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फिर उफनाई सरयू, तेज कटान होने से मचा हड़कंप
Updated Fri, 11 Aug 2017 12:33 AM IST
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घर-गांव छोड़ बंधे पर भाग रहे कछारीय इलाकों के बाशिंदे
फैजाबाद। उफनाई सरयू ने इस साल अब तक की उफान का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इसी के साथ तटवर्ती इलाकों में कटान तेज होने से ग्रामीणों में खौफ छाया हुआ है। पिछले कई दिनों से नदी का जलस्तर घट-बढ़ रहा है।
जबकि गुरुवार को नदी के जलस्तर में छह सेंमी इजाफा होने से खतरे के निशान से इस सीजन में सर्वाधिक 41 सेंमी उफान दर्ज हुई है। नदी की इस विकरालता को देख कछारीय इलाकों के बाशिंदे घर-गांव छोड़ कर सुरक्षित स्थलों के लिए भाग रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि किसी-किसी दिन नदी कटान करके 50 मीटर तक भूमि निगल रही है। बाढ़ से सदर, रुदौली और सोहावल के 22 गांव चपेट में हैं। आधा दर्जन स्कूलों में पढ़ाई ठप हो चुकी है। वहीं सबसे अधिक कैथी माझा गांव की हालत खराब है।
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यहां नदी की धारा तेज कटान कर रही हैं और महज दर्जन भर घर बचे हैं। रुदौली तहसील क्षेत्र के इस कैथी माझा गांव में 71 घर थे। करीब 350 आबादी वाले इस गांव के अधिकतर हिस्से की नदी कटान कर चुकी है और इससे खौफजदा 59 घर के लोग पलायन करके पड़ोसी जिले गोंडा व बाराबंकी में शरण लेने को मजबूर हैं।
यहां के ग्रामीण तुलसीराम, भगेलू व संध्या देवी का कहना है कि गांव के इर्दगिर्द उनके बसने की कहीं पुस्तैनी जमीन नहीं बची है। अब सिर्फ 12 घर बचे हैं। वहीं गोसाईगंज के तीन गांवों और सदर क्षेत्र व सोहावल के इलाके व कई गांव पानी से घिरे हुए हैं।
रौनाही बंधे के निकट महंगू का पुरवा, अब्बू पुरवा, सराय नासिर आदि गांव भी कटान के चलते नदी के मुहाने पर आ गए हैं। वहीं बिल्वहरि बंधे के निकट राय पहलवारा गांव निवासी अर्जुन प्रसाद का कहना है कि नदी की धारा तेजी से बार-बार टकराने से बंधे की हालत बिगड़ रही है।
इससे ग्रामीणों में खौफ है। वहीं बाढ़ खंड के सहायक अभियंता चिंतामणि शर्मा का कहना है कि बंधे की सुरक्षा के लिए उपाय किए जा रहे हैं और अवर अभियंताओं को निर्देश दिए गए हैं। एडीएम वित्त एवं राजस्व एमसी दुबे का कहना है कि बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया जा रहा है और संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी जा रही है।
सिर छुपाने की जगह नहीं, रिश्तेदारों के यहां ली शरण
कैथी माझा गांव के अधिकतर लोगों के पुस्तैनी घर नदी में समा जाने से यहां सिर छुपाने भर की जगह तक नहीं बची है। जिसके चलते उन्हें रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को विवश है। गांव के नाथूराम ने आरोप लगाया है कि प्रशासन व जनप्रतिनिधि की ओर से प्रभावित ग्रामीणों की कोई सुन नहीं रहा है।
पलायन करने को हैं ये सभी मजबूर
सरयू की बाढ़ में संतोष यादव, लल्लू, खुशीराम, लल्लन, ननके, बाबू, नन्ही यादव, तफरी यादव, शित्ताई, धनीराम, केशवराम, तुलसी राम, नन्हू यादव, राम किशुन के घर नदी में समा चुके हैं। ग्रामीण खुशीराम का कहना है कि आखिर वे जाएं भी तो कहां? इससे यहां से पलायन करने को विवश हैं।
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फैजाबाद। उफनाई सरयू ने इस साल अब तक की उफान का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इसी के साथ तटवर्ती इलाकों में कटान तेज होने से ग्रामीणों में खौफ छाया हुआ है। पिछले कई दिनों से नदी का जलस्तर घट-बढ़ रहा है।
जबकि गुरुवार को नदी के जलस्तर में छह सेंमी इजाफा होने से खतरे के निशान से इस सीजन में सर्वाधिक 41 सेंमी उफान दर्ज हुई है। नदी की इस विकरालता को देख कछारीय इलाकों के बाशिंदे घर-गांव छोड़ कर सुरक्षित स्थलों के लिए भाग रहे हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि किसी-किसी दिन नदी कटान करके 50 मीटर तक भूमि निगल रही है। बाढ़ से सदर, रुदौली और सोहावल के 22 गांव चपेट में हैं। आधा दर्जन स्कूलों में पढ़ाई ठप हो चुकी है। वहीं सबसे अधिक कैथी माझा गांव की हालत खराब है।
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यहां नदी की धारा तेज कटान कर रही हैं और महज दर्जन भर घर बचे हैं। रुदौली तहसील क्षेत्र के इस कैथी माझा गांव में 71 घर थे। करीब 350 आबादी वाले इस गांव के अधिकतर हिस्से की नदी कटान कर चुकी है और इससे खौफजदा 59 घर के लोग पलायन करके पड़ोसी जिले गोंडा व बाराबंकी में शरण लेने को मजबूर हैं।
यहां के ग्रामीण तुलसीराम, भगेलू व संध्या देवी का कहना है कि गांव के इर्दगिर्द उनके बसने की कहीं पुस्तैनी जमीन नहीं बची है। अब सिर्फ 12 घर बचे हैं। वहीं गोसाईगंज के तीन गांवों और सदर क्षेत्र व सोहावल के इलाके व कई गांव पानी से घिरे हुए हैं।
रौनाही बंधे के निकट महंगू का पुरवा, अब्बू पुरवा, सराय नासिर आदि गांव भी कटान के चलते नदी के मुहाने पर आ गए हैं। वहीं बिल्वहरि बंधे के निकट राय पहलवारा गांव निवासी अर्जुन प्रसाद का कहना है कि नदी की धारा तेजी से बार-बार टकराने से बंधे की हालत बिगड़ रही है।
इससे ग्रामीणों में खौफ है। वहीं बाढ़ खंड के सहायक अभियंता चिंतामणि शर्मा का कहना है कि बंधे की सुरक्षा के लिए उपाय किए जा रहे हैं और अवर अभियंताओं को निर्देश दिए गए हैं। एडीएम वित्त एवं राजस्व एमसी दुबे का कहना है कि बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया जा रहा है और संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी जा रही है।
सिर छुपाने की जगह नहीं, रिश्तेदारों के यहां ली शरण
कैथी माझा गांव के अधिकतर लोगों के पुस्तैनी घर नदी में समा जाने से यहां सिर छुपाने भर की जगह तक नहीं बची है। जिसके चलते उन्हें रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को विवश है। गांव के नाथूराम ने आरोप लगाया है कि प्रशासन व जनप्रतिनिधि की ओर से प्रभावित ग्रामीणों की कोई सुन नहीं रहा है।
पलायन करने को हैं ये सभी मजबूर
सरयू की बाढ़ में संतोष यादव, लल्लू, खुशीराम, लल्लन, ननके, बाबू, नन्ही यादव, तफरी यादव, शित्ताई, धनीराम, केशवराम, तुलसी राम, नन्हू यादव, राम किशुन के घर नदी में समा चुके हैं। ग्रामीण खुशीराम का कहना है कि आखिर वे जाएं भी तो कहां? इससे यहां से पलायन करने को विवश हैं।