राममंदिर निर्माण में अब कोई रोड़ा नहीं होगा बर्दाश्त

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 19 Feb 2020 12:45 AM IST
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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टियों को मंदिर के लिए दी गई 67 एकड़ जमीन में से 4/5 एकड़ पर कब्रगाह का दावा करने संबंधी लिखे पत्र पर संत-धर्माचार्यों ने एतराज जताया है। ट्रस्टियों ने भी पत्र को शरारत पूर्ण व भावना को भड़काने वाला ठहराया।
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रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सतेंद्र दास ने कहा कि अयोध्या ने बहुत आक्रमण झेला है। अब राममंदिर के घंटा-घड़ियाल की आवाज से यहां मुगलों की ओर से किए गए पाप का नाश होगा। ट्रस्टी व निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि मुगलों ने जबरन मंदिर तोड़कर मस्जिदों का निर्माण किया, यहां कहीं कब्र नहीं देखी गई। ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने कहा कि अफवाह फैलाने वालों से सबको सावधान रहने की जरूरत है।

मुस्लिमों द्वारा पत्र भेजे जाने पर अयोध्या के संत समाज में नाराजगी है। संत समाज का कहना है कि अयोध्या का कण-कण पवित्र है। मुसलमान अंधविश्वास पैदा करने का षड़यंत्र कर रहे हैं। दूसरी तरफ पत्र भेजने वाले मोहम्मद आजम का कहना है कि राममंदिर और बाबरी मस्जिद का पुराना मामला था। इस पर फैसला आया और सभी ने इसको मान लिया।
1993 में सुरक्षा की दृष्टि से जमीनों का अधिग्रहण हुआ था यह बात सदन में भी कही गई थी कि फैसला आने के बाद जिनकी जमीनें हैं उनको वापस कर दी जाएंगी। फैसला आ चुका है और अब उस जमीन पर मंदिर बनना है। हम नहीं चाहते हैं कि सनातन धर्म के हिंदू भाई श्रीरामचंद्र जी का मंदिर ऐसे स्थान पर बनाएं जिस पर कोई विवाद हो।
हमने पत्र लिखकर यह मांग की है कि नजूल विभाग में जितने भी कब्रिस्तान दर्ज हैं, उन सभी को रिलीज कर दिया जाए। अधिग्रहण में शामिल मंदिरों को रिलीज करने की बात कही गई है। उसी तर्ज पर कब्रिस्तान भी रिलीज कर हम लोगों को हैंडओवर कर दिया जाए। यह आग्रह हमने ट्रस्ट के लोगों से किया है। श्री राम का भव्य मंदिर बनने का समय आया है। अब ऐसा कोई काम न करें जिससे कि कोई उसमें दाग लगे, यह आग्रह है।
बाबरी मामले के पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि मेरे वकील शमशाद के माध्यम से एक पत्र श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को दिया गया है। कहा कि मंदिर की 67 एकड़ जमीन में से 4/5 एकड़ पर कब्रगाह है। 1949 से 1992 तक उस जगह का दूसरे तरह से इस्तेमाल हो रहा था। ट्रस्टी विचार करें कि क्या मंदिर का निर्माण कब्रगाह पर हो सकता है। हाजी ने बताया कि आज की तारीख में भले ही वहां कब्र न दिखाई दे, लेकिन वह कब्रगाह है।
मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने साफ कहा है कि मुस्लिम समाज द्वारा जो पत्र ट्रस्टियों को लिखा गया है उससे उन्हें कोई मतलब नहीं है, जिसने लिखा वह जाने। मैं बस इतनी बात कहूंगा कि अब अयोध्या विकास की ओर है। अब और विवाद नहीं होना चाहिए। हमारी मांग है कि अयोध्या नगरी में मुस्लिम समाज की जो विरासत धरोहर है उसे भी सहेजा जाए। मस्जिदों, मजारों, कब्रगाह का सौंदर्यीकरण कराया जाए।
रामलला के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कड़े शब्दों में इसका विरोध करते हुए कहा कि पूरे अधिग्रहित क्षेत्र में न कहीं कोई कब्रिस्तान है न ही मुस्लिम समाज का वहां पर कोई कब्जा था। लोअर कोर्ट में इसकी बहस भी हो चुकी है। सनातन धर्म की मान्यता है कि जहां पर पूजा-अर्चना होती है घंटा घड़ियाल बजते हैं। शंखनाद होता है, वह स्थल पवित्र होता है। इंच-इंच जमीन भगवान राम की है। मुस्लिम समाज इसमें अड़ंगा लगाने का षड़यंत्र कर रहा है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि हमने उस भूमि पर कभी कोई कब्र नहीं देखी। हमारे बुजुर्ग भी बताते रहे कि मुगलों ने जबरन मंदिर तोड़कर मस्जिदों का निर्माण किया, हमेशा मंदिर ही रहा है। 1934 से मुसलमान कभी अधिग्रहीत क्षेत्र में गए ही नहीं। कब्रिस्तान होने की बात झूठी एवं निराधार है। राममंदिर निर्माण में रोड़ा डालने का प्रयास है, अयोध्या की रज-रज पवित्र है, मुस्लिम समाज हमारी भावनाएं भड़काने का प्रयास कर रहा है।
संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास रामायणी ने कहा कि वहां कोई कब्र नहीं थी। काल्पनिक कब्र बनाकर अयोध्या की भूमि को अपवित्र करने का प्रयास कुंठित लोगों द्वारा किया जा रहा है। रामलला की भूमि पवित्र है। मुसलमानों ने नया शिगूफा छोड़ा है। अंधविश्वास पैदा करने का षड़यंत्र किया जा रहा है। अयोध्या की सारी भूमि पवित्र है राममंदिर बनने पर स्वत: और पवित्र हो जाएगी। राममंदिर निर्माण में अब कोई रोड़ा बर्दाश्त नहीं होगा।
विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्ण भूमि रामलला की मान ली है, जब इसको स्वीकार कर लिया है और फैसला भी दे दिया है। तब कब्रिस्तान की बात करना भ्रम की स्थिति पैदा करना है साथ ही साथ सुप्रीम कोर्ट की मुस्लिम समाज अवमानना कर रहा है।
कभी मलबे की मांग, कभी कब्रिस्तान की बात कहकर मुस्लिम समाज हिंदुओं की भावनाओं को भड़काने का प्रयास कर रहा है। यह सिर्फ दिव्य-भव्य राममंदिर निर्माण की राह में रोड़ा अटकाने का प्रयास है।

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