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वाहनों से नहीं, बदइंतजामी से जान को खतरा
फैजाबाद
Updated Mon, 09 Jan 2017 10:48 PM IST
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रोडवेज के पास स्थित रैन बसेरा की हालत बदतर है। यहां की सभी खिड़कियों के शीशे टूट गए हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में राहगीरों व मरीजों को लेकर आने वालों के लिए बने रैन बसेरे स्थाई हैं, लेकिन बदहाल पड़े हैं। यहां वाहन से रौंदे जाने से नहीं बल्कि बदइंतजामी से जान जाने का खतरा बना हुआ है। यहां अस्थाaई डेरे कहीं सड़क किनारे आबाद नहीं हैं, जहां वाहनों से रौंदे जाने का डर हो।
हालांकि अयोध्या में मेले के दौरान या गर्मी में हाईवे पर श्रद्धालुओं की बसें रोक कर आबाद होने वाले डेरे कई बार हादसे के शिकार हुए हैं। बीते 9 अगस्त को अयोध्या के हाईवे पर डिवाइडर पर सो रहे सात श्रद्धालुओं को कंटेनर ने रौंद दिया था।
गरीबों, रिक्शा चालकों, मरीजों के तीमारदारों को ठंड से बचाव के लिए बने रैन बसेरा रहने के काबिल नहीं हैं। कुछ में ताला पड़े हैं। जिला महिला चिकित्सालय में भर्ती मरीजों के तीमारदारों के लिए परिसर में एक सशुल्क रैन बसेरा चलता है।
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लेकिन इसमें अक्सर तालाबंद रहता है। इकलौता रैन बसेरा गरीबों, रिक्शा चालकों के लिए रोडवेज के पास चल रहा है लेकिन घुप अंधेरे में डूबे बीस सीमेंट की बेंचों वाले रैन बसेरे की हालत इतनी खराब कि इसमें रात गुजारना और सांसें ले पाना मुश्किल है। इसकी तीमारदारी करने वाला कोई नहीं है। रात गुजारने वाले रिक्शावान व होटल पर काम करने वाले नौकर ही झाडू लगाते हैं। जिला अस्पताल परिसर में दो मंजिला रैन बसेरा में भी ताला बंद है।
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हालांकि अयोध्या में मेले के दौरान या गर्मी में हाईवे पर श्रद्धालुओं की बसें रोक कर आबाद होने वाले डेरे कई बार हादसे के शिकार हुए हैं। बीते 9 अगस्त को अयोध्या के हाईवे पर डिवाइडर पर सो रहे सात श्रद्धालुओं को कंटेनर ने रौंद दिया था।
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गरीबों, रिक्शा चालकों, मरीजों के तीमारदारों को ठंड से बचाव के लिए बने रैन बसेरा रहने के काबिल नहीं हैं। कुछ में ताला पड़े हैं। जिला महिला चिकित्सालय में भर्ती मरीजों के तीमारदारों के लिए परिसर में एक सशुल्क रैन बसेरा चलता है।
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लेकिन इसमें अक्सर तालाबंद रहता है। इकलौता रैन बसेरा गरीबों, रिक्शा चालकों के लिए रोडवेज के पास चल रहा है लेकिन घुप अंधेरे में डूबे बीस सीमेंट की बेंचों वाले रैन बसेरे की हालत इतनी खराब कि इसमें रात गुजारना और सांसें ले पाना मुश्किल है। इसकी तीमारदारी करने वाला कोई नहीं है। रात गुजारने वाले रिक्शावान व होटल पर काम करने वाले नौकर ही झाडू लगाते हैं। जिला अस्पताल परिसर में दो मंजिला रैन बसेरा में भी ताला बंद है।