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अभी तुम जमीं पर और थोड़ी सीढिय़ा चढ लो.......
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अभी तुम जमीं पर और थोड़ी सीढ़ियां चढ़ लो...
अयोध्या। शहर के जीआईसी में चल रहे अयोध्या महोत्सव में बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें प्रसिद्ध कवि डॉ. विष्णु सक्सेना ने अभी तुम जमीं पर और सीढ़ियां चढ़ लो... समेत अनेक रचनाओं से समां बांध दिया। सम्मेलन में देश के कई नामी-गिरामी कवियों ने काव्यपाठ किया।
हास्य कवि प्रताप फौजदार ने सैनिकों को खुली छूट दे दो, आतंकी मार गिराने की, आतंकवाद न मिट जाये तो मेरी मूछ मुड़ लेना, दुरबीन मैं हाथ में दे दूंगा तुम पाकिस्तान ढूंढ लेना...प्रस्तुत किया। दिनेश ने- बावरा दूध को दूध कह दूं पानी को पानी कह दूं..., मानसी द्विवेदी ने मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की।
राम किशोर कुमार तिवारी ने अपनी कविता में वीर रस को प्रस्तुत किया, जिसमें कहा कि मातृभूमि पर निकलने वालों की लंबी परिपाटी है। रक्त पर सोने वालों की वसुंधरा भी एक थाती है...। हास्य कवि पंकज ने कहा-खुद में मैं एक सेलीब्रेटी की झलक पाता हूं, जब से नुक्कड़ पर चाय का ठेला लगाता हूूं..., नीर गोरखपुरी ने श्रोताओं को सुनाया कि- जो मुझे थकने न देती है कभी, हां उसी नन्ही हंसी पे नाज है... आदि प्रस्तुति की।
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इसके अलावा सुफलता त्रिपाठी, डॉ. स्वेदश रश्मि, अन्वेषा श्रीवास्तव, पद्मकांत शर्मा, शिवकुमार व्यास ने काव्यपाठ किया। इससे पूर्व कवि सम्मेलन का शुभारंभ सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा, अयोध्या विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, रुदौली विधायक रामचंदर यादव आदि ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर महोत्सव समिति अध्यक्ष हरीश कुमार श्रीवास्तव, आदित्य नारायन मिश्रा, गिरीश पांडेय, शक्ति सिंह, कृष्ण कुमार पांडेय आदि मौजूद रहे।
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अयोध्या। शहर के जीआईसी में चल रहे अयोध्या महोत्सव में बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें प्रसिद्ध कवि डॉ. विष्णु सक्सेना ने अभी तुम जमीं पर और सीढ़ियां चढ़ लो... समेत अनेक रचनाओं से समां बांध दिया। सम्मेलन में देश के कई नामी-गिरामी कवियों ने काव्यपाठ किया।
हास्य कवि प्रताप फौजदार ने सैनिकों को खुली छूट दे दो, आतंकी मार गिराने की, आतंकवाद न मिट जाये तो मेरी मूछ मुड़ लेना, दुरबीन मैं हाथ में दे दूंगा तुम पाकिस्तान ढूंढ लेना...प्रस्तुत किया। दिनेश ने- बावरा दूध को दूध कह दूं पानी को पानी कह दूं..., मानसी द्विवेदी ने मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की।
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राम किशोर कुमार तिवारी ने अपनी कविता में वीर रस को प्रस्तुत किया, जिसमें कहा कि मातृभूमि पर निकलने वालों की लंबी परिपाटी है। रक्त पर सोने वालों की वसुंधरा भी एक थाती है...। हास्य कवि पंकज ने कहा-खुद में मैं एक सेलीब्रेटी की झलक पाता हूं, जब से नुक्कड़ पर चाय का ठेला लगाता हूूं..., नीर गोरखपुरी ने श्रोताओं को सुनाया कि- जो मुझे थकने न देती है कभी, हां उसी नन्ही हंसी पे नाज है... आदि प्रस्तुति की।
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इसके अलावा सुफलता त्रिपाठी, डॉ. स्वेदश रश्मि, अन्वेषा श्रीवास्तव, पद्मकांत शर्मा, शिवकुमार व्यास ने काव्यपाठ किया। इससे पूर्व कवि सम्मेलन का शुभारंभ सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा, अयोध्या विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, रुदौली विधायक रामचंदर यादव आदि ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर महोत्सव समिति अध्यक्ष हरीश कुमार श्रीवास्तव, आदित्य नारायन मिश्रा, गिरीश पांडेय, शक्ति सिंह, कृष्ण कुमार पांडेय आदि मौजूद रहे।