{"_id":"5eef7db58ebc3e42cf7f20d2","slug":"puja-faizabad-news-lko527038188","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरयू स्नान को उमड़े भक्त, खुले मंदिरों के कपाट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरयू स्नान को उमड़े भक्त, खुले मंदिरों के कपाट
विज्ञापन
ग्रहण के बाद सरयू में स्नान करते श्रद्धालु।
- फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। सूर्यग्रहण के बाद रामनगरी में सरयू नदी में स्नान एवं दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। सिद्घपीठ हनुमानगढ़ी, रामलला, कनकभवन सहित अन्य मंदिरों के पट दोपहर बाद जैसे खुले, वैसे ही भक्तों के कदम मंदिरों की ओर चल पड़े। हनुमानगढ़ी में तो पट खुलते ही भक्तों की लंबी कतार लग गयी।
सूर्यग्रहण के बाद शास्त्रों में स्नान-दान एवं पूजन का विधान बताया गया है। इसी मान्यता के चलते रविवार की दोपहर 2:04 बजे जैसे ही ग्रहण का मोक्ष हुआ और सूतक समाप्त हुआ, सरयू स्नान के लिए घाटों पर भीड़ एकत्र हो गयी।
सूर्यग्रहण के कारण लगने वाले सूतक के चलते शनिवार की रात्रि 10:31 बजे ही शयन आरती के बाद मंदिरों के पट बंद कर दिए गए थे। जिसके चलते रविवार की दोपहर तक भक्त अपने आराध्य का दर्शन-पूजन नहीं कर सके। पहली पाली में रामलला का भी दर्शन भक्तों को सुलभ नहीं हो सका।
विज्ञापन
दोपहर 2:04 बजे सूर्यग्रहण की समाप्ति के बाद मंदिरों की साफ-सफाई, श्रृंगार, पूजन, मंगला आरती के बाद जैसे ही पुन: मंदिरों के कपाट खुले तो दर्शन के लिए भक्तों की कतार लग गयी। ग्रहण खत्म होते ही पवित्र नदियों में स्नान की मान्यता है। इसी के चलते रविवार को दोपहर बाद ग्रहण का मोक्ष होते ही सरयू तट भक्तों से गुलजार हो उठा।
भक्तों ने पावन सलिला सरयू में डुबकी लगाई और मंदिरों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अपने आराध्य का दर्शन-पूजन किया। सिद्घपीठ हनुमानगढ़ी, नाका हनुमानगढ़ी, कनकभवन, नागेश्वरनाथ, क्षीरेश्वरनाथ आदि मंदिरों में दोपहर से शुरू हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। इस दौरान मंदिरों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए भक्तों को दर्शन-पूजन कराया गया।
पहली पाली में नहीं हो सके रामलला के दर्शन
रामलला के दरबार में रविवार की पहली पाली में सूतक के कारण भक्त हाजिरी नहीं लगा सके। रामलला का दर्शन दो पालियों में सुबह 7 से 11 व दोपहर 2 से 6 बजे तक होता है। ग्रहण के सूतक के चलते पहली पाली में रामलला का दरबार भक्तों से सूना रहा। रामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि ग्रहण समाप्त होने के बाद गर्भगृह की साफ-सफाई भगवान का श्रृंगार कर रोग-भोग लगाया गया। उसके बाद मंगलाआरती कर मंदिर के पट करीब तीन भक्तों के लिए खोले गए। इस तरह रविवार को केवल तीन घंटे ही रामलला के दर्शन की सुविधा भक्तों को मिल पायी।
विज्ञापन
सूर्यग्रहण के बाद शास्त्रों में स्नान-दान एवं पूजन का विधान बताया गया है। इसी मान्यता के चलते रविवार की दोपहर 2:04 बजे जैसे ही ग्रहण का मोक्ष हुआ और सूतक समाप्त हुआ, सरयू स्नान के लिए घाटों पर भीड़ एकत्र हो गयी।
विज्ञापन
सूर्यग्रहण के कारण लगने वाले सूतक के चलते शनिवार की रात्रि 10:31 बजे ही शयन आरती के बाद मंदिरों के पट बंद कर दिए गए थे। जिसके चलते रविवार की दोपहर तक भक्त अपने आराध्य का दर्शन-पूजन नहीं कर सके। पहली पाली में रामलला का भी दर्शन भक्तों को सुलभ नहीं हो सका।
विज्ञापन
दोपहर 2:04 बजे सूर्यग्रहण की समाप्ति के बाद मंदिरों की साफ-सफाई, श्रृंगार, पूजन, मंगला आरती के बाद जैसे ही पुन: मंदिरों के कपाट खुले तो दर्शन के लिए भक्तों की कतार लग गयी। ग्रहण खत्म होते ही पवित्र नदियों में स्नान की मान्यता है। इसी के चलते रविवार को दोपहर बाद ग्रहण का मोक्ष होते ही सरयू तट भक्तों से गुलजार हो उठा।
भक्तों ने पावन सलिला सरयू में डुबकी लगाई और मंदिरों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अपने आराध्य का दर्शन-पूजन किया। सिद्घपीठ हनुमानगढ़ी, नाका हनुमानगढ़ी, कनकभवन, नागेश्वरनाथ, क्षीरेश्वरनाथ आदि मंदिरों में दोपहर से शुरू हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। इस दौरान मंदिरों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए भक्तों को दर्शन-पूजन कराया गया।
पहली पाली में नहीं हो सके रामलला के दर्शन
रामलला के दरबार में रविवार की पहली पाली में सूतक के कारण भक्त हाजिरी नहीं लगा सके। रामलला का दर्शन दो पालियों में सुबह 7 से 11 व दोपहर 2 से 6 बजे तक होता है। ग्रहण के सूतक के चलते पहली पाली में रामलला का दरबार भक्तों से सूना रहा। रामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि ग्रहण समाप्त होने के बाद गर्भगृह की साफ-सफाई भगवान का श्रृंगार कर रोग-भोग लगाया गया। उसके बाद मंगलाआरती कर मंदिर के पट करीब तीन भक्तों के लिए खोले गए। इस तरह रविवार को केवल तीन घंटे ही रामलला के दर्शन की सुविधा भक्तों को मिल पायी।