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84 कोसी परिक्रमा पथ होगा राष्ट्रीय मार्ग, पांच जिलों का होगा विकास
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53-शरद शर्मा
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने अयोध्या के चौरासी कोसी परिक्रमा पथ को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित कर दिया है। इस परिक्रमा मार्ग के नेशनल हाईवे में शामिल होने से पांच जिलों का धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकास संभव हो सकेगा। रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
ऐतिहासिक चौरासी कोसी परिक्रमा पथ पांच जिलों के 107 गांवों से होकर गुजरता है। इन सभी स्थलों का स्वरूप बदल जाएगा। रामनगरी के संतों ने भी ऐतिहासिक परिक्रमा मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की ओर से रामनगरी के जिस 84 कोसी परिक्रमा मार्ग को राजमार्ग के रूप में विकसित करने की अधिसूचना जारी की है वह 84 कोस की परिधि रामनगरी की पौराणिकता का गवाह है।
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यही नहीं इसमें पड़ने वाले आध्यात्मिक स्थलों के साथ रामनगरी की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत भी प्रवाहमान है। शास्त्रों में रामनगरी की तीन परिक्रमा का वर्णन है।
जिसमें कार्तिक शुक्ल एकादशी को चौदहकोसी व कार्तिक शुक्ल नवमी को पंचकोसी परिक्रमा सदियों से होती आ रही है। इसी तरह चैत्र मास में 84 कोसी परिक्रमा का भी विधान है।
चौदहकोसी व पंचकोसी परिक्रमा रामनगरी की परिधि में ही होती है तो वहीं 84 कोसी परिक्रमा की शुरूआत बस्ती के मखधाम (मखौड़ा) से होकर पांच जिलों का सफर तय करते हुए अयोध्या में समाप्त होती है।
चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग को नेशनल हाईवे में शामिल करने के बाद अयोध्या उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा।
84 कोसी परिक्रमा पथ उत्तर प्रदेश के पांच जिलों से होकर गुजरता है। अब यह मार्ग इन पांच जिलों के अलावा आसपास के अन्य जिलों के लिए वरदान साबित होगा।
लगभग 275 किलोमीटर लंबा यह मार्ग फैजाबाद, अंबेडकरनगर, बाराबंकी, गोंडा और बस्ती जिलों के 107 गांवों के आसपास से होकर गुजरता है। इस मार्ग का डिजाइन पीक आवर में आने वाले ट्रैफिक को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
जिससे भविष्य में ट्रैफिक जाम की समस्या न हो। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सड़क के बीच से आठ से 30 मीटर की खाली जगह यानी आरओडब्ल्यू (राइट ऑफ वे) उपलब्धता के अनुसार छोड़ी जाएगी।
सड़क परिवहन मंत्रालय ने इसका पूरा डिजाइन तैयार कर लिया है। केन्द्रीय सड़क परिवहन और हाइवे मंत्री नितिन गडकरी ने स्वयं ट्वीट कर प्रोजेक्ट को हाईवे में शामिल करने की जानकारी दी है।
हिन्दुओं में 84 लाख योनियों में भटकने से बचने के लिए अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा की काफी मान्यता है। राजा दशरथ के समय की अयोध्या 84 कोस में फैली थी। इसे रामनगरी की सांस्कृतिक सीमा कहा जाता है।
भगवान राम से जुड़े पौराणिक स्थल 84 कोसी परिक्रमा पथ के साथ इर्द-गिर्द भी स्थित हैं। अयोध्या से 20 किमी. उत्तर स्थित बस्ती जिले के मखौड़ा धाम से 84 कोसी परिक्रमा शुरू होती है। रास्ते में कुल 21 पड़ाव आते हैं।
मान्यता है कि इसी स्थल पर युगों पूर्व राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति की कामना से यज्ञ किया था। यहां पर आकर बढ़ती हुई 84 कोसी परिक्रमा पुण्य सलिला सरयू के किनारे पहुंचती है और सरयू को पार करती हुई बस्ती से अयोध्या जिले में दाखिल होती है।
रामजन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि नए सिरे से अयोध्या की आध्यात्मिकता गौरवान्वित होगी।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार धार्मिक मूल्यों, संस्कृति के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है, यह खुशी की बात है। कहा कि इस निर्णय से रामनगरी को त्रेतायुगीन नगरी के साथ-साथ वैश्विक पर्यटन स्थली के रूप में भी विकसित करने का सरकार का स्वप्न साकार होगा।
वशिष्ठ पीठ के महंत डॉ.राघवेश दास वेदांती ने भी चौरासी कोसी परिक्रमा पथ को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने पर सरकार के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की है।
कहा कि इस निर्णय से भव्य व दिव्य अयोध्या की जो अवधारणा है वह विस्तारित होगी। अध्यात्म के साथ-साथ पर्यटन को भी नया आयाम मिलेगा। कहा कि संत समाज को खुशी है कि सरकार अयोध्या के प्राचीन धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में प्रयत्नशील है।
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा कहते हैं कि सरकार के इस घोषणा से न सिर्फ परिवहन की दृष्टि से नया आयाम मिलेगा बल्कि आध्यात्मिक व सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साबित होगी।
बताया कि विहिप ने 84 कोसी परिक्रमा के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए ही 2013 से परिक्रमा का शुभारंभ किया था। जिसमें हर वर्ष सैकड़ों साधु-संत परिक्रमा करते हैं। कहा कि सरकार की इस योजना से आध्यात्मिक पर्यटन क्षेत्र को संबल मिलेगा।
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ऐतिहासिक चौरासी कोसी परिक्रमा पथ पांच जिलों के 107 गांवों से होकर गुजरता है। इन सभी स्थलों का स्वरूप बदल जाएगा। रामनगरी के संतों ने भी ऐतिहासिक परिक्रमा मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की है।
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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की ओर से रामनगरी के जिस 84 कोसी परिक्रमा मार्ग को राजमार्ग के रूप में विकसित करने की अधिसूचना जारी की है वह 84 कोस की परिधि रामनगरी की पौराणिकता का गवाह है।
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यही नहीं इसमें पड़ने वाले आध्यात्मिक स्थलों के साथ रामनगरी की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत भी प्रवाहमान है। शास्त्रों में रामनगरी की तीन परिक्रमा का वर्णन है।
जिसमें कार्तिक शुक्ल एकादशी को चौदहकोसी व कार्तिक शुक्ल नवमी को पंचकोसी परिक्रमा सदियों से होती आ रही है। इसी तरह चैत्र मास में 84 कोसी परिक्रमा का भी विधान है।
चौदहकोसी व पंचकोसी परिक्रमा रामनगरी की परिधि में ही होती है तो वहीं 84 कोसी परिक्रमा की शुरूआत बस्ती के मखधाम (मखौड़ा) से होकर पांच जिलों का सफर तय करते हुए अयोध्या में समाप्त होती है।
चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग को नेशनल हाईवे में शामिल करने के बाद अयोध्या उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा।
84 कोसी परिक्रमा पथ उत्तर प्रदेश के पांच जिलों से होकर गुजरता है। अब यह मार्ग इन पांच जिलों के अलावा आसपास के अन्य जिलों के लिए वरदान साबित होगा।
लगभग 275 किलोमीटर लंबा यह मार्ग फैजाबाद, अंबेडकरनगर, बाराबंकी, गोंडा और बस्ती जिलों के 107 गांवों के आसपास से होकर गुजरता है। इस मार्ग का डिजाइन पीक आवर में आने वाले ट्रैफिक को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
जिससे भविष्य में ट्रैफिक जाम की समस्या न हो। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सड़क के बीच से आठ से 30 मीटर की खाली जगह यानी आरओडब्ल्यू (राइट ऑफ वे) उपलब्धता के अनुसार छोड़ी जाएगी।
सड़क परिवहन मंत्रालय ने इसका पूरा डिजाइन तैयार कर लिया है। केन्द्रीय सड़क परिवहन और हाइवे मंत्री नितिन गडकरी ने स्वयं ट्वीट कर प्रोजेक्ट को हाईवे में शामिल करने की जानकारी दी है।
हिन्दुओं में 84 लाख योनियों में भटकने से बचने के लिए अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा की काफी मान्यता है। राजा दशरथ के समय की अयोध्या 84 कोस में फैली थी। इसे रामनगरी की सांस्कृतिक सीमा कहा जाता है।
भगवान राम से जुड़े पौराणिक स्थल 84 कोसी परिक्रमा पथ के साथ इर्द-गिर्द भी स्थित हैं। अयोध्या से 20 किमी. उत्तर स्थित बस्ती जिले के मखौड़ा धाम से 84 कोसी परिक्रमा शुरू होती है। रास्ते में कुल 21 पड़ाव आते हैं।
मान्यता है कि इसी स्थल पर युगों पूर्व राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति की कामना से यज्ञ किया था। यहां पर आकर बढ़ती हुई 84 कोसी परिक्रमा पुण्य सलिला सरयू के किनारे पहुंचती है और सरयू को पार करती हुई बस्ती से अयोध्या जिले में दाखिल होती है।
रामजन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि नए सिरे से अयोध्या की आध्यात्मिकता गौरवान्वित होगी।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार धार्मिक मूल्यों, संस्कृति के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है, यह खुशी की बात है। कहा कि इस निर्णय से रामनगरी को त्रेतायुगीन नगरी के साथ-साथ वैश्विक पर्यटन स्थली के रूप में भी विकसित करने का सरकार का स्वप्न साकार होगा।
वशिष्ठ पीठ के महंत डॉ.राघवेश दास वेदांती ने भी चौरासी कोसी परिक्रमा पथ को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने पर सरकार के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की है।
कहा कि इस निर्णय से भव्य व दिव्य अयोध्या की जो अवधारणा है वह विस्तारित होगी। अध्यात्म के साथ-साथ पर्यटन को भी नया आयाम मिलेगा। कहा कि संत समाज को खुशी है कि सरकार अयोध्या के प्राचीन धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में प्रयत्नशील है।
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा कहते हैं कि सरकार के इस घोषणा से न सिर्फ परिवहन की दृष्टि से नया आयाम मिलेगा बल्कि आध्यात्मिक व सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साबित होगी।
बताया कि विहिप ने 84 कोसी परिक्रमा के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए ही 2013 से परिक्रमा का शुभारंभ किया था। जिसमें हर वर्ष सैकड़ों साधु-संत परिक्रमा करते हैं। कहा कि सरकार की इस योजना से आध्यात्मिक पर्यटन क्षेत्र को संबल मिलेगा।

डा.राघवेश दास वेदांती- फोटो : FAIZABAD

आचार्य सतेंद्र दास- फोटो : FAIZABAD