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रामतारक मंत्र के पुरोधा और महान संत थे रामानंदाचार्य : देवेंद्रप्रसादाचार्य
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1-अयोध्या-जगद्गुरू रामांनदाचार्य भगवान की जयंती पर मौजूद संत-महंत
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। रामानंद संप्रदाय के आदि प्रवर्तक जगदगुरु रामानंदाचार्य भगवान की जयंती रामनगरी में धूमधाम से मनाई गई। इसी क्रम में संकटमोचन सेना के तत्वावधान में भगवदाचार्य स्मारक सदन में जयंती समारोह का आयोजन किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए दशरथ महल बड़ास्थान के महंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य ने कहा कि स्वामी रामानंद को मध्यकालीन भक्ति आंदोलन का महान संत माना जाता है। उन्हें रामतारक मंत्र का पुरोधा कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में भक्ति का प्रचार-प्रसार करने का श्रेय स्वामी जी को ही जाता है। उन्होंने अभूतपूर्व सामाजिक क्रांति का श्रीगणेेश करके बड़ी जीवटता से समाज और संस्कृति की रक्षा की। ज.गु. रामदिनेशाचार्य ने कहा कि स्वामी रामानंदाचार्य को रामोपासना के इतिहास में एक युगप्रवर्तक आचार्य माना जाता है। उन्होंने बाह्य सदाचार की अपेक्षा साधना में आंतरिक भाव की शुद्धता पर जोर दिया। नवधा से परा और प्रेमा शक्ति को श्रेयस्कर बताया। स्वामी रामानंद के व्यक्तित्व की इस व्यापकता का रहस्य उनकी समन्वयकारी विचारधारा में निहित हैं।
जयंती महोत्सव के आयोजक संकट मोचन के सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास ने कहा कि रामानंदाचार्य भगवान ने रामभक्ति का प्रचार किया। उन्होंने भक्तिसाधना को नया आयाम दिया। संत रामभूषण दास कृपालु ने कहा कि वैष्णव भक्ति के महान संतों की श्रेष्ठ परंपरा मे रामानंदाचार्य भगवान का प्रादुर्भाव हुुआ है। उनके द्वारा स्थापित सिद्धांतों, परंपराओं के निर्वहन की प्रतिबद्धता संत समाज को दिखानी होगी। कार्यक्रम में महंत कमलादास रामायणी, महंत महेश दास, महंत छविरामदास, संत हेमंत दास, संत अभिषेक दास आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में भक्ति का प्रचार-प्रसार करने का श्रेय स्वामी जी को ही जाता है। उन्होंने अभूतपूर्व सामाजिक क्रांति का श्रीगणेेश करके बड़ी जीवटता से समाज और संस्कृति की रक्षा की। ज.गु. रामदिनेशाचार्य ने कहा कि स्वामी रामानंदाचार्य को रामोपासना के इतिहास में एक युगप्रवर्तक आचार्य माना जाता है। उन्होंने बाह्य सदाचार की अपेक्षा साधना में आंतरिक भाव की शुद्धता पर जोर दिया। नवधा से परा और प्रेमा शक्ति को श्रेयस्कर बताया। स्वामी रामानंद के व्यक्तित्व की इस व्यापकता का रहस्य उनकी समन्वयकारी विचारधारा में निहित हैं।
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जयंती महोत्सव के आयोजक संकट मोचन के सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास ने कहा कि रामानंदाचार्य भगवान ने रामभक्ति का प्रचार किया। उन्होंने भक्तिसाधना को नया आयाम दिया। संत रामभूषण दास कृपालु ने कहा कि वैष्णव भक्ति के महान संतों की श्रेष्ठ परंपरा मे रामानंदाचार्य भगवान का प्रादुर्भाव हुुआ है। उनके द्वारा स्थापित सिद्धांतों, परंपराओं के निर्वहन की प्रतिबद्धता संत समाज को दिखानी होगी। कार्यक्रम में महंत कमलादास रामायणी, महंत महेश दास, महंत छविरामदास, संत हेमंत दास, संत अभिषेक दास आदि मौजूद रहे।
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