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वनवास को निकले राम-सीता
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अयोध्या राम लीला के मंचन के दौरान कैकई श्री राम व राजा दशरथ का संवाद
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। सरयू तट स्थित लक्ष्मण किला मंदिर परिसर में संचालित फिल्मी कलाकारों की रामलीला भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। बॉलीवुड कलाकारों ने अयोध्या की रामलीला में अभिनय व संवाद से त्रेतायुग को जीवंत कर दिया है। इसी क्रम में शनिवार को भगवान श्रीराम के वनगमन की लीला देखकर सब भावविभोर हो उठे। राम बारात के उत्साह से रात 7 बजे शुरू हुई चौथे दिन की रामलीला का समापन राम वनगमन के शोकाकुल दृश्य से हुआ।
लीला मंचन के क्रम में महाराजा दशरथ, गुरू वशिष्ठ से कहते हैं कि गुरूदेव मेरे कानों के बाल सफेद हो गए हैं। अब मेरी एक ही अभिलाषा है रामचंद्र सब प्रकार से योग्य हो गए हैं, उन्हें राजभार सौंप दिया जाए। गुरु वशिष्ठ महाराज दशरथ की इच्छा का समर्थन करते हैं। कहते हैं कि हे राजन ! राम के राजतिलक की तैयारी करवाईए। अगले दृश्य में अयोध्या में उल्लास का माहौल होता है, प्रजावासी राम के राजतिलक की खुशी में नाच रहे होते हैं। उधर, मंथरा राम के राजतिलक की बात सुनकर दुखी हो जाती है और कैकेयी को तरह-तरह से भड़काती है। कैकेयी मंथरा की बातों में आकर कोप भवन में चली जाती हैं।
राजा दशरथ उन्हें मनाने पहुंचते हैं तो वह अपने दो वरों की याद उन्हें दिलाती हैं। एक वर में भरत के लिए सिंहासन तो दूसरे वर में राम के लिए 14 वर्ष का बनवास मांगती हैं। यह सुनते ही दशरथ मूर्छित हो जाते हैं। अगले दृश्य में राम के वनवास की बात सुनकर प्रजा दुखी हो जाती है। अगला दृश्य अवधपुरी का है। भगवान राम पिता के वचन का पालन करने के लिए वन जाने को तैयार हो जाते हैं। उनके साथ माता सीता व लक्ष्मण भी वन जाने की बात कहते हैं। इस बार अवधपुरी में शोक का माहौल होता है। वन चले राम रघुराई और संग जानकी माई, लक्ष्मण जैसा भाई...पार्श्व संगीत सभी को भाव-विभोर कर देता है।
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राम, लक्ष्मण और सीता वनवासी वेष में आते हैं और वन के लिए प्रस्थान करते हैं। अगले दृश्य में राम निषादराज से मिलते हैं और उनका आतिथ्य ग्रहण करते हैं। इससे पूर्व चौथे दिवस की रामलीला का आगाज जनकपुर से सीता की विदाई के मार्मिक दृश्य से हुई। चौथे दिन की रामलीला में माता सीता के किरदार में मशहूर अभिनेत्री भाग्यश्री, राम के किरदार में अभिनेता राहुल बुच्चर ने अपने अभिनय की छाप छोड़ी।
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लीला मंचन के क्रम में महाराजा दशरथ, गुरू वशिष्ठ से कहते हैं कि गुरूदेव मेरे कानों के बाल सफेद हो गए हैं। अब मेरी एक ही अभिलाषा है रामचंद्र सब प्रकार से योग्य हो गए हैं, उन्हें राजभार सौंप दिया जाए। गुरु वशिष्ठ महाराज दशरथ की इच्छा का समर्थन करते हैं। कहते हैं कि हे राजन ! राम के राजतिलक की तैयारी करवाईए। अगले दृश्य में अयोध्या में उल्लास का माहौल होता है, प्रजावासी राम के राजतिलक की खुशी में नाच रहे होते हैं। उधर, मंथरा राम के राजतिलक की बात सुनकर दुखी हो जाती है और कैकेयी को तरह-तरह से भड़काती है। कैकेयी मंथरा की बातों में आकर कोप भवन में चली जाती हैं।
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राजा दशरथ उन्हें मनाने पहुंचते हैं तो वह अपने दो वरों की याद उन्हें दिलाती हैं। एक वर में भरत के लिए सिंहासन तो दूसरे वर में राम के लिए 14 वर्ष का बनवास मांगती हैं। यह सुनते ही दशरथ मूर्छित हो जाते हैं। अगले दृश्य में राम के वनवास की बात सुनकर प्रजा दुखी हो जाती है। अगला दृश्य अवधपुरी का है। भगवान राम पिता के वचन का पालन करने के लिए वन जाने को तैयार हो जाते हैं। उनके साथ माता सीता व लक्ष्मण भी वन जाने की बात कहते हैं। इस बार अवधपुरी में शोक का माहौल होता है। वन चले राम रघुराई और संग जानकी माई, लक्ष्मण जैसा भाई...पार्श्व संगीत सभी को भाव-विभोर कर देता है।
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राम, लक्ष्मण और सीता वनवासी वेष में आते हैं और वन के लिए प्रस्थान करते हैं। अगले दृश्य में राम निषादराज से मिलते हैं और उनका आतिथ्य ग्रहण करते हैं। इससे पूर्व चौथे दिवस की रामलीला का आगाज जनकपुर से सीता की विदाई के मार्मिक दृश्य से हुई। चौथे दिन की रामलीला में माता सीता के किरदार में मशहूर अभिनेत्री भाग्यश्री, राम के किरदार में अभिनेता राहुल बुच्चर ने अपने अभिनय की छाप छोड़ी।