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राफ्ट की ढलाई में प्रतिदिन प्रयोग हो रही 287 घनमीटर कंकरीट
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4-अयोध्या-रामजन्मभूमि परिसर में राफ्ट की ढ़लाई के लिए लाई गई मशीन
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। रामजन्मभूमि परिसर में दूसरे चरण का काम तेजी से चल रहा है। इसके तहत राफ्ट की ढ़लाई का काम शुरू हो चुका है। राफ्ट की ढलाई में प्रतिदिन 287 घनमीटर कंकरीट का प्रयोग किया जा रहा है। ढलाई का काम केवल रात में ही 25 डिग्री सेल्सियस तापमान पर हो रहा है। इससे अधिक तापमान होने पर राफ्ट में दरार आने का खतरा पैदा हो जाता है। पूरा कार्य तय समयावधि में पूरा कराने के लिए हर रोज दस घंटे लगातार काम कर ढलाई कार्य कराया जा रहा है। इसके लिए रामजन्म भूमि परिसर में दो स्वचालित मशीनें भी लगाई गयी हैं।
राममंदिर की नींव के ऊपर 1.5 मीटर ऊंची राफ्ट ढालने का काम चल रहा है। चार सौ गुणा तीन सौ लंबे-चौड़े क्षेत्रफल में राफ्ट ढलाई की प्रक्रिया अलग-अलग भागों में बांटकर की जानी है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि राफ्ट ढलाई का काम प्रारंभ हो गया है। पहले दिन 287 घनमीटर कंकरीट ढाली गई। इसके लिए दो बूम प्लेसर गर्भगृह के पास लगाए गए हैं। बूम प्लेेसर एक प्रकार की स्वचालित मशीन है जो कंकरीट डालने का काम करेगी। उन्होंने बताया कि ढ़लाई के लिए 25 डिग्री तापमान आवश्यक है अत: रात में ही ढलाई का कार्य कराया जा रहा है। इससे अधिक तापमान होने पर सतह में दरार आने की आशंका है। इसके लिए बड़ी मात्रा में बर्फ की भी व्यवस्था कर लगातार दस घंटे कार्य कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पहला हिस्सा भी रात में ही ढाला गया। एक हिस्से को ढालने के बाद एक दिन छोड़कर दूसरे हिस्सों की ढलाई का प्लान है। श्रीराय ने बताया कि राफ्ट की ढलाई आईआईटी के विशेषज्ञों की बताई गई तकनीक के आधार पर ही की जा रही है।
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मालवाहक वाहनों के लिए नया रास्ता जल्दी
श्रीरामजन्मभूमि परिसर में चल रहे राममंदिर निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में निर्माण सामग्री हर दिन पहुंच रही है। इसके लिए ट्रकों व अन्य भारी वाहनों का काफिला दिन भर मुख्य मार्ग पर रामजन्मभूमि के गेट नंबर तीन पर लगा रहता है। मालवाहक वाहनों की लंबी कतार से प्राय: जाम की स्थिति बनी रहती है। इसके साथ ही वीआईपी मूवमेंट भी परेशानी खड़ा करता है। इसको देखते हुए मुख्य मार्ग से सटे यूसुफ आरामशीन के बगल से रामजन्मभूमि परिसर के लिए एक नया रास्ता तैयार किया जा रहा है। इसका कार्य भी पूरा होने को है। अगले एक सप्ताह के भीतर इसी मार्ग से मालवाहक वाहनों का प्रवेश परिसर में शुरू हो जाएगा।
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राममंदिर की नींव के ऊपर 1.5 मीटर ऊंची राफ्ट ढालने का काम चल रहा है। चार सौ गुणा तीन सौ लंबे-चौड़े क्षेत्रफल में राफ्ट ढलाई की प्रक्रिया अलग-अलग भागों में बांटकर की जानी है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि राफ्ट ढलाई का काम प्रारंभ हो गया है। पहले दिन 287 घनमीटर कंकरीट ढाली गई। इसके लिए दो बूम प्लेसर गर्भगृह के पास लगाए गए हैं। बूम प्लेेसर एक प्रकार की स्वचालित मशीन है जो कंकरीट डालने का काम करेगी। उन्होंने बताया कि ढ़लाई के लिए 25 डिग्री तापमान आवश्यक है अत: रात में ही ढलाई का कार्य कराया जा रहा है। इससे अधिक तापमान होने पर सतह में दरार आने की आशंका है। इसके लिए बड़ी मात्रा में बर्फ की भी व्यवस्था कर लगातार दस घंटे कार्य कराया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि पहला हिस्सा भी रात में ही ढाला गया। एक हिस्से को ढालने के बाद एक दिन छोड़कर दूसरे हिस्सों की ढलाई का प्लान है। श्रीराय ने बताया कि राफ्ट की ढलाई आईआईटी के विशेषज्ञों की बताई गई तकनीक के आधार पर ही की जा रही है।
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श्रीरामजन्मभूमि परिसर में चल रहे राममंदिर निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में निर्माण सामग्री हर दिन पहुंच रही है। इसके लिए ट्रकों व अन्य भारी वाहनों का काफिला दिन भर मुख्य मार्ग पर रामजन्मभूमि के गेट नंबर तीन पर लगा रहता है। मालवाहक वाहनों की लंबी कतार से प्राय: जाम की स्थिति बनी रहती है। इसके साथ ही वीआईपी मूवमेंट भी परेशानी खड़ा करता है। इसको देखते हुए मुख्य मार्ग से सटे यूसुफ आरामशीन के बगल से रामजन्मभूमि परिसर के लिए एक नया रास्ता तैयार किया जा रहा है। इसका कार्य भी पूरा होने को है। अगले एक सप्ताह के भीतर इसी मार्ग से मालवाहक वाहनों का प्रवेश परिसर में शुरू हो जाएगा।