{"_id":"6257183dd738d27fac32c2c7","slug":"six-feet-high-platform-of-ram-temple-two-layers-ready-faizabad-news-lko6260151194","type":"story","status":"publish","title_hn":"राम मंदिर का छह फीट ऊंचा हुआ चबूतरा, दो लेयर तैयार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राम मंदिर का छह फीट ऊंचा हुआ चबूतरा, दो लेयर तैयार
विज्ञापन
अयोध्या राम मंदिर का प्रस्तावित मॉडल।-संवाद
- फोटो : FAIZABAD
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि में राममंदिर निर्माण का काम जोरों पर चल रहा है। राममंदिर के नींव के दूसरे चरण के अंतर्गत अभी राममंदिर के चबूतरे (प्लिंथ) का निर्माण संचालित है।
नींव के ऊपर 21 फीट ऊंचे चबूतरे का निर्माण सात लेयर में होना है। चबूतरा अब तक छह फीट ऊंचा बन चुका है, दो लेयर ढाली जा चुकी है। जबकि अब तीसरी लेयर ढालने का काम चल रहा है।
चबूतरे का निर्माण कार्य जून तक पूरा करने का लक्ष्य है। काम में तेजी लाने के लिए ट्रस्ट ने मजदूरों व मशीनों की संख्या बढ़ा दी है। राममंदिर की 50 फीट गहरी नींव के ऊपर सबसे पहले ढाई मीटर की रॉफ्ट ढाली गई थी।
विज्ञापन
अब इस रॉफ्ट के ऊपर 21 फीट ऊंचा चबूतरा बनाया जा रहा है। इसे चबूतरे पर राममंदिर का गर्भगृह का आकार लेगा। चबूतरा सात लेयर में बनाया जाना है अब तक दो लेयर का काम पूरा हो चुका है।
चबूतरे पर ग्रेनाइट के पत्थरों की लेयर बिछाई जा रही है। यह पत्थर पानी के रिसाव को सोखने में सक्षम होते हैं साथ ही मजबूत भी होते हैं। ऐसे में इन पत्थरों की सात लेयर रॉफ्ट के ऊपर ढाली जानी है।
अब तक छह फीट ऊंची लेयर ढाली जा चुकी है। एक लेयर तीन फीट ऊंची है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने काम में तेजी लाने के लिए मजदूरों व मशीनों की संख्या बढ़ा दी है।
पत्थरों को उठाकर रखने में चार टॉवर क्रेन का इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रस्ट का कहना है कि जून माह तक प्लिंथ निर्माण का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद गर्भगृह को आकार देने का काम शुरू होगा।
ऐसे में जुलाई माह से गर्भगृह को आकार देने का काम शुरू हो सकता है। गर्भगृह राजस्थान के वंशीपहाड़पुर के पत्थरों से बनेगा। गर्भगृह के लिए वंशीपहाड़पुर से पत्थरों की आपूर्ति भी शुरू हो चुकी है।
अब तक 10 ट्रक पत्थर यानि की करीब 20 हजार घनफुट पत्थर आ चुके हैं, आपूर्ति का क्रम लगातार जारी है। जून-जुुलाई से मानसून का महीना शुरू हो जाएगा।
ऐसे में राममंदिर के पश्चिम दिशा से शुरू हुआ रिटेनिंग वॉल निर्माण का काम भी बरसात से पहले पूूर्ण करने का लक्ष्य है। राममंदिर को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए 12 मीटर गहरी रिटेनिंग वॉल बनाई जा रही है।
यह वॉल मंदिर के पश्चिम, दक्षिण व पूर्व दिशा में बनेगी। अभी पश्चिम दिशा में काम चल रहा है जो कि पूरा होने वाला है।
राममंदिर निर्माण के क्रम में प्लिंथ की दो लेयर तैयार हो चुकी है। प्लिंथ का काम जून तक पूरा करने का लक्ष्य है। कुल सात लेयर में प्लिंथ बनाई जानी है। इसके बाद गर्भगृह को आकार देने का काम शुरू हो जाएगा। दिसंबर 2023 तक रामलला को भव्य गर्भगृह में विराजित करने का लक्ष्य है।- डॉ.अनिल मिश्र, सदस्य, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
राममंदिर की मुख्य संरचना
कुल क्षेत्र फल 2.7 एकड़
- कुल निर्मित क्षेत्र 57400 स्क्वायर फीट
- मंदिर की लंबाई 360 फीट
- मंदिर की चौड़ाई 235 फीट
- मंदिर की ऊंचाई 161 फीट
- कुल तलों की संख्या 03
- प्रत्येक तल की ऊंचाई 20 फीट
- मंदिर के भूतल के स्तंभों की संख्या 160
- मंदिर के प्रथम तल में स्तंभों की संख्या 132
- मंदिर के दूसरे तल में स्तंभों की संख्या 74
- मंदिर में शिखर एवं मंडपों की संख्या 05
- मंदिर में द्वारों की संख्या 12
- मंदिर के सामने के प्रवेश द्वार को सिंहद्वार कहा जाएगा
- 32 सीढ़ियां चढ़ने के बाद रामलला के दर्शन होंगे
- गर्भगृह में बाल रूप श्रीराम विराजमान होंगे
- प्रथम तल पर रामदरबार स्थापित किया जाएगा
- दूसरा तल अभी खाली छोड़ा गया है।
- गर्भगृह के शिखर के पीछे सीता रसाई में रामलला का भोग प्रसाद बनेगा
- प्रवेश द्वार के दाहिने गणेश जी का मंदिर
- प्रवेश द्वार के बाएं हनुमान जी का मंदिर
- मुख्य मंदिर के पीछे के बांए व दाहिने शिखर पर भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न विराजेंगे
- मंदिर के किनारे मुख्य भवन के अंदर-बाहर प्रदक्षिणा पथ
- प्रदक्षिण पथ पर एक साथ पांच हजार भक्त परिक्रमा कर सकेंगे
- मुख्य मंदिर के पिछले हिस्से में परिसर के अंदर शेषावतार मंदिर होगा
राममंदिर परिसर की विशेषता व सुविधाएं
- लौहरहित मंदिर निर्माण
- प्राकृतिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग
- अपशिष्ट पदार्थ का समुचित प्रबंध
- हाईटेक प्रकाश व्यवस्था
- भूमिगत जल प्रबंधन
- त्रि-स्तरीय वृक्षारोपण
- पुष्पवाटिका और नक्षत्रवाटिका
- सुरक्षा प्रबंधन संकुल
- बहुतलीय पार्किंग सुविधा
- सुरक्षित अमानती घर
- सौर ऊर्जा पटल, ऊर्जा उत्पादन केंद्र
- स्वाचालित सीढ़ियां, लिफ्ट
- आपातकालीन चिकित्सा सहायता केंद्र
- बैंक, एटीएम, आवश्यक जनसुविधाएं
- बहुआयामी चलचित्र शाला
- आदर्श गोशाला, यज्ञशाला, तीर्थयात्री वृहद अन्नक्षेत्र
- रामलीला केंद्र, 360 डिग्री थियेटर, प्रोजेक्शन थियेटर
विज्ञापन
नींव के ऊपर 21 फीट ऊंचे चबूतरे का निर्माण सात लेयर में होना है। चबूतरा अब तक छह फीट ऊंचा बन चुका है, दो लेयर ढाली जा चुकी है। जबकि अब तीसरी लेयर ढालने का काम चल रहा है।
विज्ञापन
चबूतरे का निर्माण कार्य जून तक पूरा करने का लक्ष्य है। काम में तेजी लाने के लिए ट्रस्ट ने मजदूरों व मशीनों की संख्या बढ़ा दी है। राममंदिर की 50 फीट गहरी नींव के ऊपर सबसे पहले ढाई मीटर की रॉफ्ट ढाली गई थी।
विज्ञापन
अब इस रॉफ्ट के ऊपर 21 फीट ऊंचा चबूतरा बनाया जा रहा है। इसे चबूतरे पर राममंदिर का गर्भगृह का आकार लेगा। चबूतरा सात लेयर में बनाया जाना है अब तक दो लेयर का काम पूरा हो चुका है।
चबूतरे पर ग्रेनाइट के पत्थरों की लेयर बिछाई जा रही है। यह पत्थर पानी के रिसाव को सोखने में सक्षम होते हैं साथ ही मजबूत भी होते हैं। ऐसे में इन पत्थरों की सात लेयर रॉफ्ट के ऊपर ढाली जानी है।
अब तक छह फीट ऊंची लेयर ढाली जा चुकी है। एक लेयर तीन फीट ऊंची है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने काम में तेजी लाने के लिए मजदूरों व मशीनों की संख्या बढ़ा दी है।
पत्थरों को उठाकर रखने में चार टॉवर क्रेन का इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रस्ट का कहना है कि जून माह तक प्लिंथ निर्माण का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद गर्भगृह को आकार देने का काम शुरू होगा।
ऐसे में जुलाई माह से गर्भगृह को आकार देने का काम शुरू हो सकता है। गर्भगृह राजस्थान के वंशीपहाड़पुर के पत्थरों से बनेगा। गर्भगृह के लिए वंशीपहाड़पुर से पत्थरों की आपूर्ति भी शुरू हो चुकी है।
अब तक 10 ट्रक पत्थर यानि की करीब 20 हजार घनफुट पत्थर आ चुके हैं, आपूर्ति का क्रम लगातार जारी है। जून-जुुलाई से मानसून का महीना शुरू हो जाएगा।
ऐसे में राममंदिर के पश्चिम दिशा से शुरू हुआ रिटेनिंग वॉल निर्माण का काम भी बरसात से पहले पूूर्ण करने का लक्ष्य है। राममंदिर को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए 12 मीटर गहरी रिटेनिंग वॉल बनाई जा रही है।
यह वॉल मंदिर के पश्चिम, दक्षिण व पूर्व दिशा में बनेगी। अभी पश्चिम दिशा में काम चल रहा है जो कि पूरा होने वाला है।
राममंदिर निर्माण के क्रम में प्लिंथ की दो लेयर तैयार हो चुकी है। प्लिंथ का काम जून तक पूरा करने का लक्ष्य है। कुल सात लेयर में प्लिंथ बनाई जानी है। इसके बाद गर्भगृह को आकार देने का काम शुरू हो जाएगा। दिसंबर 2023 तक रामलला को भव्य गर्भगृह में विराजित करने का लक्ष्य है।- डॉ.अनिल मिश्र, सदस्य, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
राममंदिर की मुख्य संरचना
कुल क्षेत्र फल 2.7 एकड़
- कुल निर्मित क्षेत्र 57400 स्क्वायर फीट
- मंदिर की लंबाई 360 फीट
- मंदिर की चौड़ाई 235 फीट
- मंदिर की ऊंचाई 161 फीट
- कुल तलों की संख्या 03
- प्रत्येक तल की ऊंचाई 20 फीट
- मंदिर के भूतल के स्तंभों की संख्या 160
- मंदिर के प्रथम तल में स्तंभों की संख्या 132
- मंदिर के दूसरे तल में स्तंभों की संख्या 74
- मंदिर में शिखर एवं मंडपों की संख्या 05
- मंदिर में द्वारों की संख्या 12
- मंदिर के सामने के प्रवेश द्वार को सिंहद्वार कहा जाएगा
- 32 सीढ़ियां चढ़ने के बाद रामलला के दर्शन होंगे
- गर्भगृह में बाल रूप श्रीराम विराजमान होंगे
- प्रथम तल पर रामदरबार स्थापित किया जाएगा
- दूसरा तल अभी खाली छोड़ा गया है।
- गर्भगृह के शिखर के पीछे सीता रसाई में रामलला का भोग प्रसाद बनेगा
- प्रवेश द्वार के दाहिने गणेश जी का मंदिर
- प्रवेश द्वार के बाएं हनुमान जी का मंदिर
- मुख्य मंदिर के पीछे के बांए व दाहिने शिखर पर भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न विराजेंगे
- मंदिर के किनारे मुख्य भवन के अंदर-बाहर प्रदक्षिणा पथ
- प्रदक्षिण पथ पर एक साथ पांच हजार भक्त परिक्रमा कर सकेंगे
- मुख्य मंदिर के पिछले हिस्से में परिसर के अंदर शेषावतार मंदिर होगा
राममंदिर परिसर की विशेषता व सुविधाएं
- लौहरहित मंदिर निर्माण
- प्राकृतिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग
- अपशिष्ट पदार्थ का समुचित प्रबंध
- हाईटेक प्रकाश व्यवस्था
- भूमिगत जल प्रबंधन
- त्रि-स्तरीय वृक्षारोपण
- पुष्पवाटिका और नक्षत्रवाटिका
- सुरक्षा प्रबंधन संकुल
- बहुतलीय पार्किंग सुविधा
- सुरक्षित अमानती घर
- सौर ऊर्जा पटल, ऊर्जा उत्पादन केंद्र
- स्वाचालित सीढ़ियां, लिफ्ट
- आपातकालीन चिकित्सा सहायता केंद्र
- बैंक, एटीएम, आवश्यक जनसुविधाएं
- बहुआयामी चलचित्र शाला
- आदर्श गोशाला, यज्ञशाला, तीर्थयात्री वृहद अन्नक्षेत्र
- रामलीला केंद्र, 360 डिग्री थियेटर, प्रोजेक्शन थियेटर