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साकेत महाविद्यालय में हटाए गए 22 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी
Updated Thu, 08 Mar 2018 01:16 AM IST
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साकेत महाविद्यालय में हटाए गए 22 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी
अयोध्या। साकेत महाविद्यालय में 22 दैनिक कर्मचारियों को हटा दिया गया है। महाविद्यालय प्रबंध समिति के इस निर्णय के बाद कॉलेज में हड़कंप मच गया। कॉलेज प्रबंधन ने इस निर्णय के पीछे महाविद्यालय की निरंतर घटती छात्र संख्या व संसाधनों की कमी को कारण बताया है। जबकि हटाए गए कर्मचारियों ने इस निर्णय को मनमाना करार दिया है।
जानकारी के मुताबिक महाविद्यालय के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी स्थाई किए जाने व न्यूनतम वेतन दिए जाने को लेकर विगत कई वर्षों से मांग कर रहे हैं। साकेत महाविद्यालय से निकाले गए 22 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने समिति के इस निर्णय को कर्मचारी हित विरोधी और मनमाना करार दिया है। कॉलेज में वर्ष 1996 से कार्यरत निकाले गए कर्मचारी देवीशंकर ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन से हमारा वेतनमान बढ़ाने को लेकर श्रम न्यायालय में मुकदमा चल रहा है। आरोप है कि महाविद्यालय प्रशासन द्वारा कोई वाद न दायर करने तथा मुकदमा वापस लेने समेत कई अन्य शर्तों वाले समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। जिन कर्मचारियों ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किया, उन्हें मनमाने तरीके से निकाल दिया गया है। कर्मचारी संजय पांडेय, भाष्कर पांडेय, सुरेश कुमार ने भी समझौता पत्र पर हस्ताक्षर न करने पर निकाले जाने की बात कही। कर्मचारियों ने कहा कि इस निर्णय के खिलाफ पीड़ित कर्मचारी उच्च न्यायालय की शरण लेंगे।
इन कर्मचारियों को दिखाया बाहर का रास्ता
प्रबंध समिति की बैठक के बाद महाविद्यालय प्रशासन ने 19 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एवं 03 तृतीय श्रेणी कर्मचारी समेत कुल 22 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इनमें से कई कर्मचारी दशकों से महाविद्यालय में कार्यरत हैं। निकाले गए कर्मचारियों में संजय कुमार पांडेय, सिकंदर वर्मा, सूर्यप्रकाश मिश्र, रामधीरज यादव, रामसंजीवन यादव, शिवप्रकाश यादव, सुरेश कुमार, नीरज पाठक, राम विलास मौर्या, रवींद्र कुमार यादव, मो. जमील, अभिमन्यु निषाद, भाष्कर पांडेय, राजितराम यादव, सूर्यभान, अखंड कुमार, देवीशंकर, छेदी प्रसाद, प्रशांत, रामकिशन, उमाश्ंाकर, दुर्गेश कुमार शामिल हैं।
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प्रबंध समिति के निर्णय का कराया अनुपालन : प्राचार्य
22 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवा समाप्त किए जाने के मामले के पीछे प्राचार्य डॉ. अजय मोहन श्रीवास्तव ने 26 फरवरी की प्रबंध समिति की बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय को कारण बताया है। प्राचार्य के अनुसार यह प्रकरण पुराना है। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने अपने स्थायीकरण की मांग को लेकर पूर्व में न्यायालय में अपील की थी। इसके अलावा श्रम न्यायालय में भी यह मामला विचाराधीन है। बताया कि छात्र-छात्राओं की संख्या प्रतिवर्ष घटती जा रही है। इससे संस्था की आय व संसाधनों में कमी आई है। महाविद्यालय में शिक्षण व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की संख्या लगभग 423 है। इसके अलावा डेली वेजर की संख्या 59 है, जो क्षमता से अधिक हैं। महाविद्यालय में कई डेली वेजर के लिए कोई कार्य नहीं है। इसलिए सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कुल 22 कर्मचारियों की संविदा समाप्त किया जाए। कहा कि निकाले गये कर्मचारियों को भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर फिर वापस लिया जा सकता है।
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अयोध्या। साकेत महाविद्यालय में 22 दैनिक कर्मचारियों को हटा दिया गया है। महाविद्यालय प्रबंध समिति के इस निर्णय के बाद कॉलेज में हड़कंप मच गया। कॉलेज प्रबंधन ने इस निर्णय के पीछे महाविद्यालय की निरंतर घटती छात्र संख्या व संसाधनों की कमी को कारण बताया है। जबकि हटाए गए कर्मचारियों ने इस निर्णय को मनमाना करार दिया है।
जानकारी के मुताबिक महाविद्यालय के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी स्थाई किए जाने व न्यूनतम वेतन दिए जाने को लेकर विगत कई वर्षों से मांग कर रहे हैं। साकेत महाविद्यालय से निकाले गए 22 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने समिति के इस निर्णय को कर्मचारी हित विरोधी और मनमाना करार दिया है। कॉलेज में वर्ष 1996 से कार्यरत निकाले गए कर्मचारी देवीशंकर ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन से हमारा वेतनमान बढ़ाने को लेकर श्रम न्यायालय में मुकदमा चल रहा है। आरोप है कि महाविद्यालय प्रशासन द्वारा कोई वाद न दायर करने तथा मुकदमा वापस लेने समेत कई अन्य शर्तों वाले समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। जिन कर्मचारियों ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किया, उन्हें मनमाने तरीके से निकाल दिया गया है। कर्मचारी संजय पांडेय, भाष्कर पांडेय, सुरेश कुमार ने भी समझौता पत्र पर हस्ताक्षर न करने पर निकाले जाने की बात कही। कर्मचारियों ने कहा कि इस निर्णय के खिलाफ पीड़ित कर्मचारी उच्च न्यायालय की शरण लेंगे।
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इन कर्मचारियों को दिखाया बाहर का रास्ता
प्रबंध समिति की बैठक के बाद महाविद्यालय प्रशासन ने 19 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एवं 03 तृतीय श्रेणी कर्मचारी समेत कुल 22 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इनमें से कई कर्मचारी दशकों से महाविद्यालय में कार्यरत हैं। निकाले गए कर्मचारियों में संजय कुमार पांडेय, सिकंदर वर्मा, सूर्यप्रकाश मिश्र, रामधीरज यादव, रामसंजीवन यादव, शिवप्रकाश यादव, सुरेश कुमार, नीरज पाठक, राम विलास मौर्या, रवींद्र कुमार यादव, मो. जमील, अभिमन्यु निषाद, भाष्कर पांडेय, राजितराम यादव, सूर्यभान, अखंड कुमार, देवीशंकर, छेदी प्रसाद, प्रशांत, रामकिशन, उमाश्ंाकर, दुर्गेश कुमार शामिल हैं।
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प्रबंध समिति के निर्णय का कराया अनुपालन : प्राचार्य
22 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवा समाप्त किए जाने के मामले के पीछे प्राचार्य डॉ. अजय मोहन श्रीवास्तव ने 26 फरवरी की प्रबंध समिति की बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय को कारण बताया है। प्राचार्य के अनुसार यह प्रकरण पुराना है। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने अपने स्थायीकरण की मांग को लेकर पूर्व में न्यायालय में अपील की थी। इसके अलावा श्रम न्यायालय में भी यह मामला विचाराधीन है। बताया कि छात्र-छात्राओं की संख्या प्रतिवर्ष घटती जा रही है। इससे संस्था की आय व संसाधनों में कमी आई है। महाविद्यालय में शिक्षण व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की संख्या लगभग 423 है। इसके अलावा डेली वेजर की संख्या 59 है, जो क्षमता से अधिक हैं। महाविद्यालय में कई डेली वेजर के लिए कोई कार्य नहीं है। इसलिए सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कुल 22 कर्मचारियों की संविदा समाप्त किया जाए। कहा कि निकाले गये कर्मचारियों को भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर फिर वापस लिया जा सकता है।