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रामजन्म की तरह उल्लास में डूबी रामनगरी
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महंत गिरीश पति त्रिपाठी से चर्चा करते छात्र।
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। राममंदिर निर्माण शुरू होने की खुशी रामनगरी के कोने-कोने में प्रत्यक्षदर्शित हो रही है। अयोध्या पीएम मोदी के हाथों पांच अगस्त को होने वाले भूमि पूजन को लेकर उत्साह में डूबी हुई है। खुशी कुछ इस तरह है कि जैसे रामजन्म के समय अयोध्या का उल्लास छलकता है।
इसी तरह की स्थिति रामनगरी के संत-धर्माचार्यों की भी है। हालांकि कोरोना के चलते लाखों रामभक्त अयोध्या आकर भूमि पूजन नहीं देख सकते हैं, फिर भी उनके मन में जन्मभूमि बसी हुई है। अयोध्या वासी लाइव भूमि पूजन देखने की तैयारी में पूरे उत्साह से जुटे हुए हैं।
नयाघाट स्थित वशिष्ठ पीठ तिवारी मंदिर के महंत गिरीशपति त्रिपाठी अपने भक्तों के साथ भूमि पूजन के कार्यक्रम को लेकर ही चर्चा करते मिलते हैं। वे कहते हैं राममंदिर का जो भूमि पूजन होने जा रहा है, इसको लेकर इस प्रकार की खुशी का अहसास हो रहा है जैसे रामजन्म की बेला में होता है।
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एक तरह से भगवान का अयोध्या में फिर से प्राकट्य ही हो रहा है। सदियों के संघर्ष के बाद रामलला टेंट से आजाद होकर दिव्य-भव्य मंदिर में विराजने जा रहे हैं। इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है।
त्रेतायुग में जब दशरथ जी के पुत्र के रूप में राम का जन्म हुआ तो उस समय पूरी अयोध्या को ब्रह्मानंद की अनुभूति हुई थी, कुछ इसी तरह की अनुभूति संत समाज भी कर रहा है। जिनका नाम सुनने मात्र से ही सब शुभ हो जाता है, वह ब्रह्म स्वरूप भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण होने जा रहा है। अयोध्या राममंदिर निर्माण के साथ ही सनातन संस्कृति का प्रमुख केंद्र बनने जा रही है।
राम की पैड़ी पर भूमि पूजन की खुशी में दिए जलाने की तैयारी में जुटी छात्र-छात्राएं भी उत्साहित नजर आईं। स्वाती उपाध्याय बोलीं कि यह हम सब के लिए गौरव का विषय है कि हमें अपने आराध्य के भूमि पूजन का साक्षी बनने का अवसर मिल रहा है, हम इतना उत्साहित हैं कि शब्दों में बयां नहीं कर सकते।
कुलदीप मिश्रा, राहुल पांडेय कहते हैं कि अब अयोध्या की सांस्कृतिक एवं धार्मिक आभा विश्व भर के लिए आकर्षण का केंद्र होगी, क्योंकि भव्य राममंदिर का निर्माण जो होने जा रहा है। हमें पूरी उम्मीद है कि राममंदिर निर्माण के साथ साथ रोजगार व तरक्की का मार्ग भी अयोध्या में प्रशस्त होगा।
अयोध्या में रमा हुआ है भक्तों का मन
ज.गु.रामदिनेशाचार्य अपने आश्रम में फोन पर भक्तों से बात करते मिले। पूछने पर बताया कि दूर-दूर के भक्त अयोध्या में होने वाले भूमिपूजन को लेकर उत्साहित हैं, वे कहते हैं कि कोरोना के कारण अयोध्या नहीं आ पा रहे हैं लेकिन हमारा दिल, दिमाग व मन पूरी तरह से अयोध्या में रमा हुआ है। रामदिनेशाचार्य स्वयं भी आनंदित हैं कहते हैं कि मोदी व योगी सरकार अयोध्या को इस तरह सजाने में जुटी है कि त्रेतायुग एक बार फिर जीवंत होता प्रतीत हो रहा है। अवधपुरी प्रभु आवत जानी भई सकल शोभा कै खानि... प्रभु राम के आने की खुशी अयोध्या शोभा की खान हो गई थी। इसी तरह रामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए पांच अगस्त को होने वाले भूमि पूजन को लेकर अयोध्या में उल्लास छलक रहा है।
भारतीय संस्कृति की आदि भूमि है अयोध्या
दिगंबर जैन कमेटी के अध्यक्ष स्वामी रवींद्र कीर्ति कहते हैं कि भारतीय संस्कृति की आदि भूमि अयोध्या है। अयोध्या में पिछले तीन सौ साल पहले 100 दिगंबर जैन मंदिर थे। वर्तमान में अयोध्या में पांच तीर्थकरों के स्थान हैं। आज हम सभी के लिए महान सौभाग्य एवं गौरव का विषय है ऐसे महापुरुषों की जन्मभूमि अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण अनेक शताब्दियों के परिश्रम के बाद सफलता को प्राप्त हो रहा है। इसके लिए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, विहिप एवं इस संकल्प से जुड़े हुए सभी संत-महंत, जिन्होंने इस महान कार्य में अपनी आहुति प्रदान की है उन सभी का पूरे जैन समाज की ओर से अभिनंदन करता हूं।
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इसी तरह की स्थिति रामनगरी के संत-धर्माचार्यों की भी है। हालांकि कोरोना के चलते लाखों रामभक्त अयोध्या आकर भूमि पूजन नहीं देख सकते हैं, फिर भी उनके मन में जन्मभूमि बसी हुई है। अयोध्या वासी लाइव भूमि पूजन देखने की तैयारी में पूरे उत्साह से जुटे हुए हैं।
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नयाघाट स्थित वशिष्ठ पीठ तिवारी मंदिर के महंत गिरीशपति त्रिपाठी अपने भक्तों के साथ भूमि पूजन के कार्यक्रम को लेकर ही चर्चा करते मिलते हैं। वे कहते हैं राममंदिर का जो भूमि पूजन होने जा रहा है, इसको लेकर इस प्रकार की खुशी का अहसास हो रहा है जैसे रामजन्म की बेला में होता है।
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एक तरह से भगवान का अयोध्या में फिर से प्राकट्य ही हो रहा है। सदियों के संघर्ष के बाद रामलला टेंट से आजाद होकर दिव्य-भव्य मंदिर में विराजने जा रहे हैं। इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है।
त्रेतायुग में जब दशरथ जी के पुत्र के रूप में राम का जन्म हुआ तो उस समय पूरी अयोध्या को ब्रह्मानंद की अनुभूति हुई थी, कुछ इसी तरह की अनुभूति संत समाज भी कर रहा है। जिनका नाम सुनने मात्र से ही सब शुभ हो जाता है, वह ब्रह्म स्वरूप भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण होने जा रहा है। अयोध्या राममंदिर निर्माण के साथ ही सनातन संस्कृति का प्रमुख केंद्र बनने जा रही है।
राम की पैड़ी पर भूमि पूजन की खुशी में दिए जलाने की तैयारी में जुटी छात्र-छात्राएं भी उत्साहित नजर आईं। स्वाती उपाध्याय बोलीं कि यह हम सब के लिए गौरव का विषय है कि हमें अपने आराध्य के भूमि पूजन का साक्षी बनने का अवसर मिल रहा है, हम इतना उत्साहित हैं कि शब्दों में बयां नहीं कर सकते।
कुलदीप मिश्रा, राहुल पांडेय कहते हैं कि अब अयोध्या की सांस्कृतिक एवं धार्मिक आभा विश्व भर के लिए आकर्षण का केंद्र होगी, क्योंकि भव्य राममंदिर का निर्माण जो होने जा रहा है। हमें पूरी उम्मीद है कि राममंदिर निर्माण के साथ साथ रोजगार व तरक्की का मार्ग भी अयोध्या में प्रशस्त होगा।
अयोध्या में रमा हुआ है भक्तों का मन
ज.गु.रामदिनेशाचार्य अपने आश्रम में फोन पर भक्तों से बात करते मिले। पूछने पर बताया कि दूर-दूर के भक्त अयोध्या में होने वाले भूमिपूजन को लेकर उत्साहित हैं, वे कहते हैं कि कोरोना के कारण अयोध्या नहीं आ पा रहे हैं लेकिन हमारा दिल, दिमाग व मन पूरी तरह से अयोध्या में रमा हुआ है। रामदिनेशाचार्य स्वयं भी आनंदित हैं कहते हैं कि मोदी व योगी सरकार अयोध्या को इस तरह सजाने में जुटी है कि त्रेतायुग एक बार फिर जीवंत होता प्रतीत हो रहा है। अवधपुरी प्रभु आवत जानी भई सकल शोभा कै खानि... प्रभु राम के आने की खुशी अयोध्या शोभा की खान हो गई थी। इसी तरह रामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए पांच अगस्त को होने वाले भूमि पूजन को लेकर अयोध्या में उल्लास छलक रहा है।
भारतीय संस्कृति की आदि भूमि है अयोध्या
दिगंबर जैन कमेटी के अध्यक्ष स्वामी रवींद्र कीर्ति कहते हैं कि भारतीय संस्कृति की आदि भूमि अयोध्या है। अयोध्या में पिछले तीन सौ साल पहले 100 दिगंबर जैन मंदिर थे। वर्तमान में अयोध्या में पांच तीर्थकरों के स्थान हैं। आज हम सभी के लिए महान सौभाग्य एवं गौरव का विषय है ऐसे महापुरुषों की जन्मभूमि अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण अनेक शताब्दियों के परिश्रम के बाद सफलता को प्राप्त हो रहा है। इसके लिए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, विहिप एवं इस संकल्प से जुड़े हुए सभी संत-महंत, जिन्होंने इस महान कार्य में अपनी आहुति प्रदान की है उन सभी का पूरे जैन समाज की ओर से अभिनंदन करता हूं।