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जिला कारागार में आयोजित किया गया विधिक साक्षरता शिविर
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अयोध्या। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष व जनपद न्यायाधीश ज्ञान प्रकाश तिवारी के मार्गदर्शन में जिला कारागार में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सुमन तिवारी ने की।
उन्होंने शिविर में उपस्थित बंदियों से उनकी परेशानियों व विधिक समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। उनको उनके अधिकारों व विधिक प्रावधानों के बारे में जानकारी दी। जिसका उनके द्वारा लाभ लिया जा सकता है। बंदियों को बताया गया कि जिला कारागार में लीगल एड क्लीनिक की स्थापना की गई है। किसी भी बंदी को यदि कोई समस्या हो तो वह जेल में स्थापित लीगल एड क्लीनिक के माध्यम से विधिक सहायता प्राप्त कर सकती है। बंदियों को विधिक जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि किसी भी बंदी के पास यदि अधिवक्ता की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा अपने मुकदमे की पैरवी के लिए नि:शुल्क अधिवक्ता की सुविधा प्रदान की जाती है।
कारापाल सीपी त्रिपाठी ने बताया कि कोई ऐसा बंदी नहीं है जिसको विधिक सहायता की आवश्यकता हो और उसे विधिक सहायता प्रदान न की गई हो। कोई ऐसा भी बंदी नहीं है जिसकी जमानती अपराध में जमानत होने के बाद बंधपत्र दाखिल न हो पाने के कारण सात दिन से अधिक जेल में निरुद्ध हो। शिविर में मौजूद बंदियों को संविधान में उल्लिखित मौलिक कर्तव्यों की शपथ दिलाई। शिविर में सीपी त्रिपाठी, विनय प्रताप सिंह, कु. अभिलाषा आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने शिविर में उपस्थित बंदियों से उनकी परेशानियों व विधिक समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। उनको उनके अधिकारों व विधिक प्रावधानों के बारे में जानकारी दी। जिसका उनके द्वारा लाभ लिया जा सकता है। बंदियों को बताया गया कि जिला कारागार में लीगल एड क्लीनिक की स्थापना की गई है। किसी भी बंदी को यदि कोई समस्या हो तो वह जेल में स्थापित लीगल एड क्लीनिक के माध्यम से विधिक सहायता प्राप्त कर सकती है। बंदियों को विधिक जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि किसी भी बंदी के पास यदि अधिवक्ता की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा अपने मुकदमे की पैरवी के लिए नि:शुल्क अधिवक्ता की सुविधा प्रदान की जाती है।
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कारापाल सीपी त्रिपाठी ने बताया कि कोई ऐसा बंदी नहीं है जिसको विधिक सहायता की आवश्यकता हो और उसे विधिक सहायता प्रदान न की गई हो। कोई ऐसा भी बंदी नहीं है जिसकी जमानती अपराध में जमानत होने के बाद बंधपत्र दाखिल न हो पाने के कारण सात दिन से अधिक जेल में निरुद्ध हो। शिविर में मौजूद बंदियों को संविधान में उल्लिखित मौलिक कर्तव्यों की शपथ दिलाई। शिविर में सीपी त्रिपाठी, विनय प्रताप सिंह, कु. अभिलाषा आदि मौजूद रहे।
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