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जंग खा रहे लाखों के उपकरण व वेंटिलेटर

Wed, 21 Oct 2020 11:15 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 21 Oct 2020 11:15 PM IST
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केस एक : बीकापुर के हृदयपुर खजुरहट निवासी रमेश पाठक की पत्नी शांति को प्रसव के लिए महिला अस्पताल में 12 अक्तूबर को लाया गया था। अगले दिन ऑपरेशन से प्रसव कराया गया। इस बीच प्रसूता को सीने में दर्द के साथ रक्तस्राव होने लगा। आईसीयू के अभाव में उसे रेफर कर दिया गया।
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केस दो : मिल्कीपुर के अंजरौली निवासी मनीषा को पांच अक्तूबर को भर्ती किया गया था। इलाज के दौरान मरीज को झटके आने लगे और आईसीयू के अभाव में उसे रेफर किया गया। कड़ी मशक्कत के बाद मरीज को हायर सेंटर तक पहुंचाया गया।
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केस तीन : शहजादपुर अंबेडकर नगर निवासी प्रियंका सोनी को प्रसव के लिए छह अक्तूबर को अक्तूबर को भर्ती किया गया। वह एनेमिक थी और रक्तचाप भी अधिक था। आईसीयू न होने से मरीज को रेफर किया गया।
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अयोध्या। आईसीयू की कमी के कारण जिले में गंभीर मरीजों की सांसों की डोर टूट रही है। हालत बिगड़ने पर उन्हें रोजाना रेफर करना पड़ता है। जिला महिला अस्पताल में आए दिन ऐसी घटनाएं देखने को मिलती हैं। कहने को तो यहां आईसीयू बना है, लेकिन यह अब तक वजूद में नहीं आ सका है। यहां न तो पर्याप्त उपकरण हैं और न ही इसे चलाने वाले विशेषज्ञ।
आधी आबादी के प्रसव संबंधी इलाज के लिए मंडल मुख्यालय पर जिला महिला चिकित्सालय है। जिले के ग्रामीणांचल पर संचालित सीएचसी-पीएचसी व एफआरयू में प्रसव संबंधी ठोस इंतजाम न होने के कारण अधिकांश प्रसव के मामले यहीं पर आते हैं।
पहला, दूसरा ऑपरेशन हो तो संभव है, लेकिन तीसरा सीजेरियन यहां आसान नहीं। इसके लिए अधिक रक्तचाप वाली महिलाएं, एनेमिक, झटके की बीमारी से पीड़ित, हृदय रोगी आदि महिलाओं का प्रसव यहां नहीं हो पाता। आननफानन रेफर करने के बाद महिलाएं समय से हायर सेंटर पर यदि नहीं पहुंचीं तो जान भी गंवानी पड़ती है। ऐसी नौबत यहां आईसीयू के अभाव में आ रही है।
महिला अस्पताल में दस बेड का आईसीयू बनाया जा चुका है। बेड तो इंस्टॉल कर दिए गए, लेकिन सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम की व्यवस्था नहीं की गई। इधर, कोरोना काल में चार वेंटीलेटर भी भेज दिए गए, जिन्हें इंस्टॉल तक नहीं किया गया, जो स्टोर रूम में पड़े हैं। इन पर धूल की परत जम गई है। इसके अलावा वेंटिलेटर चलाने वालों की तैनाती नहीं हो सकी।
विशेषज्ञों के अनुसार आईसीयू संचालित करने के लिए चेस्ट फिजीशियन, बेहोशी के चिकित्सक, आईसीयू टेक्नीशियन, सहित नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता होती है। लेकिन इनकी तैनाती ही नहीं हुई। इसलिए यह आईसीयू सिर्फ शोपीस ही बना हुआ है और लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी उनका सदुपयोग नहीं हो रहा है।

अस्पताल में दस बेड का आईसीयू बना है, लेकिन पर्याप्त उपकरण नहीं हैं। इसे चलाने के लिए चिकित्सक व स्टाफ की तैनाती भी नहीं हुई है। जबकि आए दिन आईसीयू की जरूरत पड़ने पर मरीजों को रेफर करना मजबूरी होती है। उच्चाधिकारियों सहित शासन तक मामले से अवगत कराया गया है।
-डॉ. एसके शुक्ला, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल, अयोध्या
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