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स्वरोजगार की संभावनाएं तलाशने को गांव में प्रशिक्षण अभियान
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स्वरोजगार की संभावनाएं तलाशने को गांव में दिया जाएगा प्रशिक्षण
अयोध्या। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के प्रौढ़, सतत एवं प्रसार शिक्षा विभाग की ओर से गांवों में स्वरोजगार की संभावनाओं को तलाशने और शिक्षित युवाओं का शहरों की तरफ पलायन रोकने के लिए बुधवार को अशरफपुर टोलिया बिहारीपुर डाभासेमर गांव में 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया।
इसका उद्घाटन करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि गांव में कौशल है, किंतु इसे विकसित करने का अवसर लोगों को नहीं मिलता है। आज आवश्यकता इस बात की है कि ग्रामीणों में विद्यमान कौशल को नवाचार विधियों के माध्यम से विकसित किया जाए। साथ ही प्राकृतिक खेती से किसानों की आय दोगुनी करने का प्रयास हो।
विशिष्ट अतिथि डॉ. राघवेशदास वेदांती ने कहा कि दिनचर्या में परिवर्तन लाकर लोग स्वस्थ रह सकते हैं। विवि कार्य परिषद के सदस्य ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि गांव में नशा मुक्त समाज के निर्माण एवं कौशल विकास हेतु प्रौढ़, सतत एवं प्रसार शिक्षा विभाग द्वारा उठाए गए कदम सराहनीय हैं।
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विषय विशेषज्ञ डॉ. शिव प्रताप सिंह ने रेशम कीटपालन एवं संरक्षित रेशम कीटों के जीवनकाल के विभिन्न चरणों का प्रदर्शन किया। ग्राम प्रधान नीलम वर्मा ने गांव में तैयार किए गए गुड़ की डलिया एवं टोकरी भेंट की। विभाग के निदेशक प्रो. अनूप कुमार ने बताया कि विभाग द्वारा इस कार्यक्रम में मधुमक्खी पालन, रेशम कीट पालन, जैविक खाद तैयार करने की विधि, महिलाओं के लिए सिलाई-कढ़ाई, कैंडल निर्माण तथा कीटनाशक व रासायनिक खादों से मुक्त अनाज व सब्जियों का उत्पादन करके गांव को व्यवसाय केंद्र के रूप में परिवर्तित करने का प्रयास किया जाएगा।
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अयोध्या। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के प्रौढ़, सतत एवं प्रसार शिक्षा विभाग की ओर से गांवों में स्वरोजगार की संभावनाओं को तलाशने और शिक्षित युवाओं का शहरों की तरफ पलायन रोकने के लिए बुधवार को अशरफपुर टोलिया बिहारीपुर डाभासेमर गांव में 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया।
इसका उद्घाटन करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि गांव में कौशल है, किंतु इसे विकसित करने का अवसर लोगों को नहीं मिलता है। आज आवश्यकता इस बात की है कि ग्रामीणों में विद्यमान कौशल को नवाचार विधियों के माध्यम से विकसित किया जाए। साथ ही प्राकृतिक खेती से किसानों की आय दोगुनी करने का प्रयास हो।
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विशिष्ट अतिथि डॉ. राघवेशदास वेदांती ने कहा कि दिनचर्या में परिवर्तन लाकर लोग स्वस्थ रह सकते हैं। विवि कार्य परिषद के सदस्य ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि गांव में नशा मुक्त समाज के निर्माण एवं कौशल विकास हेतु प्रौढ़, सतत एवं प्रसार शिक्षा विभाग द्वारा उठाए गए कदम सराहनीय हैं।
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विषय विशेषज्ञ डॉ. शिव प्रताप सिंह ने रेशम कीटपालन एवं संरक्षित रेशम कीटों के जीवनकाल के विभिन्न चरणों का प्रदर्शन किया। ग्राम प्रधान नीलम वर्मा ने गांव में तैयार किए गए गुड़ की डलिया एवं टोकरी भेंट की। विभाग के निदेशक प्रो. अनूप कुमार ने बताया कि विभाग द्वारा इस कार्यक्रम में मधुमक्खी पालन, रेशम कीट पालन, जैविक खाद तैयार करने की विधि, महिलाओं के लिए सिलाई-कढ़ाई, कैंडल निर्माण तथा कीटनाशक व रासायनिक खादों से मुक्त अनाज व सब्जियों का उत्पादन करके गांव को व्यवसाय केंद्र के रूप में परिवर्तित करने का प्रयास किया जाएगा।