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वसंत पंचमी पर सरयू स्नान को उमड़ेंगे भक्त, मठ-मंदिरों में होंगे धार्मिक आयोजन
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अयोध्या। मां सरस्वती देवी की पूजा-अर्चना का पर्व वसंत पंचमी विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के मध्य मंगलवार को मनाया जाएगा। इस बार वसंत पंचमी पर दुर्लभ योग बन रहा है। मंगलवार को पड़ने के कारण भी इस वर्ष वसंत पंचमी पर्व का महत्व और बढ़ गया है। इस पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरयू स्नान को उमड़ेंगे। मठ-मंदिरों में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा।
मान्यता है कि वसंत पंचमी के दिन ही देवी सरस्वती का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है। प्रत्येक साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस बार 16 फरवरी को वसंत पंचमी मनाई जाएगी। विद्वान मानते हैं कि विधिपूर्वक इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने से भक्तों को देवी मां की कृपा से बुद्धि और विद्या का वरदान प्राप्त होता है। इस दिन केवल घरों में ही नहीं, शिक्षण संस्थानों में भी मां सरस्वती की पूजा आयोजित की जाती है। ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल्यानंदन वर्धन बताते हैं कि इस बार वसंत पंचमी पर रवि योग और अमृत सिद्घि योग का संयोग बन रहा है। ये पर्व बसंत मौसम की शुरुआत का सूचक है। इसका अर्थ है कि इस दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत की जा सकती है।
पंडित कौशल्यानंदन ने पूजा विधि के बारे में बताया कि सुबह जल्दी उठकर नहा लें और पूजा घर की साफ-सफाई करें। फिर मां सरस्वती की पूजा करें और उन्हें पुष्प अर्पित करें। उनके मंत्रों का जाप करें। इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना बेहतर होगा। इस दिन पीला रंग का कुछ मीठा पकवान बनाएं। खासकर पीले चावल खाने को इस दिन उपयुक्त माना जाता है। इसके अलावा इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा करने का भी विधान है।
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तिथि व दिन - मंगलवार, 16 फरवरी 2021
पंचमी तिथि आरंभ - सुबह 3: 36 मिनट से
मध्याह्न काल - दोपहर 12:35 मिनट तक
सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त - सुबह 6:59 मिनट से दोपहर 12:35 मिनट तक
कुल अवधि- 5 घंटे 37 मिनट
पंचमी तिथि समाप्त- फरवरी 17 फरवरी को सुबह 5:46 पर
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मान्यता है कि वसंत पंचमी के दिन ही देवी सरस्वती का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है। प्रत्येक साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस बार 16 फरवरी को वसंत पंचमी मनाई जाएगी। विद्वान मानते हैं कि विधिपूर्वक इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने से भक्तों को देवी मां की कृपा से बुद्धि और विद्या का वरदान प्राप्त होता है। इस दिन केवल घरों में ही नहीं, शिक्षण संस्थानों में भी मां सरस्वती की पूजा आयोजित की जाती है। ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल्यानंदन वर्धन बताते हैं कि इस बार वसंत पंचमी पर रवि योग और अमृत सिद्घि योग का संयोग बन रहा है। ये पर्व बसंत मौसम की शुरुआत का सूचक है। इसका अर्थ है कि इस दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत की जा सकती है।
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पंडित कौशल्यानंदन ने पूजा विधि के बारे में बताया कि सुबह जल्दी उठकर नहा लें और पूजा घर की साफ-सफाई करें। फिर मां सरस्वती की पूजा करें और उन्हें पुष्प अर्पित करें। उनके मंत्रों का जाप करें। इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना बेहतर होगा। इस दिन पीला रंग का कुछ मीठा पकवान बनाएं। खासकर पीले चावल खाने को इस दिन उपयुक्त माना जाता है। इसके अलावा इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा करने का भी विधान है।
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तिथि व दिन - मंगलवार, 16 फरवरी 2021
पंचमी तिथि आरंभ - सुबह 3: 36 मिनट से
मध्याह्न काल - दोपहर 12:35 मिनट तक
सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त - सुबह 6:59 मिनट से दोपहर 12:35 मिनट तक
कुल अवधि- 5 घंटे 37 मिनट
पंचमी तिथि समाप्त- फरवरी 17 फरवरी को सुबह 5:46 पर