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अफसरों की मिलीभगत से हाईवे पर ट्रकों का कब्जा

Sun, 14 Aug 2016 11:30 PM IST
फैजाबाद
फैजाबाद Updated Sun, 14 Aug 2016 11:30 PM IST
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Possession of the trucks on highway
फैजाबाद में रविवार को नेशनल हाईवे के नाका के नवीनंडी बाईपास पर इस तरह उल्टी दिशा से चल रही गाड़ियंा। - फोटो : अमर उजाला
हाईवे पर आए दिन होने वाले हादसों और उसमें जान गंवाने वालों को लेकर प्रशासन संवेदशील नहीं है। जेब गर्म कर मंडल मुख्यालय से गुजरी फोर लेन हाईवेेे का शहरी हिस्सा सहादतगंज से देवकाली तक ट्रकों का गैराज बना हुआ है।
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यहां हाईवे के दोनों साइड लेन पर ट्रकों की मरम्मत करने वाली दर्जनों दुकानें-सर्विस सेंटर आबाद हैं। हाईवे से रोजाना गोरखपुर-लखनऊ-आजमगढ़-बलिया तक आने-जाने वाले सरकार के मंत्री से लेकर शासन के उच्चाधिकारियों का भी कोई खौफ नहीं है।
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इसके पीछे जिला व पुलिस प्रशासन, एआरटीओ और एनएचआई की मिलीभगत से लाखों की वसूली की शिकायतें हो चुकी हैं। मगर कुछ नहीं हुआ। ऐसे में आए दिन गलत लेन से आती-जाती ट्रकें हादसे का सबब बनती हैं। 
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सूरत-ए-हाल यह है कि फोर लेन हाईवे पर सहादतगंज से देवकाली तक आठ किमी सिर्फ  बीच की ही दो लेन ही वाहनों के आवागमन के लिए शेष हैं, जबकि साइड की दोनों लेन पर ट्रकों का कब्जा रहता है।

राष्ट्रीय राजमार्ग पर सहादतगंज से लेकर देवकाली बाईपास तक की स्थिति अत्यंत खराब है। यहां पर राजमार्ग आधा ही रह गया है। उसकी साइड लेन पर ट्रकें तो खड़ी ही रहती है, फोर लेन सड़क का आधा हिस्सा भी ट्रकों की गिरफ्त में है। शहर के ज्यादातर बड़े ट्रांसपोर्टरों का कार्यालय भी इसी मार्ग पर है। 

नवीन मंडी से लेकर सांई दाता की कुटिया तक तकरीबन तीन किमी. का हाईवेे पूरी तरह से ट्रकों के गैराज के रूप में तब्दील हो चुका है। इस कारण अक्सर हाईवेे पर वाहनों का लंबा जाम लग जाता है और फिर जाम हटाने के लिए पुलिसकर्मी लाठी भांजने लगते हैं, जबकि हकीकत यह है कि इन्हीं की निष्क्रियता के कारण हाईवे की यह दुर्दशा है।

ट्रकों के खड़े रहने से यहां की सड़क भी काफी धंस गई है। देवकाली फ्लाईओवर के नीचे अभी दो माह पहले ही अवैध अतिक्रमण हटाया गया था, लेकिन धीरे-धीरे यहां पर फिर दुकानें आबाद हो गईं, जबकि यहीं पर पुलिस बूथ भी है।  


ट्रंासपोर्टर इतने रसूखदार है कि दो वर्ष पहले राज्यमंत्री तेजनारायन पांडेय पवन ने प्रेस कांफ्रेंस कर हाईवे से ट्रकों को हटाने के लिए खुद निकलने की घोषणा की और निकले भी, लेकिन उन्हें प्रशासन का सहयोग नहीं मिल पाया। 
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