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कुत्ता बांधने की जंजीर को बनाया कैपिटल गुड्स
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Dec 2015 10:27 PM IST
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टैक्स बचाने और वाणिज्य कर विभाग को चकमा देने के लिए तरह-तरह के खेल किए जा रहे हैं। रिटर्न में कुत्ता बांधने की जंजीर को एक फर्म ने कैपिटल गुड्स बनाकर आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) क्लेम कर डाला।
इसी के सहारे बढ़ी जांच में फर्म की लगभग एक करोड़ रुपये की संदिग्ध आईटीसी पकड़ी गई। इस बड़े खुलासे के बाद फर्म ने आईटीसी के जरिए टैक्स चोरी के दायरे में आने वाले 21 लाख रुपये देकर अपनी साख बचाई।
मामला जिले में कोल्ड ड्रिंक बनाने और बिक्री करने वाली पंजीकृत फर्म अमृत बाटलर्स प्रा. लि. चांदपुर हरबंश का है। सूत्रों के मुताबिक फर्म ने वित्तीय साल 2011-12 के रिटर्न में कैपिटल गुड्स के रूप में खासी बड़ी राशि को दिखाते हुए आईटीसी के तहत रिवेट के लिए क्लेम किया लेकिन जंजीर जैसी वस्तु के कैपिटल गुड्स में शामिल होने पर संदेह हुआ तो वाणिज्य कर कमिश्नर कॉर्पोरेट सर्किल डा. एके पांडेय ने इसकी पड़ताल शुरू कर दी।
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उन्होंने फर्म से छह-सात सौ बिल वाउचर मंगवाए। इसको लेकर जांच करने वाले अफसर को कई तरह के दबाव भी झेलने पड़े लेकिन कैपिटल गुड्स के मद में की गई खरीद का सत्यापन किया गया।
जांच में लगभग एक करोड़ आठ लाख रुपये से अधिक की राशि संदिग्ध आईटीसी के दायरे में पाई गई। विभाग के मुताबिक, आईटीसी के तहत उन वस्तुओं के टैक्स पर विभाग से छूट देने की व्यवस्था है लेकिन छूट उन वस्तुओं पर दी जाती है। जो सीधे तौर पर उत्पादकता से जुड़ी मशीनें या दूसरे सामान होते हैं।
मगर जांच अधिकारी पांडेय के मुताबिक जांच में कुत्ता बांधने की जंजीर, साज सज्जा के सामान व्हाइट सीमेंट, पैडेस्टल फैन, बिल्डिंग मैटीरियल, हार्डवेयर, पेंटिंग मैटीरियल्स, घर में लगे एसी जैसे सामानों पर आईटीसी के तहत क्लेम किया गया। इस पर 21.33 लाख रुपये रिवर्स इनपुट टैक्स क्रेडिट कर दिया गया।
इसके बाद होने वाले लाखों के जुर्माने से बचने के लिए फर्म ने इस राशि को जमा कराया। अन्य वर्षों के रिटर्न पर जांच किए जाने की खबर है।
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इसी के सहारे बढ़ी जांच में फर्म की लगभग एक करोड़ रुपये की संदिग्ध आईटीसी पकड़ी गई। इस बड़े खुलासे के बाद फर्म ने आईटीसी के जरिए टैक्स चोरी के दायरे में आने वाले 21 लाख रुपये देकर अपनी साख बचाई।
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मामला जिले में कोल्ड ड्रिंक बनाने और बिक्री करने वाली पंजीकृत फर्म अमृत बाटलर्स प्रा. लि. चांदपुर हरबंश का है। सूत्रों के मुताबिक फर्म ने वित्तीय साल 2011-12 के रिटर्न में कैपिटल गुड्स के रूप में खासी बड़ी राशि को दिखाते हुए आईटीसी के तहत रिवेट के लिए क्लेम किया लेकिन जंजीर जैसी वस्तु के कैपिटल गुड्स में शामिल होने पर संदेह हुआ तो वाणिज्य कर कमिश्नर कॉर्पोरेट सर्किल डा. एके पांडेय ने इसकी पड़ताल शुरू कर दी।
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उन्होंने फर्म से छह-सात सौ बिल वाउचर मंगवाए। इसको लेकर जांच करने वाले अफसर को कई तरह के दबाव भी झेलने पड़े लेकिन कैपिटल गुड्स के मद में की गई खरीद का सत्यापन किया गया।
जांच में लगभग एक करोड़ आठ लाख रुपये से अधिक की राशि संदिग्ध आईटीसी के दायरे में पाई गई। विभाग के मुताबिक, आईटीसी के तहत उन वस्तुओं के टैक्स पर विभाग से छूट देने की व्यवस्था है लेकिन छूट उन वस्तुओं पर दी जाती है। जो सीधे तौर पर उत्पादकता से जुड़ी मशीनें या दूसरे सामान होते हैं।
मगर जांच अधिकारी पांडेय के मुताबिक जांच में कुत्ता बांधने की जंजीर, साज सज्जा के सामान व्हाइट सीमेंट, पैडेस्टल फैन, बिल्डिंग मैटीरियल, हार्डवेयर, पेंटिंग मैटीरियल्स, घर में लगे एसी जैसे सामानों पर आईटीसी के तहत क्लेम किया गया। इस पर 21.33 लाख रुपये रिवर्स इनपुट टैक्स क्रेडिट कर दिया गया।
इसके बाद होने वाले लाखों के जुर्माने से बचने के लिए फर्म ने इस राशि को जमा कराया। अन्य वर्षों के रिटर्न पर जांच किए जाने की खबर है।