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डोरेमॉन व छोटा भीम पिचकारी की धूम
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Sun, 20 Mar 2016 10:44 PM IST
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बाजार में सजी पिचकारी की दुकान
- फोटो : अमर उजाला
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होली पर इस बार बच्चों को नरेंद्र मोदी के मुखौटे और उनके नाम की पिचकारी खूब भा रही है। चौक से रिकाबगंज व दूसरे क्षेत्रों में सजी दुकानों पर 25 रुपये से लेकर 17 सौ रुपये तक की पिचकारियां हैं।
डोरेमॉन व छोटा भीम पिचकारियां बच्चों को लुभा रही हैं। डोरेमॉन 165 से 550 तो छोटा भीम 65 रुपये से लेकर 650 रुपये तक है।
बाजार में एके 47 रायफल जैसी डिजायन वाली पिचकारी तो बिक ही रही है, मोदी पिचकारी, एंग्री बर्ड, बैंटेन, टॉम एंड जेरी, पावर-रेंजर बोतल पिचकारी, वोडाफोन, गणेश जी, जहाज, कार, वाटर गन भी खूब पसंद की जा रही हैं।
मुखौटों में मोदी, छोटा भीम, डोरेमॉन, टाइगर, जोकर, स्पाइडरमैन और डरावने भूतों की धूम है। इस बार भी बाजार पर चाइनीज पिचकारी का दबदबा कायम है।
होलिका दहन के लिए चौराहों व नुक्कड़ों पर रेड़ गाड़ दिए गए हैं। होली जलाने के लिए कई जगहों पर पेड़ों की कटान भी हो रही है। पेड़ों की अंधाधुंध कटान से पर्यावरण को नुकसान भले ही हो रहा है, लेकिन जोश में इसकी फिक्र किसी को नहीं है।
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होलिका दहन पर इस साल भी हजारों क्विंटल लकड़ी फूंकने की तैयारी है। नगर में लकड़ी का भाव साढ़े पांच सौ रुपये क्विंटल से ऊपर पहुंच गया है।
उत्साह-उमंग से सराबोर रहने वाले इस उत्सव के लिए अबीर-गुलाल, सिंथेटिक, केमिकल और हर्बल रंगों से बाजार सज गए हैं। रंगों का दाम पिछले वर्ष के सापेक्ष 10 से 20 फीसदी बढ़ गया है।
अबीर गुलाल इस बार 10 रुपये से 25 रुपये प्रति सौ ग्राम है। केमिकल व सिंथेटिक रंग शरीर को बदरंग कर देते हैं। थोड़ी सी सावधानियों केमिकल व सिंथेटिक रंगों के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है।
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डोरेमॉन व छोटा भीम पिचकारियां बच्चों को लुभा रही हैं। डोरेमॉन 165 से 550 तो छोटा भीम 65 रुपये से लेकर 650 रुपये तक है।
बाजार में एके 47 रायफल जैसी डिजायन वाली पिचकारी तो बिक ही रही है, मोदी पिचकारी, एंग्री बर्ड, बैंटेन, टॉम एंड जेरी, पावर-रेंजर बोतल पिचकारी, वोडाफोन, गणेश जी, जहाज, कार, वाटर गन भी खूब पसंद की जा रही हैं।
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मुखौटों में मोदी, छोटा भीम, डोरेमॉन, टाइगर, जोकर, स्पाइडरमैन और डरावने भूतों की धूम है। इस बार भी बाजार पर चाइनीज पिचकारी का दबदबा कायम है।
होलिका दहन के लिए चौराहों व नुक्कड़ों पर रेड़ गाड़ दिए गए हैं। होली जलाने के लिए कई जगहों पर पेड़ों की कटान भी हो रही है। पेड़ों की अंधाधुंध कटान से पर्यावरण को नुकसान भले ही हो रहा है, लेकिन जोश में इसकी फिक्र किसी को नहीं है।
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होलिका दहन पर इस साल भी हजारों क्विंटल लकड़ी फूंकने की तैयारी है। नगर में लकड़ी का भाव साढ़े पांच सौ रुपये क्विंटल से ऊपर पहुंच गया है।
उत्साह-उमंग से सराबोर रहने वाले इस उत्सव के लिए अबीर-गुलाल, सिंथेटिक, केमिकल और हर्बल रंगों से बाजार सज गए हैं। रंगों का दाम पिछले वर्ष के सापेक्ष 10 से 20 फीसदी बढ़ गया है।
अबीर गुलाल इस बार 10 रुपये से 25 रुपये प्रति सौ ग्राम है। केमिकल व सिंथेटिक रंग शरीर को बदरंग कर देते हैं। थोड़ी सी सावधानियों केमिकल व सिंथेटिक रंगों के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है।