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एंबुलेंस सेवा ठप
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अयोध्या। सेवा प्रदाता एजेंसी द्वारा नियम विरुद्ध कार्य लेने व शोषण किए जाने से नाराज एंबुलेंस चालकों की हड़ताल से सोमवार को 108, 102 एंबुलेंस सेवा ठप होने से जिले में हाहाकार मच गया। गंभीर रूप से बीमार व परेशान हाल लोगों को अनेक समस्याओं से जूझना पड़ा। काफी देर तक मगजमारी के बावजूद हड़ताल की जानकारी होने पर लोग निजी व्यवस्था करके किसी तरह अस्पताल पहुंचे। समय पर इलाज न मिलने से लोगों की समस्याएं और बढ़ी।
जीवीकेईएमआरआई 108 सेवा प्रदाता कंपनी के अधीन जिले में करीब 62 एंबुलेंस संचालित हैं, इनमें करीब 35 एंबुलेंस 102 व 27, 108 हैं।
सेवा प्रदाता कंपनी पर कर्मचारियों का उत्पीड़न व नियम विरुद्ध कार्य कराने का आरोप लगाते हुए जीवनदायी स्वास्थ्य विभाग 108, 102 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के आह्वान पर सोमवार को सभी एंबुलेंस चालकों ने हड़ताल कर दिया और एक साथ एकत्र होकर मेडिकल कॉलेज दर्शननगर में सभी वाहनों को खड़ा कर दिया।
एकाएक हड़ताल की वजह से जिले की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं। गंभीर समस्या से ग्रसित लोगों ने जब 102 व 108 नंबर पर कॉल किया तो घंटों मशक्कत के बाद हड़ताल की जानकारी हुई। इसके बाद लोग निजी व्यवस्था करने में जुटे।
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कोई बाइक से तो कोई ठेला, रिक्शा, निजी एंबुलेंस, टैक्सी एवं अन्य साधनों से अस्पताल पहुंचा। साधन के इंतजाम में देरी की वजह से लोगों की समस्या कई गुना बढ़ रही थी। हड़ताल की वजह से बीमार व परेशान लोगों को और परेशानी झेलना पड़ा। चालकों ने समस्या का निस्तारण न होने तक हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया है।
जीवनदायनी स्वास्थ्य विभाग 108, 102 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष जितेंद्र पांडेय ने बताया कि हम सभी सेवा प्रदाता कंपनी जीवीकेईएमआरआई के अधीन कार्य करते हैं। उक्त फर्म 12 घंटे की ड्यूटी ले रही है और वेतन आठ घंटे का दे रही है, चार घंटे का ओवरटाइम दिलाया जाय। बताया कि दो माह से वेतन नहीं मिला है, जिससे परिवार के कगार पर पहुंच गया है।
प्रत्येक माह की एक से सात तारीख तक वेतन दिलाया जाय। सरकार द्वारा निर्धारित अवकाश भी नहीं मिलते हैं और कोई अतिरिक्त वेतन भी नहीं दिया जाता है, जिसे दिलाया जाय। कहा कि कंपनी द्वारा प्रत्येक माह की नौ तारीख को फर्जी केस करने का दबाव बनाया जाता है। साथ ही सामान्य दिनों में 15 केस निपटाने को बाध्य किया जाता है। ऐसा न करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है।
बताया कि अब कंपनी ने कर्मचारियों का मासिक वेतन बंद करके 108 पर सौ रुपए प्रति मरीज व 102 पर 60 रुपए प्रति मरीज देने को कहा जा रहा है और जबरदस्ती स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर कराया जा रहा है, जो श्रम कानून का उल्लंघन है। बताया कि यदि इन मांगों को पूरा नहीं किया गया तो हड़ताल जारी रहेगी। इस मौके पर विश्वजीत, सुजीत कुमार गौड़, अखिलेश, अरविंद पांडेय, रामकुमार, सर्वेश कुमार, वीरेंद्र कुमार, सचिन तिवारी आदि मौजूद रहे।
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जीवीकेईएमआरआई 108 सेवा प्रदाता कंपनी के अधीन जिले में करीब 62 एंबुलेंस संचालित हैं, इनमें करीब 35 एंबुलेंस 102 व 27, 108 हैं।
सेवा प्रदाता कंपनी पर कर्मचारियों का उत्पीड़न व नियम विरुद्ध कार्य कराने का आरोप लगाते हुए जीवनदायी स्वास्थ्य विभाग 108, 102 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के आह्वान पर सोमवार को सभी एंबुलेंस चालकों ने हड़ताल कर दिया और एक साथ एकत्र होकर मेडिकल कॉलेज दर्शननगर में सभी वाहनों को खड़ा कर दिया।
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एकाएक हड़ताल की वजह से जिले की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं। गंभीर समस्या से ग्रसित लोगों ने जब 102 व 108 नंबर पर कॉल किया तो घंटों मशक्कत के बाद हड़ताल की जानकारी हुई। इसके बाद लोग निजी व्यवस्था करने में जुटे।
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कोई बाइक से तो कोई ठेला, रिक्शा, निजी एंबुलेंस, टैक्सी एवं अन्य साधनों से अस्पताल पहुंचा। साधन के इंतजाम में देरी की वजह से लोगों की समस्या कई गुना बढ़ रही थी। हड़ताल की वजह से बीमार व परेशान लोगों को और परेशानी झेलना पड़ा। चालकों ने समस्या का निस्तारण न होने तक हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया है।
जीवनदायनी स्वास्थ्य विभाग 108, 102 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष जितेंद्र पांडेय ने बताया कि हम सभी सेवा प्रदाता कंपनी जीवीकेईएमआरआई के अधीन कार्य करते हैं। उक्त फर्म 12 घंटे की ड्यूटी ले रही है और वेतन आठ घंटे का दे रही है, चार घंटे का ओवरटाइम दिलाया जाय। बताया कि दो माह से वेतन नहीं मिला है, जिससे परिवार के कगार पर पहुंच गया है।
प्रत्येक माह की एक से सात तारीख तक वेतन दिलाया जाय। सरकार द्वारा निर्धारित अवकाश भी नहीं मिलते हैं और कोई अतिरिक्त वेतन भी नहीं दिया जाता है, जिसे दिलाया जाय। कहा कि कंपनी द्वारा प्रत्येक माह की नौ तारीख को फर्जी केस करने का दबाव बनाया जाता है। साथ ही सामान्य दिनों में 15 केस निपटाने को बाध्य किया जाता है। ऐसा न करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है।
बताया कि अब कंपनी ने कर्मचारियों का मासिक वेतन बंद करके 108 पर सौ रुपए प्रति मरीज व 102 पर 60 रुपए प्रति मरीज देने को कहा जा रहा है और जबरदस्ती स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर कराया जा रहा है, जो श्रम कानून का उल्लंघन है। बताया कि यदि इन मांगों को पूरा नहीं किया गया तो हड़ताल जारी रहेगी। इस मौके पर विश्वजीत, सुजीत कुमार गौड़, अखिलेश, अरविंद पांडेय, रामकुमार, सर्वेश कुमार, वीरेंद्र कुमार, सचिन तिवारी आदि मौजूद रहे।