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मठ-मंदिरों से निकली रामबरात, थिरके श्रद्धालु
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भगवान के स्वरूप को लेकर श्रद्धालुओं ने किया जय श्रीराम का जयघोष।
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। ...मंगलगीत कानों में मधुर रस घोल रहे थे। सजे-धजे हाथी घोड़े व सतरंगी आतिशबाजी से उत्सव का रंग गाढ़ा होता रहा। ...बाजे-गाजे की धूम थी।
राजसी वैभव के साथ रविवार को विभिन्न मठ-मंदिरों से जब रामबरात निकली तो समूची रामनगरी जश्न में डूबी रही। मंदिरों में गूंज रहे बधाई गीतों के बीच रामविवाह उत्सव शिखर पर रहा।
रामबरात की भव्यता देख हजारों भक्तों के साथ साधु-संत व धर्माचार्य निहाल हो उठे। झिलमिल रोशनियों के बीच रामायण स्वरूप बने कलाकारों को देख लोग मंत्रमुग्ध हो उठे।
नगर के प्रमुख मार्गों पर बरात देखने लोग उमड़ पड़े। धर्माचार्यों के साथ संत-श्रद्धालु जय श्रीराम के उद्घोष करते दिखे। बरात में शामिल लोग रामजी की निकली सवारी...दूलह श्रीरघुनाथ बने, दुलही सिय सुंदर मंदिर माही...जैसे पदों को लयबद्ध कर श्रद्धा से प्रफुल्लित होकर झूमते, नाचते, गाते व भावविभोर होते रहे।
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अगहन शुक्ल पंचमी तिथि को पूरे राजसी वैभव के साथ भगवान राम की बरात निकाली गई। धार्मिक परंपरा के अनुपालन में रविवार शाम होते ही अयोध्या के विभिन्न मठ-मंदिरों से भगवान श्रीराम की भव्य बरात गाजे-बाजे व हाथी घोड़ों के साथ निकाली गई। भगवान राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के दूल्हा स्वरूप समेत महर्षि गुरू वशिष्ठ, राजा दशरथ, हनुमंतलला, जामवंत आदि से सजी बरात निकलनी शुरू हुई तो रामनगरी में उत्साह, उमंग व श्रद्धा का उत्कर्ष हिलोरे लेता नजर आया। बरात में दूल्हे के भेष में भगवान राम का दर्शन करने के लिए भक्तों का समूह उमड़ पड़ा।
भजनों व गीतों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। दिव्य अलौकिक रथ पर सवार भगवान
राम की एक झलक पाने के लिए भक्त व्याकुल रहे। बरात निकलने के पूर्व भगवान के विग्रह व प्रतिरूपों का पूजन व आरती की गई। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चारों के साथ स्वरूपों को रथ पर बैठाकर बैंडबाजे के साथ बरात निकाली गई। विभिन्न स्वरूपों और रूप रंगों में सजे बारातियों ने अपने आराध्य के विवाह उत्सव की खुशियों में झूमकर नृत्य किया। बरात नगर भ्रमण के बाद प्रतीकात्मक रूप से मंदिर परिसर में ही बनाए गए जनकपुर नगरी में पहुंची। यहां रात भर भगवान राम के विवाह की रस्में पूरी की जाएंगी।
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राजसी वैभव के साथ रविवार को विभिन्न मठ-मंदिरों से जब रामबरात निकली तो समूची रामनगरी जश्न में डूबी रही। मंदिरों में गूंज रहे बधाई गीतों के बीच रामविवाह उत्सव शिखर पर रहा।
रामबरात की भव्यता देख हजारों भक्तों के साथ साधु-संत व धर्माचार्य निहाल हो उठे। झिलमिल रोशनियों के बीच रामायण स्वरूप बने कलाकारों को देख लोग मंत्रमुग्ध हो उठे।
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नगर के प्रमुख मार्गों पर बरात देखने लोग उमड़ पड़े। धर्माचार्यों के साथ संत-श्रद्धालु जय श्रीराम के उद्घोष करते दिखे। बरात में शामिल लोग रामजी की निकली सवारी...दूलह श्रीरघुनाथ बने, दुलही सिय सुंदर मंदिर माही...जैसे पदों को लयबद्ध कर श्रद्धा से प्रफुल्लित होकर झूमते, नाचते, गाते व भावविभोर होते रहे।
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अगहन शुक्ल पंचमी तिथि को पूरे राजसी वैभव के साथ भगवान राम की बरात निकाली गई। धार्मिक परंपरा के अनुपालन में रविवार शाम होते ही अयोध्या के विभिन्न मठ-मंदिरों से भगवान श्रीराम की भव्य बरात गाजे-बाजे व हाथी घोड़ों के साथ निकाली गई। भगवान राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के दूल्हा स्वरूप समेत महर्षि गुरू वशिष्ठ, राजा दशरथ, हनुमंतलला, जामवंत आदि से सजी बरात निकलनी शुरू हुई तो रामनगरी में उत्साह, उमंग व श्रद्धा का उत्कर्ष हिलोरे लेता नजर आया। बरात में दूल्हे के भेष में भगवान राम का दर्शन करने के लिए भक्तों का समूह उमड़ पड़ा।
भजनों व गीतों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। दिव्य अलौकिक रथ पर सवार भगवान
राम की एक झलक पाने के लिए भक्त व्याकुल रहे। बरात निकलने के पूर्व भगवान के विग्रह व प्रतिरूपों का पूजन व आरती की गई। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चारों के साथ स्वरूपों को रथ पर बैठाकर बैंडबाजे के साथ बरात निकाली गई। विभिन्न स्वरूपों और रूप रंगों में सजे बारातियों ने अपने आराध्य के विवाह उत्सव की खुशियों में झूमकर नृत्य किया। बरात नगर भ्रमण के बाद प्रतीकात्मक रूप से मंदिर परिसर में ही बनाए गए जनकपुर नगरी में पहुंची। यहां रात भर भगवान राम के विवाह की रस्में पूरी की जाएंगी।