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Ayodhya News: मेडिकल कॉलेज के नए प्राचार्य को विरासत में मिलेंगी चुनौतियां

Sat, 17 Jun 2023 12:04 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Sat, 17 Jun 2023 12:04 AM IST
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Challenges will be inherited by the new Principal of Medical College
- चिकित्सकीय सेवाओं को पटरी पर लाना बनेगा पहली प्राथमिकता
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- मेडिकल कॉलेज के विभागों में चल रही खींचतानी भी बनेगी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
अयोध्या। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज को जल्द ही नया स्थायी प्राचार्य मिल सकता है। कार्यभार संभालने के बाद नए प्राचार्य के समक्ष तमाम चुनौतियां होगी। खास तौर पर अव्यवस्थित तरह से बने परिसर के भवन कक्षों को उपयोग में लाना, व्यवस्थित तौर पर परिसर में नव निर्माण कराना, विभागों के बीच व्याप्त खींचतान खत्म कराकर चिकित्सकीय सेवाओं को पटरी पर लाना बड़ी चुनौती बनेगा।
वर्तमान में मेडिकल कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य का दायित्व उप प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा संभाल रहे हैं। नए प्राचार्य के लिए हुए साक्षात्कार में उन्होंने भी हिस्सेदारी की है। उनके साथ ही इस पद के कई अन्य दावेदार भी मैदान में हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो नए प्राचार्य के नाम पर सहमति बन चुकी है। जल्दी ही इसकी घोषणा होते ही नए प्राचार्य अयोध्या आकर अपना पदभार भी संभाल सकते हैं।
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नए प्राचार्य को पदभार संभालने के बाद सौगात में पिछले प्राचार्यों के कार्यकाल में बेपटरी हुई मेडिकल कालेज की चिकित्सा सेवाएं ही मिलेगी। उन्हें पटरी पर लाना खासी चुनौती होगा। निरीक्षण पर आए प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार पहले ही कह चुके हैं कि अब तक जैसेे चल रहा था, अब आगे ऐसी व्यवस्था के साथ मेडिकल कॉलेज नहीं चलेगा।
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चिकित्सकीय क्षेत्र में बनाया हॉस्टल

मेडिकल कॉलेज में अभी तक जो भवन बने हैं, उसमें सारी मनमानी कार्यदायी एजेंसियों व ठेकेदारों की रही है। उन्हें जहां जमीन समतल मिली, उन्होंने वहां भवन बना डाले। यही कारण है कि पुराने ट्रामा सेंटर के पीछे जेआर हॉस्टल बना दिया गया है। जबकि इसे आवासीय परिसर के पास होना चाहिए था। इसके अलावा 200 बेड के अस्पताल के सामने स्थान कम होने के कारण पार्किंग की समस्या भी ऐसी है, जिसकी भरपाई अब बहुत मुश्किल है।

परेशानियां बढ़ाएगी यह चुनौतियां
- 200 बेड के अस्पताल का संचालन करना, जिसमें मरीजों के लिए रैंप तक नहीं बने हैं। इस वजह से इस भवन को फायर एनओसी भी नहीं मिल पाई है।
- 300 बेड के पुराने भवन में नवीनीकरण का कार्य, पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ।
- निर्माण करने वाली कार्यदायी एजेंसियों व ठेकेदारों की मनमानी पर रोक लगाना।
- ट्रामा सेंटर समेत अनेक प्रस्तावित भवनों को उपयोगिता के अनुसार और गुणवत्ता के साथ निर्माण कराना।
- आवासीय और चिकित्सकीय भवनों के घालमेल को समाप्त कर दुरुस्त करवाना।
- मेडिकल कॉलेज के लिए क्रय की जा रही सामग्री में पारदर्शिता लाना।
- विभागों के बीच खींचतान खत्म करना
- मरीजों की जांच के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था बनाना।
- स्टाफ की ड्यूटी पर उपलब्धता और स्टाफ की कमी को दूर कराना ।
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