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अयोध्या की पौराणिक तिलोदकी गंगा को मिल गए भगीरथ
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अयोध्या-कुछ ऐसे दिखती है पंडितपुर में तिलोदकी गंगा नदी
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। अयोध्या धाम की पौराणिक तिलोदकी गंगा को भगीरथ मिल गए हैं। मार्ग के ज्यादातर स्थानों पर लुप्त हो चुकी तिलोदकी को राजस्व अभिलेखों के जरिए खोज निकाला गया है। महीनों की कसरत के बाद यह महत्वपूर्ण नदी पहली बार सतह पर आ गई है। जमीन पर लुप्तप्राय तिलोदगी गंगा सर्वे में लगभग 47 किमी. लंबी पाई गई है। श्रीराम मंदिर निर्माण के साथ ही इसे भी जमीन पर उतारने की तैयारी है।
अयोध्या जिले से होकर बहने वाली छह नदियों सरयू, गोमती, तमसा, बिसुही और कल्याणी के साथ तिलोदकी गंगा (तिलैया) पौराणिक नदी है। इसकी चर्चा पुराणों में भी है। ऋषि रमणक की तपस्या से उद्भूत यह नदी अयोध्या नगरी से सटकर निकलती है। बताया गया है कि शताब्दियों पहले तो यह बहा करती थी लेकिन बाद में उथली होने के कारण धीरे-धीरे यह संकरी होती गई और धीरे-धीरे यह अस्सी फीसदी स्थानों पर लुप्त हो गई। इसे जानने वाले भी कम होते चले गए तो अभिलेखों में भी कहीं नाला तो कहीं बाहा के रूप में इसे दर्ज कर दिया गया। इसे खोज निकलना किसी भगीरथ प्रयास से कम नहीं था।
जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने सांसद लल्लू सिंह की अध्यक्षता में आयोजित जिला अनुश्रवण समिति की बैठक में इसके पुरुद्धार की घोषणा की तो तमाम लोगों को विश्वास नहीं हुआ कि तिलोदकी गंगा फिर कैसे सदानीरा हो सकती है। लेकिन डीएम के साथ सीडीओ प्रथमेश कुमार ने इसकी खोज शुरू करवाई। सोहावल और सदर तहसील प्रशासन के साथ इसके मार्ग के संभावित गांवों के लेखपालों को एक साथ बैठाया तो नदी का मार्ग एक-एक करके आगे के गांवों से जुड़ता चला गया। इसका रूट साफ हो गया और यह पौराणिक नदी सर्वे में लगभग 47 किमी. लंबी मिली।
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अफसरों और सर्वे करने वालों की मानें तो इसके मार्ग में कई बड़ी झीलें और तालाब इसके अस्तित्व की गवाही दे रहे हैं। माना जाता है कि माडव्य ऋषि की तपस्या से तमसा और अयोध्या की 84 कोस की परिधि में पंडितपुर में ऋषि रमणक की तपस्या से ही तिलोदकी गंगा का उद्भव हुआ और तमसा से जुड़ते हुए यह आगे बढ़ी। सोहावल तहसील के पंडितपुर में आज भी यह नदी की शक्ल में मौजूद है जो समदा झील से होते हुए आगे बढ़ती है। इसी तरह कुछ अन्य स्थानों पर भी इसका वजूद है।
पौराणिक तिलोदकी गंगा (तिलैया) नदी दो तहसील सदर और तीन ब्लॉकों सोहावल, मसौधा और पूराबाजार से होते हुए अपनी लगभग 47 किमी. की यात्रा पूरी करती है। इसके बाद यह सरयू में मिल जाती हैं।
सूत्रों के मुताबिक तिलोदकी गंगा नदी सोहावल ब्लॉक के गौरा ब्रह्मनान, अरथर, पंडितपुर, भिखारीपुर, मोइयाकपूरपुर ग्राम पंचायतपुर से, मसौधा ब्लॉक के हूंसेपुर, मानापुर, रायपुर, बल्लीपुर, सरियावां, गोपालपुर, बिछिया, मउयदुवंशपुर और टोनिया, पूराबाजार ब्लॉक में रहे गंजा, जनौरा, भीखापुर, रानोपाली, आशापुर, मक्खापुर, तकपुरा, जियनपुर, हैबतपुर, बागबिजेसर, काजीपुर, जयसिंहपुर, आशिफ बाग माझा, शाहनेवाजपुर, तिहुरा माझा, माझा रामपुर हलवारा, से होते हुए सरायरासी और राजेपुर मांझा के आसपास से होते जाने की बात सामने आई है। अब इसका कुछ भाग नगर निगम क्षेत्र में समाहित हो गया है।
इनसेट...
-तिलोदकी गंगा (तिलैया) के पुनरुद्धार के लिए जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के स्तर से राजस्व अभिलेखों से खोज कराई गई है। सर्वे का काम पूरा हो गया है। राजस्व अभिलेखों के मुताबिक यह नदी लगभग 47 किमी. लंबी है। अब इस पर कार्य कराए जाने की तैयारी है।
नागेंद्र मोहन राम त्रिपाठी
उपायुक्त मनरेगा, अयोध्या
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अयोध्या जिले से होकर बहने वाली छह नदियों सरयू, गोमती, तमसा, बिसुही और कल्याणी के साथ तिलोदकी गंगा (तिलैया) पौराणिक नदी है। इसकी चर्चा पुराणों में भी है। ऋषि रमणक की तपस्या से उद्भूत यह नदी अयोध्या नगरी से सटकर निकलती है। बताया गया है कि शताब्दियों पहले तो यह बहा करती थी लेकिन बाद में उथली होने के कारण धीरे-धीरे यह संकरी होती गई और धीरे-धीरे यह अस्सी फीसदी स्थानों पर लुप्त हो गई। इसे जानने वाले भी कम होते चले गए तो अभिलेखों में भी कहीं नाला तो कहीं बाहा के रूप में इसे दर्ज कर दिया गया। इसे खोज निकलना किसी भगीरथ प्रयास से कम नहीं था।
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जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने सांसद लल्लू सिंह की अध्यक्षता में आयोजित जिला अनुश्रवण समिति की बैठक में इसके पुरुद्धार की घोषणा की तो तमाम लोगों को विश्वास नहीं हुआ कि तिलोदकी गंगा फिर कैसे सदानीरा हो सकती है। लेकिन डीएम के साथ सीडीओ प्रथमेश कुमार ने इसकी खोज शुरू करवाई। सोहावल और सदर तहसील प्रशासन के साथ इसके मार्ग के संभावित गांवों के लेखपालों को एक साथ बैठाया तो नदी का मार्ग एक-एक करके आगे के गांवों से जुड़ता चला गया। इसका रूट साफ हो गया और यह पौराणिक नदी सर्वे में लगभग 47 किमी. लंबी मिली।
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अफसरों और सर्वे करने वालों की मानें तो इसके मार्ग में कई बड़ी झीलें और तालाब इसके अस्तित्व की गवाही दे रहे हैं। माना जाता है कि माडव्य ऋषि की तपस्या से तमसा और अयोध्या की 84 कोस की परिधि में पंडितपुर में ऋषि रमणक की तपस्या से ही तिलोदकी गंगा का उद्भव हुआ और तमसा से जुड़ते हुए यह आगे बढ़ी। सोहावल तहसील के पंडितपुर में आज भी यह नदी की शक्ल में मौजूद है जो समदा झील से होते हुए आगे बढ़ती है। इसी तरह कुछ अन्य स्थानों पर भी इसका वजूद है।
पौराणिक तिलोदकी गंगा (तिलैया) नदी दो तहसील सदर और तीन ब्लॉकों सोहावल, मसौधा और पूराबाजार से होते हुए अपनी लगभग 47 किमी. की यात्रा पूरी करती है। इसके बाद यह सरयू में मिल जाती हैं।
सूत्रों के मुताबिक तिलोदकी गंगा नदी सोहावल ब्लॉक के गौरा ब्रह्मनान, अरथर, पंडितपुर, भिखारीपुर, मोइयाकपूरपुर ग्राम पंचायतपुर से, मसौधा ब्लॉक के हूंसेपुर, मानापुर, रायपुर, बल्लीपुर, सरियावां, गोपालपुर, बिछिया, मउयदुवंशपुर और टोनिया, पूराबाजार ब्लॉक में रहे गंजा, जनौरा, भीखापुर, रानोपाली, आशापुर, मक्खापुर, तकपुरा, जियनपुर, हैबतपुर, बागबिजेसर, काजीपुर, जयसिंहपुर, आशिफ बाग माझा, शाहनेवाजपुर, तिहुरा माझा, माझा रामपुर हलवारा, से होते हुए सरायरासी और राजेपुर मांझा के आसपास से होते जाने की बात सामने आई है। अब इसका कुछ भाग नगर निगम क्षेत्र में समाहित हो गया है।
इनसेट...
-तिलोदकी गंगा (तिलैया) के पुनरुद्धार के लिए जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के स्तर से राजस्व अभिलेखों से खोज कराई गई है। सर्वे का काम पूरा हो गया है। राजस्व अभिलेखों के मुताबिक यह नदी लगभग 47 किमी. लंबी है। अब इस पर कार्य कराए जाने की तैयारी है।
नागेंद्र मोहन राम त्रिपाठी
उपायुक्त मनरेगा, अयोध्या