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Ayodhya News: पांच करोड़ से मेडिकल कॉलेज के पुराने भवन की होगी मरम्मत
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अयोध्या। सपा सरकार में बनकर तैयार हुए राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज (पूर्व में संयुक्त मंडलीय अस्पताल दर्शननगर) के तीन सौ बेड के भवन की अब मरम्मत की जाएगी। इसके लिए उप्र राजकीय निर्माण ने 4.99 करोड़ रुपये का प्रारंभिक आगणन प्रस्तुत किया है। जिसकी स्वीकृति के लिए प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को प्रस्ताव भेजा है।
बसपा सरकार में दर्शननगर में सौ बेड के अस्पताल की आधारशिला रखी गई थी। मंद गति से तमाम अवरोधों के बीच निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ, लेकिन बसपा सरकार में पूरा नहीं हो सका। वर्ष 2012 में प्रदेश में सपा सरकार आई तो तत्कालीन अयोध्या विधायक तेज नारायण पांडेय के प्रयास से इसे उच्चीकृत करके तीन सौ बेड बनाने के लिए कार्य शुरू हुआ। इस दौरान भी अड़चनें आती रहीं और मामला उच्च न्यायालय पहुंचा तो आननफानन 2017 में सौ बेड के अस्पताल का शुभारंभ हुआ।
वर्ष 2019 में राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई। इसे मेडिकल कॉलेज से संबद्ध कर दिया गया। अस्पताल चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन हो गया। एनएमसी के मानक के अनुसार दो सौ बेड के अस्पताल का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। जो कि लगभग बनकर तैयार हो चुका है। इस बीच नया भवन तो चमचमाता नजर आ रहा है, लेकिन पुराने भवन की हालत खस्ताहाल होने लगी है।
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काफी समय से रंगरोगन व मरम्मत न होने के कारण ओपीडी ब्लॉक, इमरजेंसी ब्लॉक, वार्ड व आवासीय परिसर में जगह-जगह दरारें, दीवार में नमी, उखड़े हुए प्लास्टर, चोक नालियां, जलभराव, टपकती हुई छत आदि नजर आने लगी है। मरीज व तीमारदारों की सुरक्षा के मद्देनजर भी इसकी मरम्मत का कार्य आवश्यक हो गया है। वहीं, शीघ्र ही प्रधानमंत्री द्वारा दो सौ बेड के अस्पताल के लोकार्पण की चर्चाएं हैं।
इन सब मामलों को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा ने तीन सौ बेड के अस्पताल के हस्तांतरण के पूर्व से ही रंगाई-पुताई व मरम्मत न होने का हवाला देते हुए इसके मरम्मत के लिए नवंबर माह में उप्र राजकीय निर्माण निगम से प्रारंभिक आगणन मांगा था।
जिसके अनुपालन में एक दिसंबर को परियोजना प्रबंधक ने इमरजेंसी ब्लॉक, ओपीडी ब्लॉक, वार्ड व आवासीय परिसर के रंगरोगन, मरम्मत आदि कार्यों के लिए करीब 4.99 करोड़ की अनुमानित लागत निर्धारित करते हुए प्रारंभिक आगणन प्रस्तुत किया है। यदि कोई बाधा न आई तो शीघ्र ही तीन सौ बेड का भवन भी चमचमाता हुआ नजर आएगा।
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बसपा सरकार में दर्शननगर में सौ बेड के अस्पताल की आधारशिला रखी गई थी। मंद गति से तमाम अवरोधों के बीच निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ, लेकिन बसपा सरकार में पूरा नहीं हो सका। वर्ष 2012 में प्रदेश में सपा सरकार आई तो तत्कालीन अयोध्या विधायक तेज नारायण पांडेय के प्रयास से इसे उच्चीकृत करके तीन सौ बेड बनाने के लिए कार्य शुरू हुआ। इस दौरान भी अड़चनें आती रहीं और मामला उच्च न्यायालय पहुंचा तो आननफानन 2017 में सौ बेड के अस्पताल का शुभारंभ हुआ।
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वर्ष 2019 में राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई। इसे मेडिकल कॉलेज से संबद्ध कर दिया गया। अस्पताल चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन हो गया। एनएमसी के मानक के अनुसार दो सौ बेड के अस्पताल का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। जो कि लगभग बनकर तैयार हो चुका है। इस बीच नया भवन तो चमचमाता नजर आ रहा है, लेकिन पुराने भवन की हालत खस्ताहाल होने लगी है।
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काफी समय से रंगरोगन व मरम्मत न होने के कारण ओपीडी ब्लॉक, इमरजेंसी ब्लॉक, वार्ड व आवासीय परिसर में जगह-जगह दरारें, दीवार में नमी, उखड़े हुए प्लास्टर, चोक नालियां, जलभराव, टपकती हुई छत आदि नजर आने लगी है। मरीज व तीमारदारों की सुरक्षा के मद्देनजर भी इसकी मरम्मत का कार्य आवश्यक हो गया है। वहीं, शीघ्र ही प्रधानमंत्री द्वारा दो सौ बेड के अस्पताल के लोकार्पण की चर्चाएं हैं।
इन सब मामलों को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा ने तीन सौ बेड के अस्पताल के हस्तांतरण के पूर्व से ही रंगाई-पुताई व मरम्मत न होने का हवाला देते हुए इसके मरम्मत के लिए नवंबर माह में उप्र राजकीय निर्माण निगम से प्रारंभिक आगणन मांगा था।
जिसके अनुपालन में एक दिसंबर को परियोजना प्रबंधक ने इमरजेंसी ब्लॉक, ओपीडी ब्लॉक, वार्ड व आवासीय परिसर के रंगरोगन, मरम्मत आदि कार्यों के लिए करीब 4.99 करोड़ की अनुमानित लागत निर्धारित करते हुए प्रारंभिक आगणन प्रस्तुत किया है। यदि कोई बाधा न आई तो शीघ्र ही तीन सौ बेड का भवन भी चमचमाता हुआ नजर आएगा।