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सरयू ने फिर पार किया लाल निशान
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अयोध्या। पहाड़ों पर हो रही लगातार वर्षा व बैराजों से छोड़े गए नेपाली नदियों के पानी के चलते रविवार को एक बार फिर से सरयू लाल निशान को पार कर गई। सरयू का जलस्तर छह बजे तक लाल निशान से 4 सेोमी ऊपर 92.77 मीटर रिकार्ड किया गया है।
एक सेमी की प्रतिघंटे की रफ्तार से उफान जारी है। उधर, सरयू के घटते-बढ़ते जलस्तर से तटीय इलाकों की खेती व आबादी की जमीन तेजी से कटने लगी है। कछार में दहशत का माहौल है। कछारावासियों का उपरहार की ओर पलायन शुरू हो गया है। साथ ही बाढ़ नियंत्रण महकमा भी सक्रिय है। बंधों की निगरानी के साथ बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं।
पिछले एक पखवारे से पहाड़ों पर हो रही बारिश व गिरजा, शारदा व सरयू बैराज से छोड़े गए पानी के चलते सरयू नदी में उथल-पुथल मची है। 10 दिन पूर्व सरयू नदी एक बार लाल निशान को पार गई थी लेकिन, इसके बाद सरयू के जलस्तर ने घटोत्तरी दर्ज होने लगी थी।
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शनिवार को तीनों बैराजों से 2.5 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे शुक्रवार से घट रही सरयू ने शनिवार रात से फिर से बढ़ना शुरू कर दिया है। शनिवार शाम जलस्तर 92.60 मीटर से अचानक उछाल मारने लगा। देखते ही देखते 12 घंटे के भीतर 8 सेमी बढ़ोत्तरी दर्ज हुई।
रविवार सुबह रफ्तार एक सेमी प्रतिघंटे से बढ़ते हुए शाम साढ़े चार बजे तक 92.77 मीटर पहुंच गया। केंद्रीय जल बोर्ड के सहायक अभियंता संजय कन्नौजिया ने बताया कि जलस्तर में एक सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ोत्तरी जारी है।
उधर, बाढ़ से रौनाही तटबंध के कछार में मंहगू का पुरवा, कैथी मांझा समेत कछार वासी उपरहार की शरण में न आने जाने की तैयारी में लग गए हैं। यही हाल अयोध्या-बिल्हरिघाट के तटबंध का भी है। यहां भी कछार में बसे एक दर्जन से अधिक गांव वासी बंधे पर जाने की तैयारी में जुट गए हैं।
हालांकि, जलस्तर बढ़ने के बाद कछार के गांव तक पानी पहुंच गया है। कछारवासी नाव की तलाश में जुट गए हैं। सरयू में जलस्तर बढने के बाद प्रशासन सहित बाढ़ नियंत्रण महकमा भी पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। दोनों बंधों पर बाढ़ चौकियों की निगरानी की जा रही है।
बाढ़ नियंत्रण महकमा के एई सर्वजीत वर्मा बताते हैं कि बंधे पूरी तरह से सुरक्षित हैं। कहीं पर कटान का कोई खतरा नहीं है। बैराजों से छोड़े गए पानी व पहाड़ों पर हो रही वर्षा के चलते सरयू के जलस्तर में वृद्धि हो रही है। सोमवार की सुबह तक सरयू 92.85 मीटर के आसपास पहुंचने के आसार हैं।
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एक सेमी की प्रतिघंटे की रफ्तार से उफान जारी है। उधर, सरयू के घटते-बढ़ते जलस्तर से तटीय इलाकों की खेती व आबादी की जमीन तेजी से कटने लगी है। कछार में दहशत का माहौल है। कछारावासियों का उपरहार की ओर पलायन शुरू हो गया है। साथ ही बाढ़ नियंत्रण महकमा भी सक्रिय है। बंधों की निगरानी के साथ बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं।
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पिछले एक पखवारे से पहाड़ों पर हो रही बारिश व गिरजा, शारदा व सरयू बैराज से छोड़े गए पानी के चलते सरयू नदी में उथल-पुथल मची है। 10 दिन पूर्व सरयू नदी एक बार लाल निशान को पार गई थी लेकिन, इसके बाद सरयू के जलस्तर ने घटोत्तरी दर्ज होने लगी थी।
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शनिवार को तीनों बैराजों से 2.5 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे शुक्रवार से घट रही सरयू ने शनिवार रात से फिर से बढ़ना शुरू कर दिया है। शनिवार शाम जलस्तर 92.60 मीटर से अचानक उछाल मारने लगा। देखते ही देखते 12 घंटे के भीतर 8 सेमी बढ़ोत्तरी दर्ज हुई।
रविवार सुबह रफ्तार एक सेमी प्रतिघंटे से बढ़ते हुए शाम साढ़े चार बजे तक 92.77 मीटर पहुंच गया। केंद्रीय जल बोर्ड के सहायक अभियंता संजय कन्नौजिया ने बताया कि जलस्तर में एक सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ोत्तरी जारी है।
उधर, बाढ़ से रौनाही तटबंध के कछार में मंहगू का पुरवा, कैथी मांझा समेत कछार वासी उपरहार की शरण में न आने जाने की तैयारी में लग गए हैं। यही हाल अयोध्या-बिल्हरिघाट के तटबंध का भी है। यहां भी कछार में बसे एक दर्जन से अधिक गांव वासी बंधे पर जाने की तैयारी में जुट गए हैं।
हालांकि, जलस्तर बढ़ने के बाद कछार के गांव तक पानी पहुंच गया है। कछारवासी नाव की तलाश में जुट गए हैं। सरयू में जलस्तर बढने के बाद प्रशासन सहित बाढ़ नियंत्रण महकमा भी पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। दोनों बंधों पर बाढ़ चौकियों की निगरानी की जा रही है।
बाढ़ नियंत्रण महकमा के एई सर्वजीत वर्मा बताते हैं कि बंधे पूरी तरह से सुरक्षित हैं। कहीं पर कटान का कोई खतरा नहीं है। बैराजों से छोड़े गए पानी व पहाड़ों पर हो रही वर्षा के चलते सरयू के जलस्तर में वृद्धि हो रही है। सोमवार की सुबह तक सरयू 92.85 मीटर के आसपास पहुंचने के आसार हैं।