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तारुन के युवक को डेंगू
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2015 11:23 PM IST
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डॉक्टरों ने यहां डेंगू की जांच किट न होने की बात कह रात में ही उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया मगर अस्पताल प्रशासन मामले को झुठलाने में जुटा रहा।
डेंगू एनएस-1 पॉजीटिव की रिपोर्ट के बावजूद भी उसे मेडिकल वार्ड में अन्य रोगियों के साथ रखा गया है। युवक का प्लेटलेट्स एक लाख से नीचे है और यह घटता ही जा रहा है।
हालांकि डॉक्टरों ने इसे खतरे की स्थिति नहीं माना है। उनका कहना है कि 30 हजार के नीचे प्लेटलेट्स आने पर ही मरीज क्रिटिकल माना जाता है।
जिले के तारुन थानांतर्गत तारडीह गांव निवासी जितेंद्र यादव (19) जयपुर के अंकित पाइप फैक्ट्री सिवार मोड़ विंदाइका में काम करता है। उसे बुखार आने पर साथियों ने राजगिरीश हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां 12 सितंबर को डेंगू जांच में एनएस-1 पॉजीटिव पाया गया।
वहां पैसा खत्म होने पर युवक बुधवार शाम घर लौट आया। उसके पिता रामबहादुर का कहना है कि शरीर बुखार से तप रहा था, उल्टी हो रही थी।
जब जितेंद्र ने खुद को डेंगू होना बताया तो उसे तत्काल सीएचसी में भर्ती कराया गया। इलाज कर रहे डॉ. पीएन तिवारी ने बताया कि युवक का प्लेटलेट्स एक लाख से कम था, जबकि यह डेढ़ लाख से साढ़े चार लाख के बीच होना चाहिए।
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रिपोर्ट देखी गई तो वह डेंगू पीड़ित एनएस-1 पॉजीटिव पाया गया। यहां एनएस किट (डेंगू जांच की किट) न होने से उसे तत्काल रात में ही जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
पीड़ित जितेंद्र का कहना है कि जयपुर में एक ही दिन में दस हजार रुपये खर्च हो गए। भाई बबलू यादव को गांव से बुलाया, फिर धीरे से अस्पताल से निकलकर घर चल दिया।
बुधवार को शाम पहुंचते ही अचानक तेज बुखार चढ़ा और उल्टी हुई तो घबरा गया। लगा कि डेंगू का अटैक है। अब इलाज से स्वस्थ प्रतीत हो रहा है। ड्रिप चढ़ाई जा रही है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. सतेंद्र सिंह ने बताया कि जयपुर के अस्पताल की रिपोर्ट में जितेंद्र 12 सितंबर को डेंगू पीड़ित बताया गया है। लेकिन उसके शरीर पर डेंगू जैसे कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं।
सामान्य बुखार की दवाएं दी जा रही हैं। एनएस किट जांच के लिए ब्लड सैंपल भेजा गया है। एक सप्ताह में डेंगू के वायरस निगेटिव हो जाते हैं, ऐसे में जांच होने पर ही डेंगू है या नहीं, इस बारे में कह सकते हैं।
बीकापुर सीएचसी अधीक्षक डॉ. फिरोज अहमद ने बताया कि सीएचसी में डेंगू बुखार की जांच के लिए किसी प्रकार की किट नहीं होने से उसे रेफर किया गया है।
बताया कि जयपुर से आए युवक की जांच रिपोर्ट में प्लेटलेट्स एक लाख के नीचे था, जिससे डेंगू का प्रथमदृष्टया लक्षण दिखा है। बताया कि इस केंद्र पर प्लेटलेट्स चढ़ाने और अन्य प्रकार की जांच करने की कोई व्यवस्था नहीं है, इसलिए उसे जिला अस्पताल भेजा गया है।
रुक-रुक कर बुखार आना, पेट दर्द और उल्टी होने या शरीर में अचानक दर्द शुुरू होने और खांसी आने जैसे लक्षण हों तो तुरंत लोगों को चिकित्सक के पास जाना चाहिए।
कहा कि इसमें पपीता का फल और रस इत्यादि बचाव के लिए लिया जा सकता है। लोग डरें नहीं, बल्कि यदि ऐसा लक्षण हो तो चिकित्सक से परामर्श लेकर अमल करें।
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डेंगू एनएस-1 पॉजीटिव की रिपोर्ट के बावजूद भी उसे मेडिकल वार्ड में अन्य रोगियों के साथ रखा गया है। युवक का प्लेटलेट्स एक लाख से नीचे है और यह घटता ही जा रहा है।
हालांकि डॉक्टरों ने इसे खतरे की स्थिति नहीं माना है। उनका कहना है कि 30 हजार के नीचे प्लेटलेट्स आने पर ही मरीज क्रिटिकल माना जाता है।
जिले के तारुन थानांतर्गत तारडीह गांव निवासी जितेंद्र यादव (19) जयपुर के अंकित पाइप फैक्ट्री सिवार मोड़ विंदाइका में काम करता है। उसे बुखार आने पर साथियों ने राजगिरीश हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां 12 सितंबर को डेंगू जांच में एनएस-1 पॉजीटिव पाया गया।
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वहां पैसा खत्म होने पर युवक बुधवार शाम घर लौट आया। उसके पिता रामबहादुर का कहना है कि शरीर बुखार से तप रहा था, उल्टी हो रही थी।
जब जितेंद्र ने खुद को डेंगू होना बताया तो उसे तत्काल सीएचसी में भर्ती कराया गया। इलाज कर रहे डॉ. पीएन तिवारी ने बताया कि युवक का प्लेटलेट्स एक लाख से कम था, जबकि यह डेढ़ लाख से साढ़े चार लाख के बीच होना चाहिए।
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रिपोर्ट देखी गई तो वह डेंगू पीड़ित एनएस-1 पॉजीटिव पाया गया। यहां एनएस किट (डेंगू जांच की किट) न होने से उसे तत्काल रात में ही जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
पीड़ित जितेंद्र का कहना है कि जयपुर में एक ही दिन में दस हजार रुपये खर्च हो गए। भाई बबलू यादव को गांव से बुलाया, फिर धीरे से अस्पताल से निकलकर घर चल दिया।
बुधवार को शाम पहुंचते ही अचानक तेज बुखार चढ़ा और उल्टी हुई तो घबरा गया। लगा कि डेंगू का अटैक है। अब इलाज से स्वस्थ प्रतीत हो रहा है। ड्रिप चढ़ाई जा रही है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. सतेंद्र सिंह ने बताया कि जयपुर के अस्पताल की रिपोर्ट में जितेंद्र 12 सितंबर को डेंगू पीड़ित बताया गया है। लेकिन उसके शरीर पर डेंगू जैसे कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं।
सामान्य बुखार की दवाएं दी जा रही हैं। एनएस किट जांच के लिए ब्लड सैंपल भेजा गया है। एक सप्ताह में डेंगू के वायरस निगेटिव हो जाते हैं, ऐसे में जांच होने पर ही डेंगू है या नहीं, इस बारे में कह सकते हैं।
बीकापुर सीएचसी अधीक्षक डॉ. फिरोज अहमद ने बताया कि सीएचसी में डेंगू बुखार की जांच के लिए किसी प्रकार की किट नहीं होने से उसे रेफर किया गया है।
बताया कि जयपुर से आए युवक की जांच रिपोर्ट में प्लेटलेट्स एक लाख के नीचे था, जिससे डेंगू का प्रथमदृष्टया लक्षण दिखा है। बताया कि इस केंद्र पर प्लेटलेट्स चढ़ाने और अन्य प्रकार की जांच करने की कोई व्यवस्था नहीं है, इसलिए उसे जिला अस्पताल भेजा गया है।
रुक-रुक कर बुखार आना, पेट दर्द और उल्टी होने या शरीर में अचानक दर्द शुुरू होने और खांसी आने जैसे लक्षण हों तो तुरंत लोगों को चिकित्सक के पास जाना चाहिए।
कहा कि इसमें पपीता का फल और रस इत्यादि बचाव के लिए लिया जा सकता है। लोग डरें नहीं, बल्कि यदि ऐसा लक्षण हो तो चिकित्सक से परामर्श लेकर अमल करें।