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छात्रा ने लगाई फांसी

Sun, 29 May 2016 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो / फैजाबाद
अमर उजाला ब्यूरो / फैजाबाद Updated Sun, 29 May 2016 11:30 PM IST
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The student made a hanging
रोते परिवारीजन - फोटो : अमर उजाला
सरकारी नौकरी की आस टूटने से दुखी एक छात्रा का धैर्य जवाब दे गया और उसने फांसी लगाकर जान दे दी। मामला नगर कोतवाली के मोदहा दक्षिणी का है। जानकारी पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया है।
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घटनाक्रम की जानकारी हासिल की है। घटना को लेकर क्षेत्र में हलचल है। शहर के मोदहा दक्षिणी में बैंक आफ इंडिया के रिटायर्ड सुरक्षा कर्मी उदयराज तिवारी का परिवार रहता है। रविवार की सुबह उनकी छोटी पुत्री सविता तिवारी (22) उर्फ पिंकी का शव उसके कमरे में पंखे से लटका पाया गया।
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सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रकरण की जानकारी लेने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। मृतका के भाई बलराम तिवारी ने बताया कि परिवार में तीन बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है।
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वह एक कंपनी में प्राइवेट जाब करते हैं। पिंकी शहर के गुरुनानक गर्ल्स इंटर कॉलेज से इंटर की परीक्षा पास करने के बाद प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी और शहर स्थित एक कोचिंग संस्थान में पढ़ती थी तथा पढ़ाई-लिखाई के खर्च के लिए घर पर बच्चों को पढ़ाती थी। पिंकी ने उत्तर प्रदेश राज्य अधीनस्थ चयन सेवा आयोग (यूपीएसएसएससी) का फॉर्म भरा था।

कुछ नंबरों से लेखपाल भर्ती में पीछे रह गई और तीन दिन पूर्व ग्राम पंचायत अधिकारी पद का रिजल्ट निकला तो उसमें भी सेलेक्शन नहीं हुआ। इसी को लेकर सविता उर्फ पिंकी ने शनिवार की रात अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। शनिवार की सुबह मामले की जानकारी हुई। दरवाजा खुला हुआ था। 

शादी करने से पहले चाहती थी नौकरी 
छात्रा सविता उर्फ पिंकी के पिता उदयराज तिवारी का कहना है कि बिटिया पढ़ने-लिखने में तेज थी। अक्सर शादी-विवाह की बात चलने पर तुनक जाती थी और अपनी मां से कहा करती थी कि नौकरी मिलने के बाद ही वह शादी करेगी।

परिवार पर आर्थिक बोझ न बने, इसके चलते वह घर पर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी। उसको पूरी उम्मीद थी कि लेखपाल अथवा ग्राम पंचायत अधिकारी पद पर चयन हो जाएगा, लेकिन ऐसा न हो सका। नगर कोतवाल एएन जायसवाल ने रविवार को बताया कि मामले की जानकारी पर शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया है। 

भय से न घबराएं, रहें सकारात्मक
मनोेचिकित्सक व शिक्षकों ने रिजल्ट में असफल छात्रों को  सलाह दी है। साकेत कालेज के मनोविज्ञान विभाग के रीडर डॉ. प्रणव त्रिपाठी का कहना है कि वर्तमान भाग-दौड़ के युग में बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

जब किसी शख्स के दिमाग में कोई बात लगातार चलती रहती है तो एक लेयर का निर्माण हो जाता है और इसी के साथ इसके पूरे न हो पाने का भय घर करने लगता है, जो जानलेवा होता है।

इससे बचाव के लिए संबंधित की काउंसलिंग जरूरी है। जिससे उसके स्याह विचारों को सही रास्ते पर लाया जा सके। साकेत कॉलेज के ही समाज शास्त्र विभाग के वरिष्ठ रीडर डॉ. योगेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि मध्यम आय के संयुक्त परिवार में नौकरी को लेकर बड़ी आस पाली जाती है। परिवार से लेकर समाज तक की नजर रहती है कि संबंधित पास हुआ कि फेल।


ऐसा भाव छात्र-छात्रा में पैदा हो जाता है। जिसके चलते असफल होने पर वह आत्महत्या की ओर अग्रसर हो जाता है। उनका कहना है कि समाज व परिवार को सकारात्मक सोच का निर्माण करना होगा। छात्र-छात्रा को समय-समय पर संबल दिया जाना चाहिए। परीक्षा परिणाम आने पर विशेष नजर रखनी चाहिए।
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