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सड़क-स्कूल संग 500 मकान, रिकॉर्ड में कृषि भूमि, कैसे मिले मुआवजा

Thu, 30 Jan 2020 10:51 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jan 2020 10:51 PM IST
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माझा बरेहटा में विद्यालय भी बना है फिर भी मौके पर कृषि भूमि दर्ज है। - फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। विश्व की सबसे ऊंची श्रीराम की प्रतिमा बनाने के लिए हाईवे से सटे ग्राम सभा माझा-बरहटा के 86 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण में दो राजस्व गांवों का अस्तित्व ही गायब है। मौके पर करीब पांच सौ मकान समेत प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूल है।
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सरकार के पैसे से सड़क-नाली, खड़ंजा, हैंडपंप, शौचालय आदि बने हैं। मगर राजस्व रिकार्ड की गड़बड़ी व खसरा तक दुरुस्त नहीं किए जाने से ग्रामीणों के उजड़ने की कोई कीमत नहीं मिल सकती। संपूर्ण गांव की आबादी दशकों बाद भी महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट की कृषि भूमि दर्ज है।
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रामनगरी अयोध्या से सटा यह गांव हाल ही में नगर निगम का हिस्सा शासन ने घोषित कर दिया है, जिसके मुताबिक नए वार्डों के परिसीमन का सर्वे होना है। गांव के लोग श्रीराम के अनन्य भक्त हैं और विशाल प्रतिमा बनने की योजना से बेहद खुश भी है, लेकिन अधिग्रहण के नोटिफिकेशन ने इनके अस्तत्वि पर ही सवाल खड़ा कर दिया है।
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गुरुवार को भी माझा बरहटा ग्राम सभा के राजस्व गांव नेउ का पुरवा व धरमू का पुरवा में राजस्व टीमें अधिग्रहण के मुताबिक सीमांकन कार्य में डटी थीं। जिनके घर सीमांकन के दायरे में आ रहे हैं, उनके यहां कोहराम के हालात हैं। राजस्व कर्मी साफ कह रहे हैं कि आपका नाम रिकार्ड में कहीं दर्ज नहीं है, सब खेती की जमीन का गाटा नंबर है, जो महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट के नाम दर्ज है।
श्रीराम की विशाल मूर्ति स्थापना के लिए भू-अधिग्रहण की नोटिफिकेशन से जो सच्चाई सामने आई है वह चौंकाने वाली है। ग्राम सभा के राजस्व गांव नेउ का पुरवा व धरमू का पुरवा ऐसा अनोखा गांव है, जहां लोगों के पक्के-कच्चे मकान बने, ट्रैक्टर हैं, कई परिवार सरकारी नौकरी में भी है।
हर मकान का नंबर एलाट है, वोटर लिस्ट में नाम है, आधार कार्ड है। थोड़ी दूर पर उनके नाम पीढ़ियों से चली आ रही खेती की जमीन का रिकार्ड भी है, मगर उनके पास अपने घरों का मालिकाना हक नहीं है।
वे कहते हैं कि श्रीराम की मूर्ति बनाने में वे अपने घर को भी कुर्बान कर सकते हैं, मगर पहले रिकार्ड दुरुस्त हो, जिससे उनकी आबादी की मिल्कियत दर्ज हो, ताकि नियमानुसार उन्हें इतना मुआवजा मिले कि कहीं बसने में कोई दिक्कत न आए।
ग्रामीण कहते हैं कि हाईवे बनने में तमाम लोगों के घर-दुकान तोड़े गए, लेकिन कोई विरोध इसलिए नहीं करता कि पर्याप्त मुआवजा मिल जाता है, उसी अनुरूप उन्हें भी मुआवजा मिले। उनका कहना है कि 1952 से आज तक कई बार मांग किए जाने के बाद भी चकबंदी प्रक्रिया नहीं की गई। खसरा में भी साल में दो बार भूमि की मौजूदा स्थिति दर्ज होनी चाहिए, मगर वहां भी दर्ज नहीं हुआ। जिसका खामियाजा रह रहे करीब पांच सौ परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
सर्वे और चकबंदी की प्रक्रिया नहीं होने के कारण मांझा बरहटा गांव की आबादी नहीं दर्ज हो पायी है। यहां दशकों से लोग मकान बनाकर रह रहे हैं, उनकी जमीनें भी हैं वे खेती भी करते हैं। उक्त मामले को जिलाधिकारी के संज्ञान में लाया गया है, उन्हीं के स्तर से आगे का निर्णय होना है।
केडी शर्मा, आरएम अयोध्या
माझा बरहटा गांव में आज तक चकबंदी नहीं हुई। अब यह गांव नगर निगम में शामिल होने के कारण चकबंदी हो भी नहीं सकती है।
तरुण कुमार, चकबंदी अधिकारी
मुआवजा उन्हें ही मिलेगा जिनके नाम भूमि है। इसका पूरा विवरण जमीन अधिग्रहण के लिए जारी किए गए नोटिफिकेशन में डीएम की ओर से किया गया हेै। लोगों से 15 दिनों के भीतर 10 फरवरी तक आपत्ति मांगी गई है। इसके बाद भूमि अधिग्रहण की जाएगी।

आरपी यादव, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी
माझा बरहटा के कुल 259 भू खंडों के 85.977 हेक्टेयर का अधिग्रहण अयोध्या में पर्यटन विकास एवं सौंदर्यीकरण के तहत भगवान श्रीराम पर आधारित डिजिटल म्यूजियम इंटरप्रेटेशन सेंटर, लाइब्रेरी, पार्किंग, फूड प्लाजा, लैंड स्केपिंग समेत श्रीराम की प्रतिमा व अन्य पर्यटक सुविधाओं के लिए किया जाना है। जिन घरों का जिक्र हो रहा है, उसमें सिर्फ 50 घर की आ रहे हैं। आपत्ति आने के साथ नियमानुसार निष्पादन होगा।
अनुज कुमार झा, जिलाधिकारी अयोध्या
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