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इच्क्ष्वाकु वंश की स्मृतियां सहेजने को हटेगी सड़क
Faizabad
Updated Mon, 30 Jun 2014 05:31 AM IST
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फैजाबाद। भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या इक्ष्वाकु वंश की राजधानी रही है। अब यहां एक बड़े भूभाग पर राजा रघु-दिलीप से लेकर राम और आगे की पीढ़ी के राजाओं के जीवन चरित्र, इतिहास व समाज में उनके योगदान को संरक्षित करने के लिए उदासीन अखाड़े ने प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा था। जिसके तहत रानोपाली से मणिपर्वत, विद्याकुंड व सीताकुंड जाने वाली पीडब्ल्यूडी की सड़क हटाकर बाधा दूर करने की पहल शुरू हो गई है। नई सड़क अखाड़े की ही भूमि पर लेकिन रेलवे लाइन के किनारे बनाने का प्रस्ताव होगा। हालांकि इसे लेकर आगे कोल साइडिंग व कुछ लोगों के मकान आड़े आ सकते हैं। कमिश्नर की अध्यक्षता में डीएम समेत पीडब्ल्यूडी व राजस्व के प्रमुख सचिव के प्रतिनिधियों की हाई प्रोफाइल टीम 30 जून को मौके पर मुआयना कर निर्णय कर सकती है।
अयोध्या में उदासीन अखाड़ा के पास काफी भूमि है, मठ का भव्य द्वार व अंदर मंदिर आदि की सुंदरता वर्षों से पर्यटकों व भक्तों को लुभाती रही है। महंत बाबा कल्याण दास आमतौर पर ज्यादातर अमर कंटक में रहते हैं, लेकिन शासन से सड़क हटाने की मिली हरी झंडी के बाद यहां आए हुए हैं। मठ संचालन का कार्य अद्वैत मुनि उर्फ गोपालदास के जिम्मे रहता है, जबकि प्रबंधन ओपी सिंह संभालते हैं। सिंह बताते हैं कि बाबा ने डीएम के समक्ष इच्छा प्रकट की थी कि वे इक्ष्वाकु वंश के जितने भी राजा हुए राजा रघु, दिलीप से लेकर राम व उनके बाद तक के सभी राजाओं के जीवन चरित्र सहेजने के लिए बड़ा केंद्र बनाना चाहते हैं, ताकि भक्त व पर्यटक समाज में उनके योगदान को जान सकें। इसके लिए जरूरी है कि सड़क के दूसरे तरफ की भूमि को परिसर में मिलाया जाए, ताकि एक चहारदीवारी में अखाड़ा की भूमि समाहित हो जाए। नई सड़क को परिसर के एक किनारे रेल लाइन के पास बनाने की मांग की गई थी, जो भूमि रेलवे के गाड़े गए पत्थरों के बाद अखाड़ा की है। बताया कि पहले भी सड़क अखाड़ा की भूमि में बनीं थी।
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अयोध्या में उदासीन अखाड़ा के पास काफी भूमि है, मठ का भव्य द्वार व अंदर मंदिर आदि की सुंदरता वर्षों से पर्यटकों व भक्तों को लुभाती रही है। महंत बाबा कल्याण दास आमतौर पर ज्यादातर अमर कंटक में रहते हैं, लेकिन शासन से सड़क हटाने की मिली हरी झंडी के बाद यहां आए हुए हैं। मठ संचालन का कार्य अद्वैत मुनि उर्फ गोपालदास के जिम्मे रहता है, जबकि प्रबंधन ओपी सिंह संभालते हैं। सिंह बताते हैं कि बाबा ने डीएम के समक्ष इच्छा प्रकट की थी कि वे इक्ष्वाकु वंश के जितने भी राजा हुए राजा रघु, दिलीप से लेकर राम व उनके बाद तक के सभी राजाओं के जीवन चरित्र सहेजने के लिए बड़ा केंद्र बनाना चाहते हैं, ताकि भक्त व पर्यटक समाज में उनके योगदान को जान सकें। इसके लिए जरूरी है कि सड़क के दूसरे तरफ की भूमि को परिसर में मिलाया जाए, ताकि एक चहारदीवारी में अखाड़ा की भूमि समाहित हो जाए। नई सड़क को परिसर के एक किनारे रेल लाइन के पास बनाने की मांग की गई थी, जो भूमि रेलवे के गाड़े गए पत्थरों के बाद अखाड़ा की है। बताया कि पहले भी सड़क अखाड़ा की भूमि में बनीं थी।
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