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एकादशी पर उमड़े भक्त, मंदिरों में झूलनोत्सव की धूम
Updated Thu, 03 Aug 2017 11:46 PM IST
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गीत-संगीत व नृत्य की बह रही त्रिवेणी, भाव-नर्तन कर रहे भक्त
अयोध्या। सावन मेला में एकादशी पर गुरुवार को सुबह से ही स्नान व दर्शन-पूजन को लेकर भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। जबकि मठ-मंदिरों में सावन का राग-रंग शिखर पर है। श्रावण शुक्लपक्ष की एकादशी पर अयोध्या का सावन खास वैशिष्टय लिए चरम पर दिखा। क्या मंदिर, क्या मठ, हर जगह परंपरा की धारा सांझ होते ही जगमोहन में फूट पड़ती है।
रामनगरी में सावन मेला शुरू होने के साथ ही मठ-मंदिरों में झूलनोत्सव चरम पर है। श्रद्धालुओं की भीड़ आराध्य के दर्शन-पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उमड़ने लगी है। मठ-मंदिरों में झूलनोत्सव के तहत पारंपरिक, शास्त्रीय गीत-संगीत व नृत्य के कार्यक्रम परवान पर हैं। शाम होते ही मंदिरों के जगमोहन से तबले की थाप व हारमोनियम की धुनें श्रद्धालुओं को बरबस अपनी ओर खींचने लगती हैं। कभी-कभार ऐसा भावपूर्ण माहौल बन जाता है कि भक्त अपनी सुध-बुध खो भाव-नर्तन की मुद्रा में हो जाते हैं। साधु-संत कहते हैं कि, सावन में संस्कृति के वैभव की विभिन्न मंदिरों में अभिव्यक्ति होती है, सबकी अपनी खास परंपरा है, जिसमें नहा भक्त ही नहीं अयोध्या भी विह्वल हो उठती है।
कनक भवन, बड़ा स्थान, हनुमान बाग, जानकी भवन, विअहुति भवन, सद्गुरु सदन, सियाराम किला, श्रीराम वल्लभाकुंज, रामहर्षण कुंज, राजगोपाल मंदिर, हनुमानगढ़ी, श्रीमणिराम दास की छावनी, अशर्फी भवन, श्रीकालेराम मंदिर, बावन मंदिर, बड़ा भक्तमाल, कौशलेश सदन आदि मंदिरों में हो रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम भक्तों को भावविभोर कर रहे हैं।
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सखियों की मनुहार से मोहित हो रहे युगल सरकार
अयोध्या के संतों से भगवान के सखा की उपाधि पाए किन्नर अपनी विशिष्ट शैली में कजरी, सावन गीतों व भजनों की माला जब बिखेरते हैं तो हर कोई भक्ति रस में गोते लगाने लगता है। शाम होते ही अयोध्या के छोटे-बड़े मठ-मंदिरों में इनके गीत गूंजने लगते हैं। कानपुर से आई सखी सोना और मंजू बतातीं हैं कि वे यहां पैसों के लिए नहीं आती हैं, वो तो सिर्फ अपने आराध्य के दर्शन कर उनके सामने नृत्य व गीत पेश कर खुद को धन्य करना चाहती हैं।
अयोध्या के मंदिरों में ‘घिरि-घिरि आए घुमड़ घनघोर परे रिमझिम बूंद फुहारे, अरे रामा चमकि रही दमिनियां झूले राजा रनिया ऐ हारी’..., ‘राम रसिया सरयू किनारे कदम जूरि, भइया राम रसिया हिंडोरा लागे ला बा...’, ‘हरे रामा रिमझिम बरसे पनियां झूले राजा रनिया रे हारी...’ जैसे गीत सखियों के बिना अधूरे माने जाते हैं।
इलेक्ट्रिक झूले बने आकर्षण का केंद्र
मेला क्षेत्र में इस बार तुलसी उद्यान व शृंगार हाट में बिजली के झूले श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। रंगबिरंगी लाइटों से झिलमिलाते ये दोनों स्थान मेले के विशिष्ट रूप को दर्शा रहे हैं। तुलसी उद्यान में लगे छोटे-बड़े एक दर्जन झूलों को देख श्रद्धालुओं का बाल मन व बच्चों का बालहठ बरबस उनके कदम इस ओर बढ़ा देता है। वहीं, नयाघाट स्थित बस स्टैंड पर लगी बड़ी एलईडी पर रामायण की प्रस्तुति श्रद्धालुओं को बरबस आकर्षित कर रही है।
एटीएस व आरएएफ ने संभाली सुरक्षा की कमान
पूरे मेला क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर पुलिस, पीएसी व होमगार्ड के जवानों के साथ ही सादी वर्दी में महिला व पुरुष पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही एटीएस के कमांडो भी तैनात किए गए हैं। करीब एक दर्जन महत्वपूर्ण स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। एसपी सिटी अनिल कुमार सिंह ने बताया कि, नयाघाट, हनुमानगढ़ी, शृंगारहाट जैसे अति महत्वपूर्ण स्थानों पर आरएएफ की भी तैनाती की गई है। खोया पाया कैंप अब तक 300 से ज्यादा लोगों को उनके परिवारीजनों से मिलाया जा चुका है। उन्होंने बताया कि, मेला क्षेत्र को सात जोन में बांटकर सात एएसपी, 13 डीएसपी, 10 इंस्पेक्टर, 50 सब इंस्पेक्टर, 400 सिपाही, 50 महिला सिपाही, 300 होमगार्ड, आठ कंपनी पीएसी, दो कंपनी आरएएफ, एक कंपनी पीएसी फ्लड यूनिट के अतिरिक्त डॉग स्क्वाएड व बम डिस्पोजल स्क्वाएड तैनात किया गया है। इसके अलावा एटीएस के कमांडो भी मेला क्षेत्र में मुस्तैद हैं।
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अयोध्या। सावन मेला में एकादशी पर गुरुवार को सुबह से ही स्नान व दर्शन-पूजन को लेकर भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। जबकि मठ-मंदिरों में सावन का राग-रंग शिखर पर है। श्रावण शुक्लपक्ष की एकादशी पर अयोध्या का सावन खास वैशिष्टय लिए चरम पर दिखा। क्या मंदिर, क्या मठ, हर जगह परंपरा की धारा सांझ होते ही जगमोहन में फूट पड़ती है।
रामनगरी में सावन मेला शुरू होने के साथ ही मठ-मंदिरों में झूलनोत्सव चरम पर है। श्रद्धालुओं की भीड़ आराध्य के दर्शन-पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उमड़ने लगी है। मठ-मंदिरों में झूलनोत्सव के तहत पारंपरिक, शास्त्रीय गीत-संगीत व नृत्य के कार्यक्रम परवान पर हैं। शाम होते ही मंदिरों के जगमोहन से तबले की थाप व हारमोनियम की धुनें श्रद्धालुओं को बरबस अपनी ओर खींचने लगती हैं। कभी-कभार ऐसा भावपूर्ण माहौल बन जाता है कि भक्त अपनी सुध-बुध खो भाव-नर्तन की मुद्रा में हो जाते हैं। साधु-संत कहते हैं कि, सावन में संस्कृति के वैभव की विभिन्न मंदिरों में अभिव्यक्ति होती है, सबकी अपनी खास परंपरा है, जिसमें नहा भक्त ही नहीं अयोध्या भी विह्वल हो उठती है।
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कनक भवन, बड़ा स्थान, हनुमान बाग, जानकी भवन, विअहुति भवन, सद्गुरु सदन, सियाराम किला, श्रीराम वल्लभाकुंज, रामहर्षण कुंज, राजगोपाल मंदिर, हनुमानगढ़ी, श्रीमणिराम दास की छावनी, अशर्फी भवन, श्रीकालेराम मंदिर, बावन मंदिर, बड़ा भक्तमाल, कौशलेश सदन आदि मंदिरों में हो रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम भक्तों को भावविभोर कर रहे हैं।
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सखियों की मनुहार से मोहित हो रहे युगल सरकार
अयोध्या के संतों से भगवान के सखा की उपाधि पाए किन्नर अपनी विशिष्ट शैली में कजरी, सावन गीतों व भजनों की माला जब बिखेरते हैं तो हर कोई भक्ति रस में गोते लगाने लगता है। शाम होते ही अयोध्या के छोटे-बड़े मठ-मंदिरों में इनके गीत गूंजने लगते हैं। कानपुर से आई सखी सोना और मंजू बतातीं हैं कि वे यहां पैसों के लिए नहीं आती हैं, वो तो सिर्फ अपने आराध्य के दर्शन कर उनके सामने नृत्य व गीत पेश कर खुद को धन्य करना चाहती हैं।
अयोध्या के मंदिरों में ‘घिरि-घिरि आए घुमड़ घनघोर परे रिमझिम बूंद फुहारे, अरे रामा चमकि रही दमिनियां झूले राजा रनिया ऐ हारी’..., ‘राम रसिया सरयू किनारे कदम जूरि, भइया राम रसिया हिंडोरा लागे ला बा...’, ‘हरे रामा रिमझिम बरसे पनियां झूले राजा रनिया रे हारी...’ जैसे गीत सखियों के बिना अधूरे माने जाते हैं।
इलेक्ट्रिक झूले बने आकर्षण का केंद्र
मेला क्षेत्र में इस बार तुलसी उद्यान व शृंगार हाट में बिजली के झूले श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। रंगबिरंगी लाइटों से झिलमिलाते ये दोनों स्थान मेले के विशिष्ट रूप को दर्शा रहे हैं। तुलसी उद्यान में लगे छोटे-बड़े एक दर्जन झूलों को देख श्रद्धालुओं का बाल मन व बच्चों का बालहठ बरबस उनके कदम इस ओर बढ़ा देता है। वहीं, नयाघाट स्थित बस स्टैंड पर लगी बड़ी एलईडी पर रामायण की प्रस्तुति श्रद्धालुओं को बरबस आकर्षित कर रही है।
एटीएस व आरएएफ ने संभाली सुरक्षा की कमान
पूरे मेला क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर पुलिस, पीएसी व होमगार्ड के जवानों के साथ ही सादी वर्दी में महिला व पुरुष पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही एटीएस के कमांडो भी तैनात किए गए हैं। करीब एक दर्जन महत्वपूर्ण स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। एसपी सिटी अनिल कुमार सिंह ने बताया कि, नयाघाट, हनुमानगढ़ी, शृंगारहाट जैसे अति महत्वपूर्ण स्थानों पर आरएएफ की भी तैनाती की गई है। खोया पाया कैंप अब तक 300 से ज्यादा लोगों को उनके परिवारीजनों से मिलाया जा चुका है। उन्होंने बताया कि, मेला क्षेत्र को सात जोन में बांटकर सात एएसपी, 13 डीएसपी, 10 इंस्पेक्टर, 50 सब इंस्पेक्टर, 400 सिपाही, 50 महिला सिपाही, 300 होमगार्ड, आठ कंपनी पीएसी, दो कंपनी आरएएफ, एक कंपनी पीएसी फ्लड यूनिट के अतिरिक्त डॉग स्क्वाएड व बम डिस्पोजल स्क्वाएड तैनात किया गया है। इसके अलावा एटीएस के कमांडो भी मेला क्षेत्र में मुस्तैद हैं।