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श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के धर्मयोद्धा थे अशोक सिंहल
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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के धर्मयोद्धा अशोक सिंहल की पांचवीं पुण्यतिथि पर रामनगरी में उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की गई। राममंदिर के शिलान्यास से लेकर कारसेवा और बाबरी विध्वंस में अशोक सिंहल जी अहम भूमिका में रहे। 1989 में अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास के बाद अशोक सिंहल ने कहा था, यह मात्र एक मंदिर का नहीं, हिंदू राष्ट्र का शिलान्यास है।
यह बातें विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय प्रबंध समिति के वरिष्ठ सदस्य पुरुषोत्तम नारायण सिंह ने कारसेवकपुरम में आयोजित पुण्यतिथि समारोह में मंगलवार को कही। कहा कि राम मंदिर के शिलान्यास के बाद अशोक सिंहल ने राम मंदिर आंदोलन को हिंदुओं के सम्मान से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई और देश भर में आंदोलन के लिए लोगों को एकजुट किया। वह 2011 तक विहिप के अध्यक्ष रहे और फिर स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने स्वत: अपने पद से मुक्ति ले ली था परंतु कार्यकर्ताओं के विशेष निवेदन पर वह आजीवन संत धर्माचार्यों से संपर्क और मंदिर निर्माण हेतु अयोध्या प्रवास करते रहे। 17 नवंबर 2015 को उनका निधन दिल्ली में हो गया।
विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय प्रबंध समिति के वरिष्ठ सदस्य पुरुषोत्तम नारायण सिंह ने कहा श्री सिंहल श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के मेरुदंड थे। राममंदिर आंदोलन चलाने के लिए जनसमर्थन जुटाने में विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक स्व सिंहल की अहम भूमिका रही। वह ऐसे धर्मरक्षक थे जिन्होंने जन-जन को एक सूत्र में पिरो दिया।
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अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष और केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के सदस्य महंत कन्हैया दास ने कहा साकेतवासी अशोक जी का जन्म ही हिंदुत्व को उच्चशिखर पर स्थापित करने और मंदिर निर्माण हेतु हुआ था। महामंडलेश्वर प्रेम शंकर दास ने अशोक सिंहल को श्रीराम योद्धा बताते हुए कहा कि जिनकी वाणी पर लाखों नवयुवक रक्त देने को तत्पर हो उठते थे। वह अब नही है परंतु वह आज भी राम जन्मभूमि निर्माण के संकल्प की सिद्धि में जीवित हैं।
इनसेट
सिंहल ने पूरे देश में किया राममंदिर आंदोलन का विस्तार
विहिप मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने स्व अशोक सिंहल के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा अशोक जी का जन्म 15 सितंबर 1926 में हुआ और पढ़ाई के दौरान वह संघ के संपर्क में आए और फिर प्रचारक बन गए। उन्हें वर्ष 1981 में विश्व हिंदू परिषद में भेज दिया गया और देश में हिंदुत्व की भावना को फिर से मजबूत करने के लिए 1984 में धर्मसंसद के आयोजन में अशोक सिंहल ने मुख्य भूमिका निभाई। इसी धर्म संसद में साधु-संतों की बैठक के बाद राम जन्मभूमि आंदोलन की नींव पड़ी थी और उन्होंने इसका विस्तार पूरे देश में किया। आज भी वह हम जैसे लाखों कार्यकर्ताओं के हृदय मे विराजमान हैं। आज उनके संकल्प की पूर्णता भव्य मंदिर से हो रही है।
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यह बातें विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय प्रबंध समिति के वरिष्ठ सदस्य पुरुषोत्तम नारायण सिंह ने कारसेवकपुरम में आयोजित पुण्यतिथि समारोह में मंगलवार को कही। कहा कि राम मंदिर के शिलान्यास के बाद अशोक सिंहल ने राम मंदिर आंदोलन को हिंदुओं के सम्मान से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई और देश भर में आंदोलन के लिए लोगों को एकजुट किया। वह 2011 तक विहिप के अध्यक्ष रहे और फिर स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने स्वत: अपने पद से मुक्ति ले ली था परंतु कार्यकर्ताओं के विशेष निवेदन पर वह आजीवन संत धर्माचार्यों से संपर्क और मंदिर निर्माण हेतु अयोध्या प्रवास करते रहे। 17 नवंबर 2015 को उनका निधन दिल्ली में हो गया।
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विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय प्रबंध समिति के वरिष्ठ सदस्य पुरुषोत्तम नारायण सिंह ने कहा श्री सिंहल श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के मेरुदंड थे। राममंदिर आंदोलन चलाने के लिए जनसमर्थन जुटाने में विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक स्व सिंहल की अहम भूमिका रही। वह ऐसे धर्मरक्षक थे जिन्होंने जन-जन को एक सूत्र में पिरो दिया।
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अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष और केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के सदस्य महंत कन्हैया दास ने कहा साकेतवासी अशोक जी का जन्म ही हिंदुत्व को उच्चशिखर पर स्थापित करने और मंदिर निर्माण हेतु हुआ था। महामंडलेश्वर प्रेम शंकर दास ने अशोक सिंहल को श्रीराम योद्धा बताते हुए कहा कि जिनकी वाणी पर लाखों नवयुवक रक्त देने को तत्पर हो उठते थे। वह अब नही है परंतु वह आज भी राम जन्मभूमि निर्माण के संकल्प की सिद्धि में जीवित हैं।
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सिंहल ने पूरे देश में किया राममंदिर आंदोलन का विस्तार
विहिप मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने स्व अशोक सिंहल के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा अशोक जी का जन्म 15 सितंबर 1926 में हुआ और पढ़ाई के दौरान वह संघ के संपर्क में आए और फिर प्रचारक बन गए। उन्हें वर्ष 1981 में विश्व हिंदू परिषद में भेज दिया गया और देश में हिंदुत्व की भावना को फिर से मजबूत करने के लिए 1984 में धर्मसंसद के आयोजन में अशोक सिंहल ने मुख्य भूमिका निभाई। इसी धर्म संसद में साधु-संतों की बैठक के बाद राम जन्मभूमि आंदोलन की नींव पड़ी थी और उन्होंने इसका विस्तार पूरे देश में किया। आज भी वह हम जैसे लाखों कार्यकर्ताओं के हृदय मे विराजमान हैं। आज उनके संकल्प की पूर्णता भव्य मंदिर से हो रही है।