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बने मछुआ आयोग
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 22 Aug 2015 12:06 AM IST
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राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद की ओर से नगर के तिकोनिया पार्क में धरना-प्रदर्शन किया गया। उनकी मांग थी कि इनके लिए मछुआ आयोग बनाया जाये और अनुसूचित जाति का दर्जा देते हुए मिलने वाले लाभों को दिया जाय। प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा गया। इसमें 14 सूत्रीय मांग पूरा करने को कहा गया है।
जिलाध्यक्ष संतोष कुमार निषाद की विज्ञप्ति के अनुसार वायदे के बावजूद पिछले सात वर्षों से केंद्र तथा प्रदेश की सरकारें इस दिशा में कुछ नहीं कर रही हैं। यह जाति तरक्की के मामले में आज भी 67 साल पीछे है।
मछुआ समुदाय की मझवार, गोड़, तुरैहा, खरवार, बेलदार की सभी पर्यायवाची जातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी करने के लिए एकता परिषद आंदोलन, धरना-प्रदर्शन करती रही है।
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फरवरी 2014 में चले धरना-प्रदर्शन के बाद गोरखपुर के डीएम ने तहसीलदारों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया था। महाराष्ट्र और उड़ीसा की सरकारें अपने प्रांतों में यह लाभ दे रही हैं। परिषद द्वारा लखनऊ में प्रदर्शन करने पर 17 फरवरी 2014 को सपा सरकार ने लाठियां बरसाई थीं।
परिषद का कहना था कि लोकसभा चुनाव से पहले मुलायम सिंह यादव ने इन जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिये जाने, मछुआ आयोग बनाने, श्रृंगवेरपुर को धाम व पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने को कहा था, किंतु ऐसा कुछ नहीं किया गया।
परिषद ने गोरखपुर आंदोलन में पुलिस की गोली से मारे गये अखिलेश कुमार निषाद के आश्रितों को 50 लाख की मदद व सरकारी नौकरी देने, घायलों को 50-50 हजार का मुआवजा देने व प्रदर्शनकारियों को बिना शर्त रिहा करने जैसी 14 मांगों को पूरा करने की मांग की है।
ज्ञापन देने वालों में निन्हूराम निषाद, राजेश निषाद, डॉ. रामशंकर निषाद, पंकज कुमार, शिवशंकर, अनिल, गया प्रसाद, मीरा निषाद, रीना, शिवपती, गायत्री देवी, नीलम, सुनीता आदि शामिल थे।
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जिलाध्यक्ष संतोष कुमार निषाद की विज्ञप्ति के अनुसार वायदे के बावजूद पिछले सात वर्षों से केंद्र तथा प्रदेश की सरकारें इस दिशा में कुछ नहीं कर रही हैं। यह जाति तरक्की के मामले में आज भी 67 साल पीछे है।
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मछुआ समुदाय की मझवार, गोड़, तुरैहा, खरवार, बेलदार की सभी पर्यायवाची जातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी करने के लिए एकता परिषद आंदोलन, धरना-प्रदर्शन करती रही है।
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फरवरी 2014 में चले धरना-प्रदर्शन के बाद गोरखपुर के डीएम ने तहसीलदारों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया था। महाराष्ट्र और उड़ीसा की सरकारें अपने प्रांतों में यह लाभ दे रही हैं। परिषद द्वारा लखनऊ में प्रदर्शन करने पर 17 फरवरी 2014 को सपा सरकार ने लाठियां बरसाई थीं।
परिषद का कहना था कि लोकसभा चुनाव से पहले मुलायम सिंह यादव ने इन जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिये जाने, मछुआ आयोग बनाने, श्रृंगवेरपुर को धाम व पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने को कहा था, किंतु ऐसा कुछ नहीं किया गया।
परिषद ने गोरखपुर आंदोलन में पुलिस की गोली से मारे गये अखिलेश कुमार निषाद के आश्रितों को 50 लाख की मदद व सरकारी नौकरी देने, घायलों को 50-50 हजार का मुआवजा देने व प्रदर्शनकारियों को बिना शर्त रिहा करने जैसी 14 मांगों को पूरा करने की मांग की है।
ज्ञापन देने वालों में निन्हूराम निषाद, राजेश निषाद, डॉ. रामशंकर निषाद, पंकज कुमार, शिवशंकर, अनिल, गया प्रसाद, मीरा निषाद, रीना, शिवपती, गायत्री देवी, नीलम, सुनीता आदि शामिल थे।