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राममंदिर निर्माण में टाटा कंस्ट्रक्शन को भी मिल सकती अहम जिम्मेदारी
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अधिकारियों से वार्ता करते नृपेंद्र मिश्र।
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। मंदिर निर्माण समिति की बैठक में शनिवार को सभी तकनीकी पहलुओं पर मंथन किया गया। समिति की दो दिनी बैठक के दूसरे दिन मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष व ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों ने विभिन्न कंपनी के इंजीनियरों व अफसरों से मंदिर के एक हजार साल तक अक्षुण्ण रहने व अन्य बिंदुओं पर की।
इस दौरान टाटा कंस्ट्रक्शन कंपनी के भी इंजीनियरों ने भी समिति को अपना प्रेजेंटेशन दिया। माना जा रहा है कि श्रीराम मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी एलएंडटी के साथ टाटा कंस्ट्रक्शन को भी मिल सकती है।
सर्किट हाउस में शनिवार को राममंदिर निर्माण निर्माण समिति की दो दिनी बैठक में समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कार्यदाई संस्था के इंजीनियरों व ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ निर्माण कार्य के 39 माह में पूरे करने को लेकर चर्चा की।
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बैठक में राममंदिर की एक हजार वर्ष की आयु व उसकी भव्यता को लेकर विचार-विमर्श हुआ। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नृपेंद्र मिश्र ने एलएंडटी के इंजीनियरों से राममंदिर की आयु के एक हजार वर्ष तक होने की गारंटी मांगी है, जिसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी है।
हालांकि ट्रस्ट के पदाधिकारी इस विषय में कुछ भी बोलने से इंकार कर रहे हैं। दूसरे दिन की बैठक के बाद ट्रस्ट के सदस्य डॉ.अनिल मिश्र ने बताया कि राममंदिर करोड़ों भक्तों की आस्था से जुड़ा हुआ है। हम राममंदिर निर्माण में तकनीकी पहलू पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि शनिवार की बैठक में टाटा कंस्ट्रक्शन के इंजीनियरों ने भी अपना प्रेजेंटेंशन दिया है। वहीं लार्सन एंड टूब्रो के इंजीनियरों ने भी अपना प्रेजेंटेशन दिया।
उन्होंने कहा कि राममंदिर की नींव खोदाई के लिए अभी टेस्ट पाइलिंग की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है जिसे आईआईटी चेन्नई के इंजीनियरों को देना है। शनिवार की बैठक में नृपेंद्र मिश्र के साथ राममंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि, आर्टिकेक्ट आशीष सोमपुरा, ट्रस्ट के सदस्य बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, डॉ.अनिल मिश्र, विहिप के संरक्षक दिनेश चंद्र सहित एलएंडटी व टाटा कंस्ट्रक्शन के इंजीनियर भी शामिल रहे।
रामजन्मभूमि परिसर में होगी अगली बैठक
डॉ.अनिल मिश्र ने बताया कि राममंदिर निर्माण के लिए बहुत सारी तकनीकी पहलुओं पर ध्यान देना है इसलिए अभी कई बैठकें होती रहेंगी। बताया गया कि अगली बैठक रामजन्मभूमि परिसर में ही होगी। जहां मंदिर निर्माण का कार्य किया जा रहा है। बैठक में राममंदिर निर्माण के लिए शेष पत्थरों की तराशी कार्य को लेकर भी चर्चा की गई है।
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इस दौरान टाटा कंस्ट्रक्शन कंपनी के भी इंजीनियरों ने भी समिति को अपना प्रेजेंटेशन दिया। माना जा रहा है कि श्रीराम मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी एलएंडटी के साथ टाटा कंस्ट्रक्शन को भी मिल सकती है।
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सर्किट हाउस में शनिवार को राममंदिर निर्माण निर्माण समिति की दो दिनी बैठक में समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कार्यदाई संस्था के इंजीनियरों व ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ निर्माण कार्य के 39 माह में पूरे करने को लेकर चर्चा की।
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बैठक में राममंदिर की एक हजार वर्ष की आयु व उसकी भव्यता को लेकर विचार-विमर्श हुआ। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नृपेंद्र मिश्र ने एलएंडटी के इंजीनियरों से राममंदिर की आयु के एक हजार वर्ष तक होने की गारंटी मांगी है, जिसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी है।
हालांकि ट्रस्ट के पदाधिकारी इस विषय में कुछ भी बोलने से इंकार कर रहे हैं। दूसरे दिन की बैठक के बाद ट्रस्ट के सदस्य डॉ.अनिल मिश्र ने बताया कि राममंदिर करोड़ों भक्तों की आस्था से जुड़ा हुआ है। हम राममंदिर निर्माण में तकनीकी पहलू पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि शनिवार की बैठक में टाटा कंस्ट्रक्शन के इंजीनियरों ने भी अपना प्रेजेंटेंशन दिया है। वहीं लार्सन एंड टूब्रो के इंजीनियरों ने भी अपना प्रेजेंटेशन दिया।
उन्होंने कहा कि राममंदिर की नींव खोदाई के लिए अभी टेस्ट पाइलिंग की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है जिसे आईआईटी चेन्नई के इंजीनियरों को देना है। शनिवार की बैठक में नृपेंद्र मिश्र के साथ राममंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि, आर्टिकेक्ट आशीष सोमपुरा, ट्रस्ट के सदस्य बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, डॉ.अनिल मिश्र, विहिप के संरक्षक दिनेश चंद्र सहित एलएंडटी व टाटा कंस्ट्रक्शन के इंजीनियर भी शामिल रहे।
रामजन्मभूमि परिसर में होगी अगली बैठक
डॉ.अनिल मिश्र ने बताया कि राममंदिर निर्माण के लिए बहुत सारी तकनीकी पहलुओं पर ध्यान देना है इसलिए अभी कई बैठकें होती रहेंगी। बताया गया कि अगली बैठक रामजन्मभूमि परिसर में ही होगी। जहां मंदिर निर्माण का कार्य किया जा रहा है। बैठक में राममंदिर निर्माण के लिए शेष पत्थरों की तराशी कार्य को लेकर भी चर्चा की गई है।