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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Consolidation issue hanging over the decades, a glut of complaints

दशकों से लटके चकबंदी मामले, शिकायतों की भरमार

Sun, 03 Jan 2016 10:25 PM IST
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 03 Jan 2016 10:25 PM IST
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केस एक:
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15 साल साल से नहीं हो रही दाखिल ख़ारिज
रामपुर जोहन में रामरूप का 15 साल से वरासत का मामला लटका हुआ है। इसी गांव के राम मिलन का बंटवारा जैसा मामूली निस्तारण नहीं हो पाया है। पीड़ितों का आरोप है कि विभाग में मचे भ्रष्टाचार से पार पाना आसान नहीं है। इसी गांव के अरुण प्रताप बनाम संजय के मामले में पिछले 10 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी वरासत का मामला लटका हुआ है।

केस दो:
मुख्यमंत्री कार्यालय से रिपोर्ट तलब
बीकापुर तहसील के असकरनपुर गांव में हो रही चकबंदी में बढ़े पैमाने पर अंधेरगर्दी से नाराज ग्राम समिति सदस्य अजय तिवारी ने मुख्यमंत्री से शिकायत की है। शिकायत को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लेते हुए आयुक्त चकबंदी से आख्या मांगी है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसके चक को मूल स्थान से काफी दूर कर दिया गया और ठीक करने के लिए 10 हजार की डिमांड की गई है। यही नही कई लोगों की दाखिल खारिज भी नहीं हो रही है।
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जनपद के 43 गांवों में चकबंदी विभिन्न चरणों में चल रही है। चकबंदी वादों के लिए काश्तकारों को मुख्यालय तक दौड़ लगानी पड़ती है। हाईकोर्ट ने चकबंदी मामलों के निस्तारण में तेजी लाने के उद्देश्य से पुराने मामलों के निस्तारण का निर्देश दिया था।
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इसके तहत जिले में उपसंचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के साथ ही विभिन्न अफसरों ने भी प्राथना पत्रों के निस्तारण के लिए अभियान जरूर चलाया लेकिन पिछले सितंबर माह से दिसंबर तक चली चुनाव प्रक्रिया ने इसकी रफ्तार को धीमा कर दिया। एसओसी के मुताबिक 75 से 80 फीसदी तक पुराने मामले निपट गए हैं। शेष भी अंतिम चरण में हैं। शीघ्र निपट जाएंगे।
 
जिले में चकबंदी प्रक्रिया 80 के दशक में शुरू की गई थी। ज्यादातर गांवों में चक बंदी प्रक्रिया तो पूरी हो गई लेकिन इस वित्तीय साल में अब भी जिले के 43 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया जारी है। इनमें धारा आठ से लेकर धारा 24 तक के मामले हैं। इनमें विभिन्न स्थितियों में नापजोख के साथ अभिलेखीय कार्य किए जा रहे हैं।

चकबंदी प्रक्रिया को लेकर काश्तकारों को खासी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। सहायक चकबंदी अधिकारियों के कार्यालय तो ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में क्षेत्रवार होती हैं लेकिन बड़े अफसरों के कार्यालय जिला मुख्यालय पर होने के कारण काश्तकारों को यहां की दौड़ लगानी पड़ती हैं।  

कई काश्तकार अब भी चकबंदी मामलों को लेकर अब भी दौड़ लगा रहे हैं। इनमें से काश्तकार ओम प्रकाश सिंह कहते हैं कि पांच साल बाद उन्हें चकबंदी के मुकदमे से निजात मिली। राम सुभावन का कहना है कि उनको भी चकबंदी के वाद से निजात मिल गई।  


बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी रमेश नाथ मिश्र का कहना है कि चकबंदी के ज्यादातर पुराने मामलों को निस्तारण कर दिया गया है। यह संख्या लगभग 75 से 80 फीसदी तक पहुंच चुकी है। बताया कि सही संख्या फाइल देखने के बाद ही पता चल पाएगी। पिछले तीन माह से पंचायत चुनाव में व्यस्तता के कारण इसकी रफ्तार धीमी जरूर हो गई।
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