षिण दिशा में रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया जाएगा।
रिटेनिंग वॉल का निर्माण होने के बाद परकोटे का काम शुरू होगा। परकोटे का निर्माण भी पश्चिम दिशा से ही शुरू होगा। इसका निर्माण भी एलएंडटी कराएगी।
इससे पूर्व एक तरफ जहां नींव के ऊपर डेढ़ मीटर मोटी रॉफ्ट डालने का काम संचालित है तो दूसरी तरफ रिटेनिंग वॉल के लिए टेस्टिंग शुरू कर दी गई। पश्चिम दिशा में रिटेनिंग वॉल के लिए खोदाई की जा रही है।
इसके बाद मिट्टी की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि रिटेनिंग वॉल कितनी गहरी बनाई जाएगी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि राममंदिर के तीन तरफ बनने वाले रिटेनिंग वॉल का निर्माण पत्थरों से किया जाएगा।
नदी के प्रवाह से राममंदिर को सुरक्षित रखने के लिए रिटेनिंग वॉल यानी सुरक्षा की दीवार को काफी मजबूत बनाया जाना जरूरी है। इसके कारण रिटेनिंग वॉल की गहराई जमीन के अंदर करीब 12 मीटर रखी जाएगी।
इसके लिए मिट्टी की क्षमता जांचने का काम एलएंडटी ने पश्चिम दिशा में शुरू कर दिया है। दिल्ली में हुई बैठक में रॉफ्ट की डिजाइन में आंशिक बदलाव किया गया है। ट्रस्टी डॉ.अनिल मिश्र ने बताया कि रॉफ्ट की मोटाई को कम किया गया है।
रॉफ्ट के 17 ब्लॉकों में से 12 तैयार हो चुके हैं। शेष ब्लॉकों का आकार बदला जा रहा है, क्योंकि ब्लॉकों को पकने में दिक्कत हो रही है। अब टुकड़े की माप 27 गुणे 27 से घटाकर अब 9 गुणे 9 करने पर सहमति बनी है। रॉफ्ट निर्माण का काम अब दिसंबर तक पूरा हो पाएगा।
डॉ.अनिल मिश्र ने बताया कि सीबीआरआई रुड़की द्वारा परकोटे में कौन से पत्थरों का इस्तेमाल किया जाए इसको लेकर अध्ययन किया जा रहा है। उसकी रिपोर्ट के अनुसार यह काम शुरू होगा।
चूंकि परकोटे के खंभों व दीवारों पर रामायणकालीन चित्र के साथ देवी-देवताओं के चित्र भी उकेरे जाएंगे। ऐसे में पत्थरों पर नक्काशी के दौरान वे टूटे ने इसको लेकर मंथन चल रहा है।
फिलहाल परकोटे का दर्शन करते ही रामनगरी की समृद्ध धार्मिकता व रामायण युग का अहसास भक्तों को होगा, इसको लेकर संत-धर्माचार्यों से भी सुझाव लिया जा रहा है।