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अयोध्या की 84 कोस सांस्कृतिक सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित
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अयोध्या। रामनगरी की सांस्कृतिक सीमा 84 कोसी परिक्रमा मार्ग अब राष्ट्रीय राजमार्ग हो गया है। लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इसकी घोषणा की।
सांसद लल्लू सिंह इसके लिए वर्ष 2015 से लगातार प्रयास कर रहे थे। केंद्रीय मंत्री ने 21 दिसंबर 2016 को जीआईसी के मैदान में इसको राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने के अनुरोध को स्वीकार किया था।
सांसद लल्लू सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के स्वरूप में परिवर्तित होने के उपरांत 84 कोसी परिक्रमा मार्ग आध्यात्म, विकास व पर्यटन के संगम को प्रदर्शित करेगा। रामायण में वर्णित करीब 151 तीर्थ स्थल आध्यात्म व श्रद्धा का केंद्र हैं।
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यह परिक्रमा पथ बस्ती, अयोध्या, अंबेडकरनगर, बाराबंकी और गोंडा से होते हुए निकलता है। इस पथ पर रामायण से जुड़े प्रतीकों में पुत्रेष्ठि यज्ञ स्थल मखौड़ा बस्ती, ऋषि शृंगी आश्रम, सेरवा घाट, सीताकुंड बीकापुर, आस्तिक आश्रम आस्तिकन, यमदग्नि आश्रम, गौतम ऋषि आश्रम रुदौली, मंडप ऋषि आश्रम लखनीपुर, जंबूदीप भौरीगंज गोंडा, संत तुलसी दास के गांव राजापुर, यमदग्नि कुंड पराशर ऋषि आश्रम जैसे आध्यात्मिक केंद्र हैं।
राजमार्ग के विकसित होने से यह स्थल श्रद्धा के साथ साथ पर्यटन का केंद्र भी बन जाएंगे। जो इन सभी जनपदों में विकास के साथ रोजगार सृजन की संभावनाओं को भी संबल प्रदान करेंगे।
बताया कि परिक्रमा पथ के निर्माण से आवागमन के लिए सरयू पर दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र के मुर्तिहनघाट और शेरवाघाट गोसाईगंज पर पुलों की सुविधा भी मिलेगी।
परिक्रमा पथ के बन जाने से अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालु आसानी से चौरासी कोस में स्थित तीर्थों तक पहुंच सकेंगे। 84 कोसी परिक्रमा पथ को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने के प्रयास के साथ यहां आध्यात्मिक स्थलों के पौराणिक महत्व को वैश्विक स्तर पर परिभाषित करने के लिए सांसद लल्लू सिंह ने दिल्ली में अयोध्या पर्व का आयोजन किया था।
जिसने पूरे विश्व को रामायण के प्रतीकों की इन पौराणिक धरोहरों से साक्षात्कार कराया था। अयोध्या में रामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन से पूर्व चौरासी कोसी परिक्रमा पथ के 151 तीर्थ स्थलों पर सांसद के नेतृत्व में श्री अयोध्या न्यास द्वारा अनुष्ठान प्रारंभ कराया गया था। जो भूमि पूजन के दिन तक चला था।
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सांसद लल्लू सिंह इसके लिए वर्ष 2015 से लगातार प्रयास कर रहे थे। केंद्रीय मंत्री ने 21 दिसंबर 2016 को जीआईसी के मैदान में इसको राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने के अनुरोध को स्वीकार किया था।
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सांसद लल्लू सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के स्वरूप में परिवर्तित होने के उपरांत 84 कोसी परिक्रमा मार्ग आध्यात्म, विकास व पर्यटन के संगम को प्रदर्शित करेगा। रामायण में वर्णित करीब 151 तीर्थ स्थल आध्यात्म व श्रद्धा का केंद्र हैं।
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यह परिक्रमा पथ बस्ती, अयोध्या, अंबेडकरनगर, बाराबंकी और गोंडा से होते हुए निकलता है। इस पथ पर रामायण से जुड़े प्रतीकों में पुत्रेष्ठि यज्ञ स्थल मखौड़ा बस्ती, ऋषि शृंगी आश्रम, सेरवा घाट, सीताकुंड बीकापुर, आस्तिक आश्रम आस्तिकन, यमदग्नि आश्रम, गौतम ऋषि आश्रम रुदौली, मंडप ऋषि आश्रम लखनीपुर, जंबूदीप भौरीगंज गोंडा, संत तुलसी दास के गांव राजापुर, यमदग्नि कुंड पराशर ऋषि आश्रम जैसे आध्यात्मिक केंद्र हैं।
राजमार्ग के विकसित होने से यह स्थल श्रद्धा के साथ साथ पर्यटन का केंद्र भी बन जाएंगे। जो इन सभी जनपदों में विकास के साथ रोजगार सृजन की संभावनाओं को भी संबल प्रदान करेंगे।
बताया कि परिक्रमा पथ के निर्माण से आवागमन के लिए सरयू पर दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र के मुर्तिहनघाट और शेरवाघाट गोसाईगंज पर पुलों की सुविधा भी मिलेगी।
परिक्रमा पथ के बन जाने से अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालु आसानी से चौरासी कोस में स्थित तीर्थों तक पहुंच सकेंगे। 84 कोसी परिक्रमा पथ को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने के प्रयास के साथ यहां आध्यात्मिक स्थलों के पौराणिक महत्व को वैश्विक स्तर पर परिभाषित करने के लिए सांसद लल्लू सिंह ने दिल्ली में अयोध्या पर्व का आयोजन किया था।
जिसने पूरे विश्व को रामायण के प्रतीकों की इन पौराणिक धरोहरों से साक्षात्कार कराया था। अयोध्या में रामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन से पूर्व चौरासी कोसी परिक्रमा पथ के 151 तीर्थ स्थलों पर सांसद के नेतृत्व में श्री अयोध्या न्यास द्वारा अनुष्ठान प्रारंभ कराया गया था। जो भूमि पूजन के दिन तक चला था।