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अयोध्या में समाधान की 'सुप्रीम' पहल भी हुई नाकाम, अब कोर्ट में छह अगस्त से रोजाना सुनवाई
Sat, 03 Aug 2019 01:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 03 Aug 2019 01:33 AM IST
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राम मंदिर
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अयोध्या मामले में सुलह-समझौते की सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई कोशिश भी नाकाम हो गई। आठ मार्च से 155 दिन मध्यस्थता पैनल ने सभी पक्षों को बुलाकर तथ्य-सुबूतों और बयानों को परखा, लेकिन आपसी सहमति से मामले के समाधान की कोई एक राय नहीं बन सकी।
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इसका हश्र भी वही हुआ जो नरसिंहराव सरकार, अटल सरकार, चंद्रशेखर सरकार समेत कई धर्मगुरुओं की ओर से की गई पहल का हुआ था। मामले के पक्षकार कहते हैं कि सुलह-समझौता के दौरान मुस्लिम पक्ष मस्जिद की जगह छोड़कर राममंदिर बनाने पर कोई आपत्ति न होने अड़ा रहा, जबकि हिंदू पक्ष गर्भगृह बताते हुए उसे छोड़ने पर कतई तैयार नहीं था।
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पक्षकार कहते हैं कि जब जड़ ही नहीं सुलझ रही थी तो लगातार सुनवाई के नाम पर सिर्फ धन व कीमती समय बर्बाद हुआ। अब छह अगस्त से रोजाना सुनवाई करने का सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सराहनीय है। सभी चाहते हैं कि कोर्ट से अतिशीघ्र फैसला आए।
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पहले भी अयोध्या मामले के समाधान के लिए कई गंभीर कोशिशें हुईं, लेकिन कोई भी कोशिश अपने अंजाम तक नहीं पहुंच सकी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल अयोध्या मामले के सुलह-समझौते से समाधान के लिए मध्यस्थता कमेटी का गठन किया था। 8 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एफएम कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी।
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मध्यस्थता समिति में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू भी शामिल थे। कोर्ट ने दो माह में प्रगति रिपोर्ट मध्यस्थता कमेटी से मांगी थी। दो माह बाद मध्यस्थता कमेटी ने सुनवाई के लिए समय बढ़ाने की मांग की थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने पुन: मौका दिया था। आठ मार्च से लेकर अब तक 155 दिन अयोध्या में सभी पक्षों से विचार विमर्श किया गया। समिति ने कई चक्रों में दोनों पक्षकारों एवं उनके अधिवक्ताओं से अलग-अलग वार्ता की।
वार्ता पूरी तरह से गोपनीय रही। सुनवाई स्थल पर किसी को भी जाने की अनुमति नहीं दी। किस पक्ष से क्या वार्ता हो रही है यह किसी को पता नहीं होता था। दो माह बाद मध्यस्थता कमेटी ने सील बंद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट मेें सौंपकर सुनवाई के लिए समय मांगा था। एक अगस्त को पुन: पैनल ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी।
हिंदू पक्षकार गोपाल सिंह विशारद की ओर से राजेंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में मध्यस्थता प्रक्रिया को रोककर मामले की रोज सुनवाई की गुहार लगाई क्योंकि उनके मुताबिक मध्यस्थता की दिशा में कोई खास प्रगति नहीं हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए छह अगस्त से डे-टू-डे सुनवाई का निर्णय लिया।
प्रतिदिन सुनवाई के निर्णय से पक्षकार खुश, कहा अब जल्द हो फैसला
राममंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अब 6 अगस्त से रोज सुनवाई करने का फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय पर पक्षकारों ने हर्ष व्यक्त किया है। हिंदू पक्षकारों ने कहा कि अब उम्मीद जगी है कि 70 वर्षों से अदालत की चौखट नाप रहे रामलला को न्याय मिलेगा तो, मुस्लिम पक्ष ने कहा है कि कोर्ट जो निर्णय देगी उसे मानेंगे।
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नियमित सुनवाई होगी तो जल्द आएगा फैसला: दिनेंद्र दास
अयोध्या मामले के पक्षकार निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि पैनल ने जो प्रयास किया वह अच्छा रहा। पैनल भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही काम कर रहा था। अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले की प्रतिदिन सुनवाई का निर्णय लिया है यह सराहनीय कदम है क्योंकि जितनी जल्द मामले की सुनवाई होगी उतना ही जल्दी फैसला आएगा और राममंदिर निर्माण का भी रास्ता खुलेगा। हम जल्द निर्णय चाहते हैं।