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सरयू का कहर, अपने हाथों से तोड़ रहे आशियाना
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2015 11:36 PM IST
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अब बंधे पर खुले आसमान के नीचे ही बसेरा होगा। प्रशासन सिर्फ हर साल आश्वासन देता है और बाद में मुंह फेर लेता है। फिर तलहटी में आकर बसना और खेती करनी मजबूरी होती है।
सरयू की कटान की जद में आए लोग घर का सामान लेकर सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर रहे हैं। सत्य नारायण निषाद व राकेश निषाद ने विल्वहरि तटबंध पर शरण ली है। राकेश निषाद ने कहा कि घर का सामान इकट्ठा कर खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि बनबसा बैराज से छोड़े गए पानी से सरयू के जलस्तर में आए उफान ने कछार क्षेत्रों में हलचल मचा रखी है। पिपरी संग्राम में कटान शुरू हो गई है। गांव के तीन घर नदी की धारा में समा चुके हैं।
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साथ ही काली जी का देव स्थान भी कटकर नदी में समा गया है। सरयू खतरे के निशान 92.730 मीटर से अभी काफी नीचे है। अभी जलस्तर 91.850 मीटर पर स्थिर है। ग्राम प्रधान तेजबहादुर निषाद ने कहा कि बाढ़ में माझा क्षेत्र में चारों तरफ पानी भर जाता है।
इसलिए बेघर हुए लोग ऊंचे स्थान देख कर तटबंध पर शरण ले रहे है। लेखपाल रामरतन ने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से जिनके घर कटान के कगार पर है। उनको खाली करके सुरक्षित स्थान पर जाने कां कहा है। मेवालाल ने बताया कि अब उनके पास फूस भी नहीं बचा है कि छप्पर डालकर जीवन यापन कर सकें।
एसडीएम सदर अमित कुमार सिंह का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया। पीड़ित लोगों का का दुख दर्द सुना। साथ ही कटान की जद में आए लोगों को सुरक्षित स्थान पर जान की हिदायत दी है।
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सरयू की कटान की जद में आए लोग घर का सामान लेकर सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर रहे हैं। सत्य नारायण निषाद व राकेश निषाद ने विल्वहरि तटबंध पर शरण ली है। राकेश निषाद ने कहा कि घर का सामान इकट्ठा कर खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करना पड़ रहा है।
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गौरतलब है कि बनबसा बैराज से छोड़े गए पानी से सरयू के जलस्तर में आए उफान ने कछार क्षेत्रों में हलचल मचा रखी है। पिपरी संग्राम में कटान शुरू हो गई है। गांव के तीन घर नदी की धारा में समा चुके हैं।
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साथ ही काली जी का देव स्थान भी कटकर नदी में समा गया है। सरयू खतरे के निशान 92.730 मीटर से अभी काफी नीचे है। अभी जलस्तर 91.850 मीटर पर स्थिर है। ग्राम प्रधान तेजबहादुर निषाद ने कहा कि बाढ़ में माझा क्षेत्र में चारों तरफ पानी भर जाता है।
इसलिए बेघर हुए लोग ऊंचे स्थान देख कर तटबंध पर शरण ले रहे है। लेखपाल रामरतन ने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से जिनके घर कटान के कगार पर है। उनको खाली करके सुरक्षित स्थान पर जाने कां कहा है। मेवालाल ने बताया कि अब उनके पास फूस भी नहीं बचा है कि छप्पर डालकर जीवन यापन कर सकें।
एसडीएम सदर अमित कुमार सिंह का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया। पीड़ित लोगों का का दुख दर्द सुना। साथ ही कटान की जद में आए लोगों को सुरक्षित स्थान पर जान की हिदायत दी है।