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Ayodhya News: अब मेडिकल कॉलेज में हो सकेगी दूरबीन विधि से सर्जरी
Sat, 28 Jan 2023 12:27 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sat, 28 Jan 2023 12:27 AM IST
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अयोध्या। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में करीब 50 लाख की लागत से लेप्रोस्कोपिक 4के मॉडल मशीन की खरीद हुई है। इसे सर्जरी ओटी में स्थापित किया गया है। इस मशीन से अब यहां दूरबीन शल्य चिकित्सा पद्धति की शुरुआत होगी और मरीजों को ओपन सर्जरी के होने वाले दर्द से निजात मिल सकेगी। इसका लाभ निकटवर्ती जिले के लोगों को भी मिल सकेगा।
राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज से जुड़े दर्शननगर अस्पताल में कई तरह से ओपन सर्जरी होती थी, लेकिन ओपन सर्जरी के बजाय लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (दूरबीन शल्य चिकित्सा पद्धति) को ज्यादा सुरक्षित और दर्दरहित माना जाता है। इस विधि से ऑपरेशन करने पर मरीज को परेशानी भी कम होती है। सामान्यत: वह 24 से 72 घंटे में ही चलने-फिरने की स्थिति में आ जाता है।
अब तक मेडिकल कॉलेज में लेप्रोस्कोपिक मशीन की व्यवस्था नहीं हो पाई थी। यहां पर तैनात सर्जरी विभागाध्यक्ष ने प्रयोग के तौर पर निजी व्यवस्था करके एक पुरानी मशीन स्थापित कराई थी, लेकिन उससे हाइटेक ऑपरेशन नहीं हो पाते थे, सिर्फ सीखने के काम में मशीन आती थी। बीते मार्च माह में ही लेप्रोस्कोपिक मशीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू हुई। जिसे खरीदकर बुधवार को सर्जरी ओटी में स्थापित किया गया है।
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य व सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ सत्यजीत वर्मा ने बताया कि लेप्रोस्कोपिक सर्जरी एक अत्याधुनिक शल्य चिकित्सा पद्धति है, जिसमें ऑपरेशन बहुत ही छोटे चीरों के द्वारा संपन्न किए जाते हैं। ओपन विधि से ऑपरेशन करने पर इन्हीं ऑपरेशनों के लिए बड़े चीरे लगाने की आवश्यकता पड़ती है, जिनमें जोखिम भी अधिक रहता है।
हो सकेंगी यह सर्जरी...
-लेप्रोस्कोपिक मशीन से एपेंडिक्स, गाल ब्लेडर में पथरी, हार्निया, गर्भाशय से संबंधित ऑपरेशन, ओवेरियन ट्यूमर, किडनी सहित अन्य ऑपरेशन आसानी से संभव हैं।
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राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज से जुड़े दर्शननगर अस्पताल में कई तरह से ओपन सर्जरी होती थी, लेकिन ओपन सर्जरी के बजाय लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (दूरबीन शल्य चिकित्सा पद्धति) को ज्यादा सुरक्षित और दर्दरहित माना जाता है। इस विधि से ऑपरेशन करने पर मरीज को परेशानी भी कम होती है। सामान्यत: वह 24 से 72 घंटे में ही चलने-फिरने की स्थिति में आ जाता है।
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अब तक मेडिकल कॉलेज में लेप्रोस्कोपिक मशीन की व्यवस्था नहीं हो पाई थी। यहां पर तैनात सर्जरी विभागाध्यक्ष ने प्रयोग के तौर पर निजी व्यवस्था करके एक पुरानी मशीन स्थापित कराई थी, लेकिन उससे हाइटेक ऑपरेशन नहीं हो पाते थे, सिर्फ सीखने के काम में मशीन आती थी। बीते मार्च माह में ही लेप्रोस्कोपिक मशीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू हुई। जिसे खरीदकर बुधवार को सर्जरी ओटी में स्थापित किया गया है।
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य व सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ सत्यजीत वर्मा ने बताया कि लेप्रोस्कोपिक सर्जरी एक अत्याधुनिक शल्य चिकित्सा पद्धति है, जिसमें ऑपरेशन बहुत ही छोटे चीरों के द्वारा संपन्न किए जाते हैं। ओपन विधि से ऑपरेशन करने पर इन्हीं ऑपरेशनों के लिए बड़े चीरे लगाने की आवश्यकता पड़ती है, जिनमें जोखिम भी अधिक रहता है।
हो सकेंगी यह सर्जरी...
-लेप्रोस्कोपिक मशीन से एपेंडिक्स, गाल ब्लेडर में पथरी, हार्निया, गर्भाशय से संबंधित ऑपरेशन, ओवेरियन ट्यूमर, किडनी सहित अन्य ऑपरेशन आसानी से संभव हैं।