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रामलला की दान पेटी में घट गया चढ़ावा
फैजाबाद
Updated Sun, 01 Jan 2017 10:04 PM IST
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रामलला
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के दौरान पहले रामलला के दरबार में हजार पांच सौ के पुराने नोट खूब खपाए गए, तो दान दोगुना हो गया। मगर अब नए दो हजार व पांच सौ के नोट नहीं दिखते। श्रद्धालुओं से रामलला को दिए जाने वाले दान में 20 फीसदी तक कमी आई है। किसी ने दो हजार व पांच सौ का नया नोट नहीं चढ़ाया है, जबकि पहले हजार-पांच सौ के नोट दान पेटी में श्रद्धालु डालते थे।
आठ नवंबर को प्रधानमंत्री ने पांच सौ व एक हजार रुपये की नोटबंदी की घोषणा की तो समूचा देश प्रभावित रहा। आम आदमी से उद्योग-धंधे नोटबंदी के प्रभाव में रहे। मगर धर्मनगरी के मठ-मंदिरों में अचानक आमदनी बढ़ गई।
विवादित परिसर में विराजमान रामलला का आम श्रद्धालुओं को दर्शन दो पालियों में होता है। सुबह और शाम की पाली में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु दर्शन-पूजन करने पहुंचते हैं। पहले पांच नवंबर को रामलला के दानपात्र में हुई गिनती में दो लाख 74 हजार 435 रुपये चढ़ावे के रूप में आए थे।
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जबकि नोटबंदी के दौर में 10 दिन बाद 20 नवंबर को रामलला के दान पात्र में गिनती की गई तो यह रकम चार लाख 14 हजार 670 रुपये हो गई। लेकिन अब भगवान के दरबार में दान में खासी कमी आई है।
परिसर सूत्रों के मुताबिक दिसंबर भर में रामलला के दरबार में आने वाले दान में 20 फीसदी तक कमी आई है। देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्री व पर्यटक रामलला का दर्शन बड़ी संख्या में कर रहे हैं लेकिन दान पेटी में उनके द्वारा बड़े नोटों की बजाए छोटे नोट डाले जा रहे हैं। बीते पांच-दस वर्षों में बीता माह रामलला के दरबार में दान की दृष्टि से काफी मंदा माना जा रहा है।
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आठ नवंबर को प्रधानमंत्री ने पांच सौ व एक हजार रुपये की नोटबंदी की घोषणा की तो समूचा देश प्रभावित रहा। आम आदमी से उद्योग-धंधे नोटबंदी के प्रभाव में रहे। मगर धर्मनगरी के मठ-मंदिरों में अचानक आमदनी बढ़ गई।
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विवादित परिसर में विराजमान रामलला का आम श्रद्धालुओं को दर्शन दो पालियों में होता है। सुबह और शाम की पाली में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु दर्शन-पूजन करने पहुंचते हैं। पहले पांच नवंबर को रामलला के दानपात्र में हुई गिनती में दो लाख 74 हजार 435 रुपये चढ़ावे के रूप में आए थे।
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जबकि नोटबंदी के दौर में 10 दिन बाद 20 नवंबर को रामलला के दान पात्र में गिनती की गई तो यह रकम चार लाख 14 हजार 670 रुपये हो गई। लेकिन अब भगवान के दरबार में दान में खासी कमी आई है।
परिसर सूत्रों के मुताबिक दिसंबर भर में रामलला के दरबार में आने वाले दान में 20 फीसदी तक कमी आई है। देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्री व पर्यटक रामलला का दर्शन बड़ी संख्या में कर रहे हैं लेकिन दान पेटी में उनके द्वारा बड़े नोटों की बजाए छोटे नोट डाले जा रहे हैं। बीते पांच-दस वर्षों में बीता माह रामलला के दरबार में दान की दृष्टि से काफी मंदा माना जा रहा है।