{"_id":"62585e5d26978962a6568c57","slug":"84-kosi-parikrama-passes-through-five-districts-faizabad-news-lko6261480126","type":"story","status":"publish","title_hn":"पांच जिलों से गुजरती है 84 कोसी परिक्रमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पांच जिलों से गुजरती है 84 कोसी परिक्रमा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अयोध्या। रामनगरी की ऐतिहासिक 84 कोसी परिक्रमा 17 अप्रैल से शुरू हो रही है। करीब 25 दिनों तक चलने वाली यह परिक्रमा पांच जिलों के 107 गांवों से होकर गुजरती है। परिक्रमा में बड़ी संख्या में साधु-संत शामिल होते हैं।
परिक्रमा की 84 कोसी परिधि रामनगरी की पौराणिकता का गवाह है। यही नहीं इसमें पड़ने वाले आध्यात्मिक स्थलों के साथ रामनगरी की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत भी प्रवाहमान है।
दो वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते परिक्रमा परंपरा निर्वहन तक ही सीमित रही। शास्त्रों में रामनगरी की तीन परिक्रमा का वर्णन है। जिसमें कार्तिक शुक्ल एकादशी को चौदह कोसी व कार्तिक शुक्ल नवमी को पंचकोसी परिक्रमा सदियों से होती आ रही है।
विज्ञापन
इसी तरह चैत्र मास में 84 कोसी परिक्रमा का भी विधान है। चौदह कोसी व पंचकोसी परिक्रमा रामनगरी की परिधि में ही होती है जबकि 84 कोसी परिक्रमा की शुरूआत बस्ती के मखधाम (मखौड़ा) से होती है। जो पांच जिलों का सफर तय करते हुए अयोध्या में समाप्त होती है।
इस बार यह परिक्रमा 17 अप्रैल से मखधाम मखौड़ा से शुरू होगी। इससे पहले 16 अप्रैल को ही साधु-संतों का जत्था परिक्रमा में शामिल होने के लिए अयोध्या से मखधाम के लिए रवाना होगा।
कोरोना के चलते दो वर्ष परिक्रमा परंपरा निर्वहन तक ही सीमित रही। इस वर्ष परिक्रमा को लेकर साधु-संतों में उत्साह है। अयोध्या में विहिप के हनुमान मंडल व श्री अयोध्याधाम चौरासी कोस परिक्रमा धर्मार्थ सेवा संस्थान द्वारा परिक्रमा निकाली जाती है।
अवध धाम हनुमान मंडल समिति के द्वारा 84 कोसी परिक्रमा करने वाले साधु-संतों का अयोध्या धाम के कारसेवक पुरम में पंजीकरण आरंभ कर दिया गया है। 84 कोसी परिक्रमा करने के लिए पंजीकरण होना आवश्यक है।
साथ ही साधु संत हनुमान मंडल समिति के द्वारा 84 कोसी परिक्रमा में हिस्सा लेते हैं। इस समूह में सबसे आगे एक विशाल ध्वज लाल रंग का चलता है। जिसमें हनुमान अंकित होते हैं।
यही परिक्रमा के समय 84 कोसी परिक्रमा करने वाले साधु संतों की टोली की पहचान होती है। हनुमान मंडल की परिक्रमा 8 मई को व दूसरी संस्था की परिक्रमा 11 मई को समाप्त होगी।
श्री अयोध्याधाम चौरासी कोस परिक्रमा धर्मार्थ सेवा संस्थान के अध्यक्ष महंत गयादास बताते हैं कि हिंदुओं में 84 लाख योनियों में भटकने से बचने के लिए अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा की काफी मान्यता है।
राजा दशरथ के समय की अयोध्या 84 कोस में फैली थी। इसे रामनगरी की सांस्कृतिक सीमा कहा जाता है। भगवान राम से जुड़े पौराणिक स्थल 84 कोसी परिक्रमा पथ के साथ इर्द-गिर्द भी स्थित हैं।
बताया कि अयोध्या से 20 किमी. उत्तर स्थित बस्ती जिले के मखौड़ा धाम से 84 कोसी परिक्रमा शुरू होती है। रास्ते में कुल 21 पड़ाव आते हैं। मान्यता है कि इसी स्थल पर युगों पूर्व राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति की कामना से यज्ञ किया था।
84 कोसी परिक्रमा पुण्य सलिला सरयू को पार करती हुई बस्ती से अयोध्या जिले में दाखिल होती है। बताया कि परिक्रमा आठ मई को अयोध्या पहुंचेगी। नौ मई को संत रामकोट की परिक्रमा करेंगे।
10 मई को रामार्चा पूजन व 11 मई को भंडारे के साथ परिक्रमा का समापन होगा। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अयोध्या की 84 कोसी मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया है।
3100 करोड़ रुपये की लागत से 200 किलोमीटर के निर्माण कार्य की घोषणा की गई है। पूरे प्रोजेक्ट में 4000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 235 किलोमीटर के संपूर्ण मार्ग को बेहद सुंदर और आकर्षण रूप देने की तैयारी है।
84 कोसी परिक्रमा मार्ग के दोनों तरफ पांच मीटर चौड़े परिक्रमा पथ होंगे। जिस पर हरी घास लगाई जाएगी। वहीं परिक्रमा मार्ग पर 23 स्थानों पर शाकाहारी भोजनालय और विश्राम की समुचित व्यवस्था की जाएगी। परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाली सरयू नदी पर दो भव्य पुलों का निर्माण भी किया जाएगा।
विज्ञापन
परिक्रमा की 84 कोसी परिधि रामनगरी की पौराणिकता का गवाह है। यही नहीं इसमें पड़ने वाले आध्यात्मिक स्थलों के साथ रामनगरी की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत भी प्रवाहमान है।
विज्ञापन
दो वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते परिक्रमा परंपरा निर्वहन तक ही सीमित रही। शास्त्रों में रामनगरी की तीन परिक्रमा का वर्णन है। जिसमें कार्तिक शुक्ल एकादशी को चौदह कोसी व कार्तिक शुक्ल नवमी को पंचकोसी परिक्रमा सदियों से होती आ रही है।
विज्ञापन
इसी तरह चैत्र मास में 84 कोसी परिक्रमा का भी विधान है। चौदह कोसी व पंचकोसी परिक्रमा रामनगरी की परिधि में ही होती है जबकि 84 कोसी परिक्रमा की शुरूआत बस्ती के मखधाम (मखौड़ा) से होती है। जो पांच जिलों का सफर तय करते हुए अयोध्या में समाप्त होती है।
इस बार यह परिक्रमा 17 अप्रैल से मखधाम मखौड़ा से शुरू होगी। इससे पहले 16 अप्रैल को ही साधु-संतों का जत्था परिक्रमा में शामिल होने के लिए अयोध्या से मखधाम के लिए रवाना होगा।
कोरोना के चलते दो वर्ष परिक्रमा परंपरा निर्वहन तक ही सीमित रही। इस वर्ष परिक्रमा को लेकर साधु-संतों में उत्साह है। अयोध्या में विहिप के हनुमान मंडल व श्री अयोध्याधाम चौरासी कोस परिक्रमा धर्मार्थ सेवा संस्थान द्वारा परिक्रमा निकाली जाती है।
अवध धाम हनुमान मंडल समिति के द्वारा 84 कोसी परिक्रमा करने वाले साधु-संतों का अयोध्या धाम के कारसेवक पुरम में पंजीकरण आरंभ कर दिया गया है। 84 कोसी परिक्रमा करने के लिए पंजीकरण होना आवश्यक है।
साथ ही साधु संत हनुमान मंडल समिति के द्वारा 84 कोसी परिक्रमा में हिस्सा लेते हैं। इस समूह में सबसे आगे एक विशाल ध्वज लाल रंग का चलता है। जिसमें हनुमान अंकित होते हैं।
यही परिक्रमा के समय 84 कोसी परिक्रमा करने वाले साधु संतों की टोली की पहचान होती है। हनुमान मंडल की परिक्रमा 8 मई को व दूसरी संस्था की परिक्रमा 11 मई को समाप्त होगी।
श्री अयोध्याधाम चौरासी कोस परिक्रमा धर्मार्थ सेवा संस्थान के अध्यक्ष महंत गयादास बताते हैं कि हिंदुओं में 84 लाख योनियों में भटकने से बचने के लिए अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा की काफी मान्यता है।
राजा दशरथ के समय की अयोध्या 84 कोस में फैली थी। इसे रामनगरी की सांस्कृतिक सीमा कहा जाता है। भगवान राम से जुड़े पौराणिक स्थल 84 कोसी परिक्रमा पथ के साथ इर्द-गिर्द भी स्थित हैं।
बताया कि अयोध्या से 20 किमी. उत्तर स्थित बस्ती जिले के मखौड़ा धाम से 84 कोसी परिक्रमा शुरू होती है। रास्ते में कुल 21 पड़ाव आते हैं। मान्यता है कि इसी स्थल पर युगों पूर्व राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति की कामना से यज्ञ किया था।
84 कोसी परिक्रमा पुण्य सलिला सरयू को पार करती हुई बस्ती से अयोध्या जिले में दाखिल होती है। बताया कि परिक्रमा आठ मई को अयोध्या पहुंचेगी। नौ मई को संत रामकोट की परिक्रमा करेंगे।
10 मई को रामार्चा पूजन व 11 मई को भंडारे के साथ परिक्रमा का समापन होगा। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अयोध्या की 84 कोसी मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया है।
3100 करोड़ रुपये की लागत से 200 किलोमीटर के निर्माण कार्य की घोषणा की गई है। पूरे प्रोजेक्ट में 4000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 235 किलोमीटर के संपूर्ण मार्ग को बेहद सुंदर और आकर्षण रूप देने की तैयारी है।
84 कोसी परिक्रमा मार्ग के दोनों तरफ पांच मीटर चौड़े परिक्रमा पथ होंगे। जिस पर हरी घास लगाई जाएगी। वहीं परिक्रमा मार्ग पर 23 स्थानों पर शाकाहारी भोजनालय और विश्राम की समुचित व्यवस्था की जाएगी। परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाली सरयू नदी पर दो भव्य पुलों का निर्माण भी किया जाएगा।