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दीप जलाने को अवध विवि ने मांगा 1.70 करोड़
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अयोध्या। रामनगरी में पांचवें दिव्य दीपोत्सव में दीपों को खरीदने से लेकर जलाने तक की प्रक्रिया में 1.70 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके लिए अवध विश्वविद्यालय प्रशासन ने शासन से धनराशि के आवंटन के लिए पत्र लिखा है।
साथ ही दीपों की आपूर्ति के लिए बुधवार तक किसी भी संस्था ने टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं लिया है। विवि प्रशासन ने देर शाम को दीपों की आपूर्ति के लिए टेंडर की तिथि 18 अक्तूबर तक बढ़ा दी है।
इस बार नौ लाख दीपों को खरीदा जाना है। साथ ही 30 घाटों तक दीपोत्सव का विस्तार होने से स्वयं सेवियों की संख्या पिछले वर्ष की अपेक्षा तीन हजार बढ़ी है।
रामनगरी में प्रादेशिक मेले के रूप में वर्ष 2017 से दीपोत्सव का आयोजन छोटी दीपावली के दिन हो रहा है। कोरोना काल में दीपोत्सव का कार्यक्रम आयोजित हुआ लेकिन आमजन की भागेदारी दीपोत्सव में नहीं हो सकी।
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इस वर्ष शासन के निर्देश पर दीपोत्सव को पिछले चार से अधिक दिव्य व भव्य मनाया जाना है। इसके लिए तैयारियां तेजी से चल रही है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष दीप को खरीदने से लेकर जलाने तक का जिम्मा अवध विवि प्रशासन को सौंपा जाता है।
विवि प्रशासन ने समस्त घाटों की थीम को तैयार कर लिया है। साथ ही स्वयं सेवियों की नियुक्ति शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही दीपों की आपूर्ति के एक सप्ताह पूर्व टेंडर आमंत्रित किया। तेल व बाती भी खरीदे जाने की तैयारी चल रही है।
पिछले वर्ष की अपेेेक्षा इस वर्ष कार्यक्रम बड़ा होने से खर्च में भी इजाफा होना तय है। इस बार 7.50 लाख दीप एक साथ जलाने का रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि दीपों की सप्लाई नौ लाख होनी है।
इसके साथ घाटों की संख्या भी 24 से बढ़कर 30 हो गई है। साथ ही घाटों व दीपों के बढ़ जाने से स्वयं सेवियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। इस बार 12 हजार स्वयंसेवी लगाए जाने हैं। इस सबके दृष्टिगत खर्चे के ग्राफ में भी इजाफा हुआ है।
विवि प्रशासन ने शासन को दीप जलाने, दीप, तल व बाती को खरीदने, स्वयं सेवियों के भोजन समेत समस्त खर्चों के 1.70 करोड़ रुपये मांगे हैं। इसके साथ विवि प्रशासन ने सात दिन पहले दीपों की आपूर्ति के लिए ऑनलाइन टेंडर आमंत्रित किया था।
लेकिन बुधवार तक किसी भी संस्था ने टेंडर नहीं डाला है। अब विवि प्रशासन ने टेंडर की तिथि बढ़ाकर 18 अक्तूबर कर दी है। टेंडर फाइनल होने के बाद ही दीपों की खरीद का कार्य शुरू होगा।
पर्यटन मंत्री नीलकंठ तिवारी के निर्देश पर अवध विवि प्रशासन ने समस्त स्वंयसेवियों को एक जैसी ड्रेेस दिए जाने का निर्णय लिया है। इस बार स्वयंसेवी लाल रंग की टीशर्ट व कैप में नजर आएंगे। स्वयंसेवियों को विवि प्रशासन ड्रेस उपलब्ध कराएगा।
पांचवें दिव्य दीपोत्सव में गो सेवा समिति ने एक लाख गोबर के दीप दिए जाने का प्रस्ताव नगर निगम को दिया है। नगर निगम ने इस प्रस्ताव को जिला प्रशासन व विवि प्रशासन को भेज दिया है।
अपर नगर आयुक्त शशि भूषण राय ने बताया है कि गोबर के दीपों के लिए प्रस्ताव मिला था। दीप संबंधी समस्त कार्य विवि प्रशासन करता है, इसलिए प्रस्ताव को विवि प्रशासन व जिला प्रशासन के पास भेज दिया गया है।
पांचवें दिव्य दीपोत्सव में दीप संबंधी समस्त कार्यों में खर्च का आंकलन कर शासन को भेज दिया गया है। इस बार दीप संबंधी समस्त कार्य में कुल खर्च 1.70 करोड़ रुपये अनुमानित है। साथ ही दीपों की सप्लाई संबंधी टेंडर की तिथि बढ़ा दी गई है। अब 18 अक्तूबर तक दीपों के लिए टेंडर डाले जा सकते हैं।- आरके सिंह, सहायक अभियंता
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साथ ही दीपों की आपूर्ति के लिए बुधवार तक किसी भी संस्था ने टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं लिया है। विवि प्रशासन ने देर शाम को दीपों की आपूर्ति के लिए टेंडर की तिथि 18 अक्तूबर तक बढ़ा दी है।
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इस बार नौ लाख दीपों को खरीदा जाना है। साथ ही 30 घाटों तक दीपोत्सव का विस्तार होने से स्वयं सेवियों की संख्या पिछले वर्ष की अपेक्षा तीन हजार बढ़ी है।
रामनगरी में प्रादेशिक मेले के रूप में वर्ष 2017 से दीपोत्सव का आयोजन छोटी दीपावली के दिन हो रहा है। कोरोना काल में दीपोत्सव का कार्यक्रम आयोजित हुआ लेकिन आमजन की भागेदारी दीपोत्सव में नहीं हो सकी।
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इस वर्ष शासन के निर्देश पर दीपोत्सव को पिछले चार से अधिक दिव्य व भव्य मनाया जाना है। इसके लिए तैयारियां तेजी से चल रही है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष दीप को खरीदने से लेकर जलाने तक का जिम्मा अवध विवि प्रशासन को सौंपा जाता है।
विवि प्रशासन ने समस्त घाटों की थीम को तैयार कर लिया है। साथ ही स्वयं सेवियों की नियुक्ति शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही दीपों की आपूर्ति के एक सप्ताह पूर्व टेंडर आमंत्रित किया। तेल व बाती भी खरीदे जाने की तैयारी चल रही है।
पिछले वर्ष की अपेेेक्षा इस वर्ष कार्यक्रम बड़ा होने से खर्च में भी इजाफा होना तय है। इस बार 7.50 लाख दीप एक साथ जलाने का रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि दीपों की सप्लाई नौ लाख होनी है।
इसके साथ घाटों की संख्या भी 24 से बढ़कर 30 हो गई है। साथ ही घाटों व दीपों के बढ़ जाने से स्वयं सेवियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। इस बार 12 हजार स्वयंसेवी लगाए जाने हैं। इस सबके दृष्टिगत खर्चे के ग्राफ में भी इजाफा हुआ है।
विवि प्रशासन ने शासन को दीप जलाने, दीप, तल व बाती को खरीदने, स्वयं सेवियों के भोजन समेत समस्त खर्चों के 1.70 करोड़ रुपये मांगे हैं। इसके साथ विवि प्रशासन ने सात दिन पहले दीपों की आपूर्ति के लिए ऑनलाइन टेंडर आमंत्रित किया था।
लेकिन बुधवार तक किसी भी संस्था ने टेंडर नहीं डाला है। अब विवि प्रशासन ने टेंडर की तिथि बढ़ाकर 18 अक्तूबर कर दी है। टेंडर फाइनल होने के बाद ही दीपों की खरीद का कार्य शुरू होगा।
पर्यटन मंत्री नीलकंठ तिवारी के निर्देश पर अवध विवि प्रशासन ने समस्त स्वंयसेवियों को एक जैसी ड्रेेस दिए जाने का निर्णय लिया है। इस बार स्वयंसेवी लाल रंग की टीशर्ट व कैप में नजर आएंगे। स्वयंसेवियों को विवि प्रशासन ड्रेस उपलब्ध कराएगा।
पांचवें दिव्य दीपोत्सव में गो सेवा समिति ने एक लाख गोबर के दीप दिए जाने का प्रस्ताव नगर निगम को दिया है। नगर निगम ने इस प्रस्ताव को जिला प्रशासन व विवि प्रशासन को भेज दिया है।
अपर नगर आयुक्त शशि भूषण राय ने बताया है कि गोबर के दीपों के लिए प्रस्ताव मिला था। दीप संबंधी समस्त कार्य विवि प्रशासन करता है, इसलिए प्रस्ताव को विवि प्रशासन व जिला प्रशासन के पास भेज दिया गया है।
पांचवें दिव्य दीपोत्सव में दीप संबंधी समस्त कार्यों में खर्च का आंकलन कर शासन को भेज दिया गया है। इस बार दीप संबंधी समस्त कार्य में कुल खर्च 1.70 करोड़ रुपये अनुमानित है। साथ ही दीपों की सप्लाई संबंधी टेंडर की तिथि बढ़ा दी गई है। अब 18 अक्तूबर तक दीपों के लिए टेंडर डाले जा सकते हैं।- आरके सिंह, सहायक अभियंता