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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   hole life sentences to the rapist

दुराचारी को आजीवन कारावास

Fri, 17 Jul 2015 11:28 PM IST
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 17 Jul 2015 11:28 PM IST
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रौनाही थाना क्षेत्र के एक साइको रेपिस्ट की घिनौनी करतूतों पर कोर्ट ने उसे आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस रेपिस्ट पर अलग-अलग तीन किशोरियों से बलात्कार का मुकदमा दर्ज है। एक मामले में आठ साल व दूसरे मामले में दस साल की सजा पहले ही हो चुकी है, जबकि तीसरे मामले में दोषी पाते हुए अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला अपर जिला जज चतुर्थ जगदीश प्रसाद की अदालत से शुक्रवार को हुआ। मामला इनायतनगर थाना क्षेत्र से जुड़ा है।
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वादी के अधिवक्ता मो. रफीक ने बताया कि रौनाही थाना क्षेत्र का रहने वाला सुनील कुमार पांडेय इनायत नगर थाना क्षेत्र के एक गांव में अपनी ननिहाल में रहता था। इसी क्षेत्र की एक 14 वर्षीय किशोरी को उसके घर से तीन अप्रैल 2013 को अगवा करके दिल्ली ले गया। वहां उसके साथ एक महीने आठ दिन तक दुराचार किया। फिर लौटा तो इनायतनगर थाना क्षेत्र के गहनागन के पास दोनों को पुलिस ने पकड़ लिया।
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रिश्तेदारी में तलाश के बाद भी पता न चलने पर सात अप्रैल 2013 को पीड़िता के पिता ने इनायतनगर थाने में अगवा करने की धारा में रिपोर्ट लिखाई थी। पुलिस ने बरामदगी के बाद अपहरण व दुराचार की धारा में आरोप पत्र भेजा। सुनवाई के बाद अदालत ने दुष्कर्म में आजीवन कारावास और अपहरण में 10 वर्ष व 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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दूसरे मामले में सुनील 29 दिसंबर 2011 को अपनी ननिहाल की ही एक किशोरी को बहला फुसलाकर एटा ले गया, जहां उसके साथ तीन महीने तक दुष्कर्म किया। तीन माह बाद किशोरी को सुनील के साथ कुचेरा स्थित पेट्रोल पंप से पकड़ लिया गया। मामले में अपहरण व दुष्कर्म की धारा में आरोप पत्र दाखिल किया गया।

सुनवाई के बाद तत्कालीन अपर जिला जज सप्तम सत्य प्रकाश त्रिपाठी की अदालत ने छह फरवरी 2014 को दुष्कर्म में दस साल व छह हजार रुपये जुर्माने और अपहरण में सात साल व दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। सुनील ने तीसरी वारदात में रौनाही थाना क्षेत्र में अपने गांव की ही तेरह वर्षीय किशोरी के साथ 18 अप्रैल 2004 को दुष्कर्म किया था। मामले की रिपोर्ट दुष्कर्म की धारा में किशोरी के पिता ने दर्ज कराई थी।


सुनवाई के बाद 29 जुलाई 2005 को तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश राम हरिविजय त्रिपाठी ने उसे आठ साल के कठोर कारावास व पांच सौ रुपये जुर्माने की सजा से दंडित किया था।
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