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त्रेतायुगीन तमसा नदी को जीवनदान देने की पहल शुरू

Thu, 03 Jan 2019 01:05 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Jan 2019 01:05 AM IST
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त्रेतायुगीन तमसा नदी को जीवनदान देने की पहल शुरू
तमसा को अविरल बनाने की पहल शुरू
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अयोध्या। अपनी पहचान खो चुकी जिले की त्रेतायुगीन तमसा नदी को फिर पुराने स्वरूप में लाने की कार्ययोजना तैयार की गई है। मनरेगा व राज्यवित्त आयोग से 23 करोड़ खर्च कर 150 किलोमीटर लंबाई वाली नदी की दो मीटर गहरी खोदाई कराई जाएगी।

साथ ही दोनों ओर पौधे भी रोपे जाएंगे। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ बुधवार को डीएम डॉ. अनिल कुमार व सीडीओ, डीसी मनरेगा ने पूजन-अर्चन कर शिलान्यास किया और फावड़ा चलाकर शुभारंभ किया।
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डीएम ने कहा कि सरकार की पहल यदि कामयाब हो गई तो नदी में पूरे साल पानी हिलोरे मारेगा और उसके चारों ओर हरियाली लहराएगी। कहा कि हम सब लोगों ने जलस्तर के तीनों खंडों को नष्ट कर दिया है। अब जरूरत पानी को बचाने की आ चुकी है।
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इसलिए तमसा को संरक्षित करने के लिए पहल शुरू की गई है। अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग मनोज सिंह ने कहा कि नदी में चार किलोमीटर पर चेक डैम बनाए जाएंगे। जिससे किसानों के खेतों की सिंचाई हो सकेगी।

डीएफओ डॉ. रवि कुमार ने कहा कि नदी के किनारे या प्रवाह के मध्य आने वाले पेड़ों को काटने की अभी जरूरत नहीं है। नदी के दोनों किनारे पर और गांव में खाली पड़ी भूमि पर पौधरोपण कराया जाएगा।

सीडीओ अभिषेक आनंद ने कहा कि मजदूरों के भुगतान में कोई कमी नही आने दी जाएगी। सभी मजदूरों को गांव से ही मनरेगा योजना के माध्यम से भुगतान किया जाएगा। पहले दिन 15 सौ मनरेगा मजदूरों ने डीएम के साथ मिलकर पौराणिक तमसा के जीर्णोद्धार में सहयोग किया।

मवई ब्लॉक के बसौढ़ी के लखनीपुर गांव से निकली तमसा जिले के 83 ग्राम पंचायतों को छूते हुए 150 किमी. की लंबाई लेते हुए अंबेडकर नगर जिले के भीटी विकास खंड में प्रवेश कर आगे की ओर निकल जाती है।


यही नहीं कटेहरी विकास खंड क्षेत्र में पड़ने वाले धार्मिक स्थल श्रवण क्षेत्र के निकट तमसा का बिसुही से संगम होता है। गौराघाटए महादेवा घाट तथा सत्संग घाट इसी पवित्र नदी से जुड़े हैं।
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