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भव्य राममंदिर का तेजी से निर्माण चाहते हैं संत-धर्माचार्य
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अयोध्या-रामलला
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के छह माह बाद भी श्रीरामजन्मभूमि खुले आसमान के नीचे है। तमाम तैयारियों का दावा करने वाले विश्व हिंदू परिषद के बहुमत वाले ट्रस्ट को ही राममंदिर बनाने का दायित्व है। फिर भी यह हालत संत-धर्माचार्यों को खल रही है। वे कहते हैं कि पहले तीन माह तक मंदिर निर्माण की शुरुआत करने में देरी हुई। अब डेढ़ माह से कोरोना संकट ने हाथ बांध दिए हैं।
मगर, अब देरी क्यों ? श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तेजी से भव्य राममंदिर निर्माण की शुरुआत करनी चाहिए। संत कहते हैं कि जब सरकार के सभी कार्यदायी संस्थाओं ने काम शुरू कर दिए हैं। फैक्ट्रियों को चलाने की अनुमति मिल गई है, निजी निर्माण आदि कार्य को भी हरी झंडी है, तो फिर राममंदिर निर्माण को लेकर अब देरी करना ठीक नहीं होगा।
राममंदिर निर्माण का सभी को बेसब्री से इंतजार है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि राममंदिर का फैसला आने के बाद टेंट में विराजमान रामलला के विग्रह को टेंट से अस्थाई मंदिर में प्रतिस्थापित तो कर दिया गया, मगर भगवान राम का जन्मस्थान खुले आसमान के नीचे आंधी, पानी, धूप सहने को विवश है। यहां दिव्य-भव्य, अलौकिक मंदिर बनाकर रामलला विराजने की आस कब पूरी होगी।
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ट्रस्ट के जिम्मेदार आखिर कब तक चुप रहेंगे। वैसे 9 नवंबर 2019 को राममंदिर का फैसला आने के बाद से ही अयोध्या का कलंक मिट गया था। 14 वर्षों के बनवास के बाद राम के अयोध्या लौटने पर जो मनोदशा अयोध्यावासियों की थी, कुछ इसी तरह की स्थिति राममंदिर का फैसला आने के बाद रामनगरी में दिखा।
ट्रस्ट का गठन होने के बाद राममंदिर निर्माण की दिशा में तेजी से काम शुरू हुआ तो रामनगरी भव्य राममंदिर की कल्पना से निहाल हो उठी। इसी बीच रामलला को टेंट से निकालकर अस्थाई मंदिर में चांदी के सिंहासन पर विराजित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं अस्थाई मंदिर में भगवान की आरती भी उतारी। इसके बाद मंदिर निर्माण समिति के नृपेंद्र मिश्र ने भी अयोध्या का दौरा कर राममंदिर निर्माण की रणनीति बनाई। इसी बीच वैश्विक महामारी कोरोना ने दस्तक दे दी और पूरे देश में लॉकडाउन घोषित होने के साथ ही राममंदिर निर्माण की तैयारी भी बाधित हुई।
हाल यह है कि अभी तक ट्रस्ट का कार्यालय भी नहीं खुल सका है। अब रामनगरी के संतों की इच्छा है कि देश में लॉकडाउन में छूट दी जा रही है, अयोध्या राम की कृपा से कोरोना से बची हुई है इसलिए अब राममंदिर निर्माण की दिशा में कदम आगे बढ़ाना चाहिए। संतों ने कहा कि अब रामलला केे दिव्य-अलौकिक मंदिर में देखने की इच्छा प्रबल हो चली है।
शीघ्र शुरू होगा युद्घस्तर पर कार्य
राममंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास कहते हैं कि कोरोना महामारी के कारण पहले ही राममंदिर का निर्माण प्रभावित हो चुका है, अब हम और देर नहीं चाहते हैं, जल्द राममंदिर का भव्य स्वरूप सामने आना चाहिए। अब शीघ्र ही युद्घस्तर पर कार्य शुरू होगा। ट्रस्ट के अध्यक्ष भी शीघ्र राममंदिर निर्माण का प्रारंभ चाहते हैं। उन्होंने बताया कि राममंदिर निर्माण की तैयारी है। लॉकडाउन समाप्त होते ही काम शुरू हो जाएगा, पहले राष्ट्र को देखना है, शीघ्र ही राम जी की कृपा से सब अच्छा होगा।
जल्द शुरू होना चाहिए राममंदिर निर्माण
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मगर, अब देरी क्यों ? श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तेजी से भव्य राममंदिर निर्माण की शुरुआत करनी चाहिए। संत कहते हैं कि जब सरकार के सभी कार्यदायी संस्थाओं ने काम शुरू कर दिए हैं। फैक्ट्रियों को चलाने की अनुमति मिल गई है, निजी निर्माण आदि कार्य को भी हरी झंडी है, तो फिर राममंदिर निर्माण को लेकर अब देरी करना ठीक नहीं होगा।
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राममंदिर निर्माण का सभी को बेसब्री से इंतजार है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि राममंदिर का फैसला आने के बाद टेंट में विराजमान रामलला के विग्रह को टेंट से अस्थाई मंदिर में प्रतिस्थापित तो कर दिया गया, मगर भगवान राम का जन्मस्थान खुले आसमान के नीचे आंधी, पानी, धूप सहने को विवश है। यहां दिव्य-भव्य, अलौकिक मंदिर बनाकर रामलला विराजने की आस कब पूरी होगी।
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ट्रस्ट के जिम्मेदार आखिर कब तक चुप रहेंगे। वैसे 9 नवंबर 2019 को राममंदिर का फैसला आने के बाद से ही अयोध्या का कलंक मिट गया था। 14 वर्षों के बनवास के बाद राम के अयोध्या लौटने पर जो मनोदशा अयोध्यावासियों की थी, कुछ इसी तरह की स्थिति राममंदिर का फैसला आने के बाद रामनगरी में दिखा।
ट्रस्ट का गठन होने के बाद राममंदिर निर्माण की दिशा में तेजी से काम शुरू हुआ तो रामनगरी भव्य राममंदिर की कल्पना से निहाल हो उठी। इसी बीच रामलला को टेंट से निकालकर अस्थाई मंदिर में चांदी के सिंहासन पर विराजित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं अस्थाई मंदिर में भगवान की आरती भी उतारी। इसके बाद मंदिर निर्माण समिति के नृपेंद्र मिश्र ने भी अयोध्या का दौरा कर राममंदिर निर्माण की रणनीति बनाई। इसी बीच वैश्विक महामारी कोरोना ने दस्तक दे दी और पूरे देश में लॉकडाउन घोषित होने के साथ ही राममंदिर निर्माण की तैयारी भी बाधित हुई।
हाल यह है कि अभी तक ट्रस्ट का कार्यालय भी नहीं खुल सका है। अब रामनगरी के संतों की इच्छा है कि देश में लॉकडाउन में छूट दी जा रही है, अयोध्या राम की कृपा से कोरोना से बची हुई है इसलिए अब राममंदिर निर्माण की दिशा में कदम आगे बढ़ाना चाहिए। संतों ने कहा कि अब रामलला केे दिव्य-अलौकिक मंदिर में देखने की इच्छा प्रबल हो चली है।
शीघ्र शुरू होगा युद्घस्तर पर कार्य
राममंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास कहते हैं कि कोरोना महामारी के कारण पहले ही राममंदिर का निर्माण प्रभावित हो चुका है, अब हम और देर नहीं चाहते हैं, जल्द राममंदिर का भव्य स्वरूप सामने आना चाहिए। अब शीघ्र ही युद्घस्तर पर कार्य शुरू होगा। ट्रस्ट के अध्यक्ष भी शीघ्र राममंदिर निर्माण का प्रारंभ चाहते हैं। उन्होंने बताया कि राममंदिर निर्माण की तैयारी है। लॉकडाउन समाप्त होते ही काम शुरू हो जाएगा, पहले राष्ट्र को देखना है, शीघ्र ही राम जी की कृपा से सब अच्छा होगा।
जल्द शुरू होना चाहिए राममंदिर निर्माण