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श्रावण पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने लगाई सरयू में डुबकी
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 29 Aug 2015 10:21 PM IST
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सरयू तट के स्नान घाटों से प्रमुख मंदिरों की चौखट तक श्रद्धालुओं की भीड़ से मार्ग पटे रहे। सरयू तट पर श्रावणी उपाकर्म महोत्सव वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मनाया गया।
मेला क्षेत्र से तीर्थ यात्रियों की वापसी भी शुरू हो गई है। मेले के अंतिम पर्व श्रावण पूर्णिमा पर नगरी में देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं का जमावड़ा था। शनिवार को भोर से ही स्नान घाटों से लेकर नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, कनकभवन, क्षीरेश्वरनाथ, श्रीरामजन्मभूमि, कालेराम मंदिर, श्रीराम बल्लभाुंज, लवकुश मंदिर, श्रीमणिराम दास की छावनी आदि मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
भोर से शुरू हुआ यह क्रम देर शाम तक चलता रहा। प्रमुख मंदिरों में दर्शनार्थियों की कतारें लगी रहीं। सरयू के स्नान घाट पर भोर से भारी भीड़ जुटी रही। यह क्रम दूसरी बेला 12 बजे तक निर्बाध बना रहा।
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स्नान घाट से प्रमुख मंदिरों नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, कनक भवन व श्रीराम जन्मभूमि मंदिरों में दर्शनार्थियों की भारी भीड़ पूर्णिमा पर्व पर दर्शन-पूजन के लिए कतारबद्ध रही। सर्वाधिक भीड़ का दबाव हनुमानगढ़ी व नागेश्वरनाथ के साथ विवादित परिसर में विराजमान रामलला के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की रही।
श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के साथ ही सुरक्षा को लेकर जगह-जगह बैरियर व सुरक्षाकर्मियों से जांच की जाती रही। स्नानघाटों पर भोर से ही वैदिक मंत्रोच्चार गूंजते रहे।
सूर्योदय होते ही घाटों पर उत्सव जैसा माहौल दिखा। वैदिक पंडितों ने दशाविधि स्नान, प्रायश्चित संकल्प, ऋषि पूजन कर श्रावणी महोत्सव को परंपरा की रोशनी में मनाया। उमस भरी गर्मी में मेलार्थी स्वच्छ पेयजल के लिए भटकते दिखे।
मेले की सुरक्षा व्यवस्था मुंह चिढ़ाती दिखी। स्नानघाटों से प्रमुख मंदिरों तक मेलार्थियों के सामान चोरी होने और चैन स्नेचिंग की घटनाएं आम रहीं। मेले में आए कई श्रद्धालुओं व उनके साथ आए बच्चे व महिलाएं भटक गए।
पुलिस के खोया-पाया कैंप के माध्यम से ऐसे तीर्थयात्रियों की परेशानियां दूर की जाती रहीं। दोपहर बाद मेला क्षेत्र से श्रद्धालुओं की वापसी शुरू हो गई। रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन पर वापसी के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी है।
पुलिस व प्रशासन के अधिकारी मेला क्षेत्र में भ्रमण कर सुरक्षा व अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे। पखवारे भर तक चले मेले के सकुशल निपट जाने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली है।
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मेला क्षेत्र से तीर्थ यात्रियों की वापसी भी शुरू हो गई है। मेले के अंतिम पर्व श्रावण पूर्णिमा पर नगरी में देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं का जमावड़ा था। शनिवार को भोर से ही स्नान घाटों से लेकर नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, कनकभवन, क्षीरेश्वरनाथ, श्रीरामजन्मभूमि, कालेराम मंदिर, श्रीराम बल्लभाुंज, लवकुश मंदिर, श्रीमणिराम दास की छावनी आदि मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
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भोर से शुरू हुआ यह क्रम देर शाम तक चलता रहा। प्रमुख मंदिरों में दर्शनार्थियों की कतारें लगी रहीं। सरयू के स्नान घाट पर भोर से भारी भीड़ जुटी रही। यह क्रम दूसरी बेला 12 बजे तक निर्बाध बना रहा।
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स्नान घाट से प्रमुख मंदिरों नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, कनक भवन व श्रीराम जन्मभूमि मंदिरों में दर्शनार्थियों की भारी भीड़ पूर्णिमा पर्व पर दर्शन-पूजन के लिए कतारबद्ध रही। सर्वाधिक भीड़ का दबाव हनुमानगढ़ी व नागेश्वरनाथ के साथ विवादित परिसर में विराजमान रामलला के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की रही।
श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के साथ ही सुरक्षा को लेकर जगह-जगह बैरियर व सुरक्षाकर्मियों से जांच की जाती रही। स्नानघाटों पर भोर से ही वैदिक मंत्रोच्चार गूंजते रहे।
सूर्योदय होते ही घाटों पर उत्सव जैसा माहौल दिखा। वैदिक पंडितों ने दशाविधि स्नान, प्रायश्चित संकल्प, ऋषि पूजन कर श्रावणी महोत्सव को परंपरा की रोशनी में मनाया। उमस भरी गर्मी में मेलार्थी स्वच्छ पेयजल के लिए भटकते दिखे।
मेले की सुरक्षा व्यवस्था मुंह चिढ़ाती दिखी। स्नानघाटों से प्रमुख मंदिरों तक मेलार्थियों के सामान चोरी होने और चैन स्नेचिंग की घटनाएं आम रहीं। मेले में आए कई श्रद्धालुओं व उनके साथ आए बच्चे व महिलाएं भटक गए।
पुलिस के खोया-पाया कैंप के माध्यम से ऐसे तीर्थयात्रियों की परेशानियां दूर की जाती रहीं। दोपहर बाद मेला क्षेत्र से श्रद्धालुओं की वापसी शुरू हो गई। रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन पर वापसी के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी है।
पुलिस व प्रशासन के अधिकारी मेला क्षेत्र में भ्रमण कर सुरक्षा व अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे। पखवारे भर तक चले मेले के सकुशल निपट जाने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली है।