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पार्किंग व अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन पर ली शरण
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अयोध्या। यूक्रेन में जिले के सात छात्र फंसे हुए हैं। शनिवार को कुछ और छात्रों के यूक्रेन में फंसे होने की जानकारी मिली है। छात्रों की सुरक्षा को लेकर परिवारीजन बेचैन हैं। फंसे हुए छात्रों से परिवारीजन लगातार संपर्क कर रहे हैं। उन्होंने यूक्रेन की जो स्थिति बयां की हैं, वे डराने वाली है। फंसे हुए छात्र किसी तरह कार पार्किंग व अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन में छुपकर जान बचा रहे हैं। कहीं-कहीं छात्रों को बंकर में शिफ्ट किया गया है। परिवारीजनों ने भारत सरकार से यूक्रेन में फंसे अपने बच्चों को सकुशल भारत वापस लाने की गुहार लगाई गई है।
यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को बहुत ही बुरी स्थिति से जूझना पड़ रहा है। शनिवार को शहर के चार और छात्रों के यूक्रेन में फंसे होने की जानकारी मिली है। ग्राम सरियावां थाना पूराकलंदर, बीकापुर के निवासी डॉ. बजेश कुमार पाठक का पुत्र श्रीश पाठक भी यूक्रेन में फंसा हुआ है। श्रीश के परिवारीजनों ने बताया कि वह 13 दिसंबर 2020 से यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। शुक्रवार को उनसे बात हुई थी। बताया कि सैकड़ों भारतीय छात्रों को बंकर में शरण दी गई है।
सबसे ज्यादा समस्या मोबाइल चार्जिंग में हो रही है, चार्ज न होने से मोबाइल बंद हो जाते है, ऐसे में छात्र किसी से संपर्क भी नहीं कर पाते। श्रीश ने अपने परिवारीजन से बताया कि शुक्रवार को उसे पूरे दिन भूखा रहना पड़ा था। परिजनों ने भारत सरकार से अपने बच्चे को सकुशल यूक्रेन से निकालने की अपील की है।
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जिले के मया के हैदरपुर निवासी अमरजीत वर्मा ने बताया कि उनका छोटा भाई सुभाष वर्मा भी यूक्रेन में फंसा हुआ है। वह तीन वर्षों से यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। बताया कि 28 फरवरी को उसे आना था, टिकट भी मिला था लेकिन अब टिकट कैंसिल हो गया है। बात भी ठीक से नहीं हो पा रही है। कहा कि भारत सरकार से अपील है कि इमरजेंसी फ्लाइट की व्यवस्था कर भाई को वापस लाने का प्रयास करे।
शहर के महाजनी टोला रिकाबगंज निवासी आशुतोष गुप्ता का पुत्र और भतीजा यूक्रेन में फंसे हुए हैं। उन्होंने शनिवार को अमर उजाला से बात करते हुए बताया कि बच्चों को बहुत विकट स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। उनका बेटा त्रिशूल गुप्ता व भतीजा जयंत प्रताप गुप्ता पिछले चार वर्षों से यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। फोन पर बच्चों से बात हुई तो उन्होंने वहां की जो स्थिति बताई, वह हतप्रभ करने वाली है।
आशुतोष बताते हैं कि खतरे का सायरन बजने पर बच्चे तुरंत कार पार्किंग या भूमिगत मेट्रो स्टेशन में जाकर शरण ले लेते हैं। दिन तो बीत जाता है लेकिन रात में भीषण ठंड व बर्फबारी होने लगती है जिससे बच्चों को वापस कमरे पर आना पड़ता है, पूरी रात बच्चे भय में बिताते हैं। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि बच्चों को सुरक्षित निकाला जाए।
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यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को बहुत ही बुरी स्थिति से जूझना पड़ रहा है। शनिवार को शहर के चार और छात्रों के यूक्रेन में फंसे होने की जानकारी मिली है। ग्राम सरियावां थाना पूराकलंदर, बीकापुर के निवासी डॉ. बजेश कुमार पाठक का पुत्र श्रीश पाठक भी यूक्रेन में फंसा हुआ है। श्रीश के परिवारीजनों ने बताया कि वह 13 दिसंबर 2020 से यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। शुक्रवार को उनसे बात हुई थी। बताया कि सैकड़ों भारतीय छात्रों को बंकर में शरण दी गई है।
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सबसे ज्यादा समस्या मोबाइल चार्जिंग में हो रही है, चार्ज न होने से मोबाइल बंद हो जाते है, ऐसे में छात्र किसी से संपर्क भी नहीं कर पाते। श्रीश ने अपने परिवारीजन से बताया कि शुक्रवार को उसे पूरे दिन भूखा रहना पड़ा था। परिजनों ने भारत सरकार से अपने बच्चे को सकुशल यूक्रेन से निकालने की अपील की है।
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जिले के मया के हैदरपुर निवासी अमरजीत वर्मा ने बताया कि उनका छोटा भाई सुभाष वर्मा भी यूक्रेन में फंसा हुआ है। वह तीन वर्षों से यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। बताया कि 28 फरवरी को उसे आना था, टिकट भी मिला था लेकिन अब टिकट कैंसिल हो गया है। बात भी ठीक से नहीं हो पा रही है। कहा कि भारत सरकार से अपील है कि इमरजेंसी फ्लाइट की व्यवस्था कर भाई को वापस लाने का प्रयास करे।
शहर के महाजनी टोला रिकाबगंज निवासी आशुतोष गुप्ता का पुत्र और भतीजा यूक्रेन में फंसे हुए हैं। उन्होंने शनिवार को अमर उजाला से बात करते हुए बताया कि बच्चों को बहुत विकट स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। उनका बेटा त्रिशूल गुप्ता व भतीजा जयंत प्रताप गुप्ता पिछले चार वर्षों से यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। फोन पर बच्चों से बात हुई तो उन्होंने वहां की जो स्थिति बताई, वह हतप्रभ करने वाली है।
आशुतोष बताते हैं कि खतरे का सायरन बजने पर बच्चे तुरंत कार पार्किंग या भूमिगत मेट्रो स्टेशन में जाकर शरण ले लेते हैं। दिन तो बीत जाता है लेकिन रात में भीषण ठंड व बर्फबारी होने लगती है जिससे बच्चों को वापस कमरे पर आना पड़ता है, पूरी रात बच्चे भय में बिताते हैं। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि बच्चों को सुरक्षित निकाला जाए।