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झूलन में आज सज-धज के युगल सरकार बैठे हैं...
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अयोध्या के रंगमहल मंदिर में झूलोनोत्सव का शुभारंभ।
- फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। झूलन में आज सज-धज के युगल सरकार बैठे हैं, अलिन मन मोहने मानो सुछवि शृंगार बैठे हैं.., राम रसिया सरयू किनारे कदम जूरि.., भइया राम रसिया हिंडोरा लागे ला बा’..., हरे रामा रिमझिम बरसे पनियां झूले राजा रनिया रे हारी’....जैसे धार्मिक सावन गीतों पर श्रद्धालु भावविभोर हुए।
यह नजारा रामनगरी के रामकोट स्थित प्राचीन रंगमहल मंदिर में दिखा। जहां श्रावण झूलनोत्सव का श्रीगणेश हो गया है। हालांकि रामनगरी के विभिन्न मंदिरों में झूलनोत्सव का पर्व सावन शुक्ल तृतीया से मनाया जाता है। इसी दिन पौराणिक मणिपर्वत पर मेले का आयोजन होता है।
रंगमहल मंदिर में रजत हिंडोले पर विराजमान अपने आराध्य के झूला विहार का दृश्य देखकर भक्त मंत्रमुग्ध हो रहे हैं तो विभिन्न प्रांतों से आए सांस्कृतिक कलाकारों की प्रस्तुतियां भी झूलनोत्सव को दिव्यता प्रदान कर रही है।
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शाम होते ही मंदिर में गीत-संगीत एवं अध्यात्म की महफिल बुधवार से ही सज रही है। आराध्य की भक्ति में श्रद्धालु लीन नजर आते हैं। देर रात्रि तक चलने वाले कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
रंगमहल मंदिर में गुरुपूर्णिमा से ही झूलनोत्सव का शुभारंभ होने की परंपरा है। मंदिर के महंत रामशरण दास ने बताया कि इस वर्ष गुरुपूर्णिमा पर ग्रहण का साया होने के कारण अगले दिन बुधवार से झूलनोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ जो पूरी दिव्यता-भव्यता के साथ रक्षाबंधन पर्व तक संचालित होगा। रंगमहल में झूलनोत्सव का शुभारंभ होते ही विभिन्न सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रम भक्तों की आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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यह नजारा रामनगरी के रामकोट स्थित प्राचीन रंगमहल मंदिर में दिखा। जहां श्रावण झूलनोत्सव का श्रीगणेश हो गया है। हालांकि रामनगरी के विभिन्न मंदिरों में झूलनोत्सव का पर्व सावन शुक्ल तृतीया से मनाया जाता है। इसी दिन पौराणिक मणिपर्वत पर मेले का आयोजन होता है।
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रंगमहल मंदिर में रजत हिंडोले पर विराजमान अपने आराध्य के झूला विहार का दृश्य देखकर भक्त मंत्रमुग्ध हो रहे हैं तो विभिन्न प्रांतों से आए सांस्कृतिक कलाकारों की प्रस्तुतियां भी झूलनोत्सव को दिव्यता प्रदान कर रही है।
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शाम होते ही मंदिर में गीत-संगीत एवं अध्यात्म की महफिल बुधवार से ही सज रही है। आराध्य की भक्ति में श्रद्धालु लीन नजर आते हैं। देर रात्रि तक चलने वाले कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
रंगमहल मंदिर में गुरुपूर्णिमा से ही झूलनोत्सव का शुभारंभ होने की परंपरा है। मंदिर के महंत रामशरण दास ने बताया कि इस वर्ष गुरुपूर्णिमा पर ग्रहण का साया होने के कारण अगले दिन बुधवार से झूलनोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ जो पूरी दिव्यता-भव्यता के साथ रक्षाबंधन पर्व तक संचालित होगा। रंगमहल में झूलनोत्सव का शुभारंभ होते ही विभिन्न सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रम भक्तों की आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।